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October 8, 2026

हिम्स जौलीग्रांट में थ्रीडी मैपिंग से दिल की धड़कन का सटीक इलाज, पेसमेकर और सीआरटी जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स) जौलीग्रांट में दिल की धड़कन बहुत तेज, बहुत धीमी या अनियमित होने की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए अत्याधुनिक उपचार की सुविधा शुरू की गई है। यहां कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी एंड डिवाइसेज के तहत धड़कन संबंधी जटिल बीमारियों की जांच और उपचार आधुनिक तकनीक से किया जा रहा है। पिछले दो माह में थ्रीडी मैपिंग की मदद से करीब 35 ईपीएस-आरएफए प्रक्रियाएं की जा चुकी हैं। इसके साथ ही पेसमेकर, सीआरटी और कंडक्शन सिस्टम पेसिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

थ्रीडी मैपिंग से असामान्य धड़कन का पता लगाना आसान
हिम्स जौलीग्रांट के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वत्सल सिंह ने बताया कि हृदय की धड़कन एक विशेष विद्युत प्रणाली से नियंत्रित होती है। इसमें गड़बड़ी होने पर दिल की धड़कन अनियमित, बहुत तेज या धीमी हो सकती है। इसे एरिथमिया कहा जाता है। यह समस्या जन्मजात होने के साथ-साथ हार्ट डिजीज से पीड़ित मरीजों में भी हो सकती है। समय पर इसकी पहचान और उपचार जरूरी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग रावत ने बताया कि थ्रीडी मैपिंग तकनीक से हृदय के अंदर असामान्य विद्युत संकेत पैदा होने वाली जगह की सटीक पहचान की जाती है। इसके बाद आधुनिक एब्लेशन तकनीक से उसका उपचार किया जाता है। इससे जटिल मामलों में उपचार अधिक सटीक बनाने में मदद मिलती है। पेसमेकर, डिफिब्रिलेटर और सीआरटी जैसी सुविधाएं गंभीर हृदय रोग और हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए उपयोगी हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आसपास के मरीजों को मिलेगा लाभ
निदेशक (अस्पताल सेवाएं) डॉ. हेम चंद्रा ने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से उत्तराखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को धड़कन संबंधी जटिल बीमारियों के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। मरीज की बीमारी और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार किया जा सकेगा।
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Bhanu Bangwal

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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।