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February 13, 2026

राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के भागने के बाद श्रीलंका में फिर भड़के लोग, प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार और आंसू गैस

श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने के बाद फिर से राजधानी कोलंबो में भारी विरोध प्रदर्शन भड़क गए हैं। एक बार फिर से लोग सड़कों पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गए।

श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने के बाद फिर से राजधानी कोलंबो में भारी विरोध प्रदर्शन भड़क गए हैं। एक बार फिर से लोग सड़कों पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इसका कारण ये है कि बुधवार को गोटाबाया ने इस्तीफा देने का वादा किया था, लेकिन वो बिना इस्तीफा दिए ही देश से भाग गए हैं। गुस्साए लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान गोटाबाया के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। साथ ही उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
श्रीलंका से ऐसी ऐसी खबरें भी हैं कि गोटाबाया द्वारा नियुक्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे गोटाबाया की जगह कार्यकारी राष्ट्रपति का पद संभाल सकते हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी इसका भी विरोध कर रहे हैं। हजारों विरोध प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के निजी आवास पर धावा बोल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए आंसू गैस छोड़ी जा रही है। साथ ही पानी की बौछारों का प्रयोग किया जा रहा है। इसका प्रदर्शनकारियों पर कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे बुधवार की सुबह देश छोड़कर फरार हो गए हैं। उन्होंने अपने देश से मालदीव के लिए उड़ान भरी है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस बात की पुष्टि कर दी गई है। बता दें कि गोटाबाया राजपक्षे 13 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा देने वाले थे। इसी बीच अब वह देश से भाग गए हैं। राष्ट्रपति के रूप में, राजपक्षे को गिरफ्तारी से छूट प्राप्त है। माना जा रहा है कि हिरासत में लिए जाने की संभावना से बचने के लिए वे पद छोड़ने से पहले विदेश चले गए। दरअसल गोटाबाया राजपक्षे ने बुधवार को इस्तीफा देने और “सत्ता के शांतिपूर्ण संक्रमण” का रास्ता साफ करने का वादा किया था। अभी तक धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले श्रीलंका में आर्थिक संकट गहराया हुआ है। लोगों को खाने पीने के लाले पड़े हुए हैं। पहले तक जाति और धर्म के नाम पर लड़ने वाली जनता अब सत्ता के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रही है।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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