सात गांवों के लोगों की सांकेतिक जलसमाधि बनी नई मिसाल, धामी का जादू गहराने का ये है राज
आजाद हिंदुस्तान के इतिहास में संभवत: यह पहली घटना है जब अपने प्रिय नेता की हार से क्षेत्र के लोग इतने आहत हुए कि उन्होंने प्रायश्चित के लिए सामूहिक रूप से जलसमाधि ले ली। ये जलसमाधि भले ही सांकेतिक हो, लेकिन इसने अपने नेता से भावनात्मक लगाव और संवेदनात्मक जुड़ाव का वो संदेश दिया है, जो उत्तर भारत की राजनीति में तो नहीं ही दिखता। जिस दौर में ज्यादातर लोग अपनी गलतियां दूसरों के सिर थोबकर पल्ला छाड़ लेते हैं, ऐसे में किसी नेता की चुनाव में हार के लिए सार्वजनिक रूप से खुद को जिम्मेदार मानना, एक अलग तरह की मिसाल है। यह सब ऐसे मौके पर हुआ है, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दुबारा चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। इस बार बहुत कुछ बदला हुआ है। चुनावी रणक्षेत्र दूसरा है और वह नेता भी कोई आम उम्मीदवार नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री भी ऐसा जिसका लोग पलक पांवडे बिछाकर स्वागत करते हैं और दिल से चाहते हैं।
कुछ महीने मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करके पुष्कर सिंह धामी ने आम जनता से लेकर अपनी पार्टी के नेतृत्व तक का भरोसा कुछ इस अंदाज में जीता है कि लोग उनकी हार से दिली तौर पर आहत हैं। राजनीति में कम ही नेता ऐसे होते हैं कि चुनावी मुकाबले में मात खाने के बाद भी उन्हें विधायक मंडल का सर्वसम्मत नेता चुन लिया जाए। ये पुष्कर सिंह धामी की कई दशकों में धीरे-धीरे बनी पहचान, उनके व्यवहार की सहजता- सरलता और राज्य को आगे बढ़ाने व आम आदमी की जिंदगी में मिठास घोलने की ईमानदार कोशिशों का ही नतीजा है कि वह हार कर भी जीत गए। मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी के इस दूसरे कार्यकाल के दो महीने भी अभी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनका जादू और गहराने लगा है।
खटीमा के सात गांवों के लोगों की सांकेतिक जल समाधि चुनावी राजनीति के इस दौर में तमाम लोगों के लिए एक सबक है, लेकिन ये प्रेम भी एकतरफा नहीं है। चुनाव के नतीजे कुछ भी रहे हों, मुख्यमंत्री धामी के दिल में खटीमा के लोगों के लिए कोई मैल नहीं है। यह बात खुद उन्होंने जता भी दी है। उनका कहना है कि चुनाव के नतीजे उनके प्रेम को कम नहीं कर सकते। खटीमा उनका घर है और घर के लोगों से सबको प्रेम होता है। खटीमा के लिए मंजूर हो चुकी 300 करोड़ रुपये की योजनाओं पर पूरी शिद्दत से कार्य किया जाएगा।
ये सवाल उठ सकता है कि पुष्कर सिंह धामी ने चंद महीने मुख्यमंत्री रहकर ऐसा कौन सा मंत्र फूंक दिया कि जनता से लेकर पार्टी की टॉप लीडरशिप और विधायक तक उन पर इतना विश्वास करते हैं। इसका जवाब सियासी नफे नुकसान का हिसाब जोड़ने वालों के लिए भले ही कठिन हो, लेकिन आम लोगों से बातचीत करके ये कोई बड़ा रहस्य नहीं लगता। बातचीत की मिठास, काफी ज्यादा घंटे काम करना जैसी विशेषताएं, तो कई नेताओं में मिल जाती हैं। लेकिन सूबे के हर हिस्से के दुख दर्द को दूर करने की ईमानदार कोशिशें केवल नारों में सिमटकर रह जाएं, तो भरोसा दरकते देर नहीं लगती। पुष्कर सिंह धामी ने कुछ ही महिनों में बहुत से बड़े कार्यों को साफ सुथरे ढंग से अंजाम देकर अपनी नेकनीयती, तपस्या जैसी कठोर मेहनत, दूरदृष्टि और सियासी परिपक्वता का जो नमूना दिखाया है, वह भरोसे की डोर को मजबूत बनाता है। खासबात यह है कि उनके कार्यों और अंदाज में सहजता व इन्साफ पसंदगी का जो अक्स नजर आता है, वह आज की राजनीति में बिरले ही दिखाई देता है।
दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद महज डेढ़ माह की छोटी सी अवधि में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुजुर्गों, किसानों, युवाओं, पूर्व सैनिकों और गरीबों के लिए जिस तरह के निर्णय किए हैं, वे उन्हें संवेदनशील नेता साबित करते हैं। वृद्धावस्था पेंशन पति पत्नी दोनों को देने का फैसला, वृद्धावस्था, निराश्रित विधवा भरण पोषण अनुदान व दिव्यांग पेंशन की राशि बढ़ाना, गरीब परिवारों को तीन सिलेण्डर मुफ्त देने, पीएम किसान सम्मान निधि योजना की तर्ज पर सीएम किसान प्रोत्साहन निधि की शुरूआत करने, पर्यावरण मित्रों का मानदेय बढ़ाने जैसे फैसले श्री धामी की सबके हितों से जुड़ी सोच का प्रमाण हैं।
इनके साथ ही चारधाम सर्किट में आने वाले सभी मंदिरों और गुरूद्वारों में भौतिक ढांचे व परिवहन सुविधाओं का विस्तार, कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों को भव्य बनाने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन की शुरूआत, मिशन मायापुरी के अंतर्गत हरिद्वार को योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी और विश्व में आध्यात्मिक पर्यटन के लिये सबसे बड़े स्थलों के रूप में बदलने को बेहतरीन बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे फैसले विकास की दूरगामी सोच से जुड़े हैं।
उत्तराखंड को हाई टेक राज्य के रूप में आगे बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 4 जी औ 5 जी मोबाइल नेटवर्क, हाई स्पीड ब्राडबैंड व फाइबर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने, पार्किंग की समस्या दूर करने, सैलानियों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षित- सुविधाजनक यात्रा की दिशा में महत्वपूर्ण योजनाएं बनाकर मुख्यमंत्री धामी ने अपनी प्राथमिकताओं को अमली जामा पहनाने की शुरूआत भी कर दी है। महज ढेर माह का ये सफर सूबे के लोगों के साथ ही सैलानियों और तीर्थयात्रियों के लिए भी एक बड़ा सुखद अहसास है।
राज्य में समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन के लिये विशेषज्ञों की समिति बनाने का धामी कैबिनेट की पहली बैठक का निर्णय समानता की दिशा में एक बड़ी छलांग साबित हो सकता है, लेकिन उन्होंने इसके लिए एक महत्वपूर्ण कमेटी के गठन का निर्णय करके यहां भी अपनी नेकनीयती की छाप छोड़ दी है। न्यायविदों, सेवानिवृत्त जजों, समाज के प्रबुद्ध जनों और अन्य स्टेकहाल्डर्स को एक कमेटी का गठन करके उत्तराखण्ड राज्य के लिए यूनिफार्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।




