पूर्व सांसद तरूण विजय को हिंदी संस्थान उत्तर प्रदेश ने दिया हिन्दी गौरव सम्मान

इस वर्ष हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश की ओर से हिंदी गौरव सम्मान पूर्व सांसद तरुण विजय को दिया गया है। सम्मान में प्रशस्ति पत्र व चार लाख रूपय की राशि दी जाती है। हिंदी संस्थान उत्तर प्रदेश का विश्व विख्यात प्रतिष्ठित हिंदी अधिष्ठान है। जो प्रतिवर्ष देश के विभिन्न भागों से हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकारों, हिंदीसेवियों, पत्रकारों को सम्मानित करता है। शिखर सम्मानों में भारत भारती, हिंदी गौरव, महात्मा गाँधी साहित्य सम्मान प्रमुख हैं।
यह सम्मान राष्ट्रीय स्तर का महत्व रखता है और यह उत्तराखंड का गौरव है कि यहाँ जन्मे, पले बढ़े और यहीं से जो सांसद (राज्य सभा सदस्य) हुए। ऐसे तरुण विजय को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है। देहरादून में गाँधी स्कूल तथा डीबीएस कालेज के छात्र तरूण विजय ने देहरादून से ही पत्रकारिता प्रारम्भ की।
उनके अभिनंदन में 4 अप्रैल रविवार को देहरादून के होटल मधुबन में तीन बजे अपराह्न वरिष्ठ साहित्यकार लीला धर जगुड़ी, गीतकार नरेन्द्र सिंह नेगी, इतिहास वेत्ता, पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अनिल रतूड़ी ‘हिन्दी साहित्य को समसामयिक चुनोतियाँ’ विषय पर विमर्श में शामिल होंगे।
जानिए तरुण विजय के बारे में
तरुण विजय (जन्म 2 मार्च 1956) भारतीय राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत पत्रकार एवं चिन्तक हैं। वह 1986 से 2008 तक करीब 22 सालों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पाञ्चजन्य के संपादक रहे। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत ब्लिट्ज़ अखबार से की थी। बाद में कुछ सालों तक फ्रीलांसिंग करने के बाद वह आरएसएस से जुड़े और उसके प्रचारक के तौर पर दादरा और नगर हवेली में आदिवासियों के बीच काम किया। वह उत्तराखंड से राज्यसभा के सदस्य भी रहे। सांसद तरुण विजय राज्यसभा के सर्वश्रेष्ठ सांसदों में एक रहे। सभी दलों के नेताओं ने उनकी राज्यसभा में सक्रियता की प्रशंसा की। स्वतंत्र संसदीय समीक्षा संगठन पीआरएस ने उन्हें संसद के सर्वश्रेष्ठ सांसदों में से एक चुना है।




