उत्तराखंड के सीएम तीरथ की पत्नी को था विश्वास पति ने नाम की होगी घोषणा, बेटी को नहीं थी कोई हिंट, जानिए क्या कहा
सीएम तीरथ की पत्नी रश्मी त्यागी रावत यहां देहरादून में डीएवी महाविद्यालयम में मनोविज्ञान की शिक्षिका है। पति के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने कहा कि मुझे पहले से ही विश्वास था कि उनके नाम की घोषणा होगी।

उत्तराखंड के 10वें सीएम के रूप में आज भाजपा नेता तीरथ सिंह रावत की ताजपोशी हो गई। राजभवन में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सीएम तीरथ की पत्नी रश्मी त्यागी रावत यहां देहरादून में डीएवी महाविद्यालयम में मनोविज्ञान की शिक्षिका है। पति के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने कहा कि मुझे पहले से ही विश्वास था कि उनके नाम की घोषणा होगी। उनके मुख्यमंत्री बनने से घर परिवार में इस समय होली का माहोल है। बधाई, मिठाई का सिलसिला शुरू हो चुका है।
मनैविज्ञान की शिक्षिका का मनोविज्ञान यहां भी काम आया। उन्होंने खुद अपने मन के उदगार व्यक्त किए और बताया कि मेरे साथ के शिक्षक व अन्य कई लोग मुझे कॉल कर रहे थे कि इनका भी नाम चल रहा है, उनका भी नाम चल रहा है। भाई साहब का नाम तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा। तो मैने उनसे यही कहां कि आप शांत रहिये, जैसे तीरथ जी शांत रहते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास था कि उन्हीं के नाम की घोषणा होगी। जिस तरह का नेतृत्व आज की परिस्थिति में चाहिए, तीरथ जी में चुनौतियां स्वीकार करने की जो क्षमता है, जो उनका व्यवहार है वह वर्तमान परिपेक्ष्य में फिट बैठ रहा है। मुझे लगता था कि पार्टी उन्हीं के पक्ष में निर्णय लेगी।
राजनीति के इच्छुक नहीं थे तीरथ
तीरथ सिंह रावत की पत्नी रश्मी त्यागी रावत ने बताया कि उनके पति राजनीति में आने के इच्छुक नहीं थे। संघ प्रचारक के तौर पर उन्होंने शुरुआत की। जहरीखाल में वो पढ़ते थे तो आरएसएस की शाखाओं को लगाते थे। धीरे-धीरे वो बढ़ते चले गए और उन्हें अभाविप में भेज दिया गया। आरएसएस ने ही उनकी भाजपा में एंट्री कराई। वह युवा मोर्चा में उपाध्यक्ष रहे राजनाथ (वर्तमान में केंद्रीय रक्षा मंत्री) जी के साथ। तब से उनकी शुरआत हो गई थी। बहुत बड़े-बड़े नेताओं के साथ वह रहे हैं। जीवनभर का अनुभव उनके पास है।
पूर्व सीएम खंडूड़ी को मानते हैं आदर्श
तीरथ सिंह रावत की पत्नी के मुताबिक उनके पति उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूडी जी को वह अपना गुरु व अटल जी को आदर्श मानते हैं। उनकी विचारधारा उन्होंने आत्मसात कर रखी है। अपने सिद्धांतों से वह कभी समझौता नहीं करते। उन्हें साधारण सा जीवन जीना पसंद है और वह कभी दिखावे में नहीं पड़ते। न कभी पैसे के पीछे भागे। जब वह शिक्षा मंत्री थे, मेरी डोईवाला में नौकरी थी। मैं पांच हजार की नौकरी करने डोईवाला जाती थी। मुझे लगता था कि तीरथ जी का कॅरियर राजनीति में है और अप एंड डाउन लगे रहेंगे। तो मैने साढ़े आठ साल तक राजकीय डिग्री कॉलेज में नौकरी की। उसके बाद मेरा चयन डीएवी कॉलेज में हो गया।
पार्टी का किया शुक्रिया
मुख्यमंत्री की पत्नी ने कहा कि मैं शुक्रिया अदा करती हूं कि पार्टी ने उनमें विश्वास जताया है। इतना बड़ा निर्णय लेना, जबकि एक साल रह गया है। जरूर कुछ खूबियां उन्होंने तीरथ जी में देखी होंगी। निर्णय लेने वालों ने कई बार सोचा होगा, मंथन किया होगा कि जो हम अपेक्षा कर रहे हैं। इस व्यक्ति से क्या वह उसे धरातल पर उतार पाएगा। मुझे लगता है कि वो इस विश्वास को कायम रखेंगे। जिस तरह से पूरे उत्तराखंड में वो प्रिय हैं।
नहीं करते भेदभाव
उन्होंने बताया कि तीरथ किसी तरह के भेदभाव या क्षेत्रवाद को नहीं मानते हैं। यह उनका बहुत बड़ा गुण है कि वह हर किसी को समभाव से देखते हैं। यह उन्होंने आरएसएस व अभाविप में रहकर सीखा है। 2017 में जब वह चोबट्टाखाल से विधायक थे, उनका टिकट काट दिया गया था। परिवार को बहुत बुरा लगा था। पर तीरथ जी गंभीर व्यक्तित्व के हैं और वह कुछ नहीं बोले। दो साल बाद ही संगठन ने उन्हें तीन राज्यों का प्रभारी बना दिया। शायद उनकी कार्य क्षमताओं को देखते हुए। फिर उन्हें सांसद बनाया। जनता ने भी पूरा सहयोग दिया।
पापा ने नहीं दिया कोई हिंट
उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की बेटी लोकांक्षा के मुताबिक कल रात भी पापा से बात हुई थी, पर ऐसा कोई हिंट उन्होंने नहीं दिया। फोन में लाइव खोला हुआ था और उससे ही पता चला। पापा ने सुबह एग्जाम (दसवीं की छात्रा हैं) के लिए ऑल द बेस्ट कहा था। एकाएक यह खबर चौंका देने वाली थी। मैं प्री बोर्ड दे रही हूं अपने। राजनीति में रहकर वह उतना वक्त नहीं दे पाते थे। जितना ज्यादा पब्लिक के बीच रहेंगे, उनकी समस्याएं हल करेंगे। इसी लिए उन्हें चुना भी गया है।
लोकांक्षा ने कहा कि आगे के बारे में अभी कुछ सोचा नहीं है, पर जो भी करूंगी अच्छा करूंगी और परिवार को गौरान्वित करूंगी। वह पहले भी जनता को, अपने लोगों को हमसे ज्यादा वक्त देते थे। मुझे पापा पर पूरा विश्वास है कि वह हर किसी की समस्या हल करेंगे और उत्तराखंड को बहुत ऊपर तक लेकर जाएंगे।
ऐसे हुआ नेतृत्व परिवर्तन
गौरतलब है कि छह मार्च को केंद्रीय पर्यवेक्षक वरिष्ठ भाजपा नेता व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह देहरादून आए थे। उन्होंने भाजपा कोर कमेटी की बैठक के बाद फीडबैक लिया था। इसके बाद उत्तराखंड में आगामी चुनावों के मद्देनजर मुख्यमंत्री बदलने का फैसला केंद्रीय नेताओं ने लिया था। इसके बाद मंगलवार नौ मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं, आज भाजपा की विधानमंडल दल की बैठक में तीरथ सिंह रावत को नया नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल के पास जाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। आज शाम चार बजे उन्होंने एक सादे समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।




