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August 25, 2026

एक देश, एक चुनाव लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश: गरिमा मेहरा दसौनी

उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि एक देश से चुनाव की अवधारणा लोकतंत्र को मजबूत नहीं बना सकती है। इसके उलट इससे लोकतंत्र कमजोर होगा। ऐसे में कांग्रेस ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा का स्पष्ट रूप से विरोध करती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एक बयान में उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में चुनाव केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता को अपनी सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करने और जब चाहे तब अपनी आवाज़ बुलंद करने का संवैधानिक अधिकार हैं। गरिमा ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ के नाम पर लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना व्यावहारिक भी नहीं है। साथ ही संघीय ढांचे की भावना के अनुरूप भी नहीं है। दसौनी के अनुसार केंद्र और राज्य के मुद्दे अलग-अलग होते हैं, उनकी राजनीतिक परिस्थितियां अलग होती हैं और जनता को अलग-अलग समय पर अपनी सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस नेत्री गरिमा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर किसी राज्य की चुनी हुई सरकार अपना बहुमत खो देती है, या किसी अन्य संवैधानिक परिस्थिति में विधानसभा भंग होती है, तो क्या केवल चुनावी चक्र बनाए रखने के लिए जनता को लंबे समय तक नई सरकार चुनने से रोका जाएगा? यह सवाल इस पूरी व्यवस्था की गंभीर संवैधानिक जटिलता को सामने लाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दसौनी ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि असल मुद्दा चुनाव की संख्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गुणवत्ता है। सरकार को चुनावों से नहीं, अपनी नीतियों और कामकाज से डरना चाहिए। चुनाव लोकतंत्र का उत्सव हैं, बोझ नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि देश में चुनावी सुधार जरूर होने चाहिए, लेकिन ऐसे सुधार जनता के मतदान के अधिकार, राज्यों की स्वायत्तता और संविधान के संघीय ढांचे से समझौता करके नहीं किए जा सकते।एक देश, एक चुनाव के बजाय मजबूत लोकतंत्र, मजबूत संघीय ढांचा और मजबूत जनादेश हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
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