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October 9, 2026

पैक्स सचिव कर्मचारी संयुक्त संगठन की हड़ताल को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने दिया समर्थन, हड़ताल से किसानों पर सीधा असर

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड ने राज्य में पैक्स सचिव कर्मचारी संयुक्त संगठन की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर की जा रही प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल को अपना समर्थन दिया है। परिषद के पदाधिकारी हड़ताली कर्मचारियों के पास गए और उनके धरने पर भी बैठे। परिषद ने कहा कि पैक्स सचिव एवं कर्मचारी संयुक्त संगठन द्वारा लंबे समय से अपनी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए शासन के समक्ष विषय उठाए जा रहे हैं। संगठन की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं के साथ-साथ किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कहा कि किसानों और सहकारी क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाना आवश्यक है। हड़ताल के कारण किसानों को होने वाली संभावित परेशानियों को देखते हुए परिषद ने शासन से आग्रह किया कि संबंधित कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल वार्ता कर उनकी जायज समस्याओं का समाधान किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

परिषद ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संवाद और वार्ता के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि हड़ताल के कारण आमजन एवं किसानों के कार्य प्रभावित न हों। परिषद ने पैक्स सचिव कर्मचारी संयुक्त संगठन को आश्वस्त किया कि कर्मचारी हितों से जुड़े इस संघर्ष में परिषद उनके साथ खड़ी है और उनकी न्यायोचित मांगों के समाधान के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। इस अवसर पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधि के रूप में प्रदेश प्रवक्ता हर्ष जोशी एवं देहरादून जिला मंत्री पिंकेश रावत उपस्थित रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एक अक्टूबर से शुरू हुई हड़ताल
उत्तराखंड में पैक्स (PACS) सचिव एवं कर्मचारी संयुक्त संगठन की छह सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध हड़ताल और अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। कर्मचारियों की ओर से पहले एक अक्टूबर से चार अक्टूबर 2026 तक प्रदेशव्यापी कलमबंद हड़ताल की गई। इसके बाद पांच अक्टूबर 2026 से देहरादून स्थित सहकारी समिति निबंधक कार्यालय (मियांवाला) सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में तालाबंदी और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आंदोलन की वजह
छह सूत्रीय मांगें: कर्मचारी लंबे समय से प्रशासनिक सुधारों, वेतनमान की विसंगतियों को दूर करने और सेवा नियमों से जुड़ी अपनी 6 प्रमुख मांगों को लेकर शासन और विभाग के सामने गुहार लगा रहे हैं।
उपेक्षा का आरोप: संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे 18 सितंबर 2026 से शांतिपूर्ण और चरणबद्ध तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे। शासन स्तर से कोई ठोस कार्रवाई या आश्वासन न मिलने के कारण उन्हें उग्र आंदोलन और कलमबंद हड़ताल का कदम उठाना पड़ा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हड़ताल से आम जनता और किसानों पर सीधा असर
इस हड़ताल के कारण ग्रामीण इलाकों में सहकारिता और खेती से जुड़े कामकाज पूरी तरह ठप हो गए हैं। कर्मचारी संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं लेती, तब तक यह बेमियादी धरना और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
खाद का गंभीर संकट: वर्तमान में रबी फसलों (गेहूं, मटर, सरसों आदि) की बुवाई का समय है। समितियों में ताले लटके होने के कारण किसानों को बुवाई के लिए जरूरी खाद और बीज नहीं मिल पा रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मिनी बैंकों से लेनदेन ठप: उत्तराखंड के मिनी बैंकों में आम जनता और किसानों की 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जमा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य बैंकों का विकल्प न होने से लोग अपनी ही जमा पूंजी निकालने के लिए परेशान हो रहे हैं।
सरकारी योजनाओं में रुकावट: समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचने वाली ऋण वितरण और अन्य कल्याणकारी सरकारी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।