पहले एफआरआइ के संविदा कर्मी की बेटी की हुई थी मौत, छह माह बाद पत्नी की भी मौत, सीटू ने वजह बताई आर्थिक तंगी
उत्तराखंड के देहरादून में एफआरआइ के संविदा कर्मी की पत्नी अंजू ने हाल ही में आत्महत्या की। इससे करीब छह माह पहले उनकी बेटी ने भी आत्महत्या की थी। इसकी वजह को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन ने आर्थिक तंगी से परेशानी को बताया। साथ ही देहरादून के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर मामले की जांच की मांग की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) के जिला महामंत्री लेखराज ने बताया कि सीटू से संबद्ध संविदा श्रमिक संघ यूनियन एफआरआइ में कार्यरत संविदा कर्मियों की वेतन सहित अन्य लम्बित मांगों को लेकर श्रम विभाग व अन्य माध्यमों से संघर्षरत है। संस्थान में संविदा कर्मियों को पिछले 6 माह से वेतन नही मिल रहा है। इस वजह से सीटू यूनियन ने इस संदर्भ में एक मामला समय पर वेतन भुगतान हेतु सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) के समक्ष उठाया। जो कि गतिमान है। इस कारण संविदाकार कम्पनी की ओर से श्रमिकों के वेतन का भुगतान किया गया, किंतु अभी भी तमाम श्रमिको का चार से पांच माह का वेतन रुका हुआ है। उनका भुगतान अभी तक नही किया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि आज उन्होंने कर्मचारी की पत्नी की आत्महत्या के मामले को लेकर जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। इसमें FRI प्रशासन पर गम्भीर आरोप लगाए गए हैं। इसमे प्रकरण की जांच के आदेश एसडीएम सदर को दिए गए हैं। मृतका के पति मुकेश कुमार को भी सितम्बर माह से वेतन का भुगतान नही किया गया है। मुकेश अकेला ही कमाने वाला है, जिस कारण परिवार में भयंकर रूप से आर्थिक संकट गहरा गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लेखराज ने बताया कि आर्थिक संकट के चलते परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया था। इस कारण श्रमिक की पत्नी ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने बताया कि वेतन भुगतान समय पर नही होने के चलते श्रमिको द्वारा सहायक श्रमायुक्त को एक पत्र अलग से भी दिया गया था, जिसमे आर्थिक संकट के दुष्परिणामो का जिक्र किया गया था। इस पर FRI प्रशासन द्वारा कोई संज्ञान नही लिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि 2019 में FRI प्रशासन की ओर से भर्ती के लिए विज्ञप्ति निकाली गई थी। इसमे भर्ती घपले के कारण रद्द करनी पड़ी व पुलिस कारवाही भी अमल में लायी गयी थी। इस कारण यूनियन के 118 सदस्यों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इस पर उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा इन कर्मचारियों को निकालने पर रोक लगा दी थी। ये मामला अभी भी लंबित है। इस कारण FRI प्रशासन द्वारा उत्पीड़न करने के उद्देश्य से श्रमिको का वेतन रोकना, उनकी सर्विस कंडीशन में चेंज करने के साथ ही विभिन्न तरीकों से कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने बताया कि एक अन्य श्रमिक पीताम्बर दत्त (चालक) की भी मृत्यु भी इन्ही हालात में हुई थी। संविदाकार कम्पनी किंग सिक्योरटी द्वारा FRI प्रशासन के इशारे पर श्रमिको को समय पर वेतन न देना व श्रमिको का उत्पीड़न करना आम बात हो गयी है। उन्होंने बताया कि पछले वर्ष FRI प्रशासन द्वारा संविदा पर वर्षो से लगे सैकड़ो श्रमिको को एक झटके में हटा दिया गया था, जिनको भी आर्थिक तंगी के हालातों से जूझना पड़ रहा है। निदेशक की ओर से श्रमिको का उत्पीड़न इसलिए किया जा रहा है कि उन्होंने आंदोलन किया। निदेशक का यह कहना कि वे 24 फरवरी 2023 को सभी श्रमिकों को निकाल देंगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि वे इस संदर्भ में मानवाधिकार आयोग व सरकार से मांग करेंगे कि FRI के श्रमिक की पहले बेटी व अब पत्नी द्वारा आत्महत्या के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसमें यदि FRI प्रशाशन व संविदाकार कम्पनी किंग सिक्योरिटी किसी भी रूप में दोषी पायी जाती है, तो कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा श्रम कानूनों में परिवर्तन कर दिया है कि यदि किसी श्रमिक की मृत्यु संस्थान में गलत तरीके से काम करवाने या उत्पीड़न के चलते होती है, तो प्रधान नियोजक की गिरफ्तारी नही हो सकेगी। इससे श्रमिको का जीवन असुरक्षित हो गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने श्रम कानूनों के मालिकों के पक्ष में बनने का विरोध किया। कहा कि सरकार का मजदूर विरोधी चेहरा सामने आ गया है जिसका सीटू विरोध करेगी। ज्ञापन देने वालों में इस अवसर पर कम्युनिष्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महानगर सचिव अनंत आकाश, सीटू के उपाध्यक्ष भगवंत पयाल, कोषाध्यक्ष रविन्द्र नौडियाल, माम् चंद सहित एफआरआइ के विभिन्न कर्मचारी उपस्तिथ थे।

Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



