उत्तराखंड में मुस्लिमों का इतिहास 800 साल पुराना: इस्लाम हुसैन
सत्ता और उससे जुड़े लोग आज बेशक उत्तराखंड में मुसलमानों को आतताई कहा जा रहा हो। उन्हें जेहादी कहकर दुष्प्रचारित किया जा रहा हो, लेकिन वास्तव में मुसलमान पिछले 800 सालों से इस भूभाग का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। जिन मजारों को आज लैंड जेहाद से जोड़ा जा रहा है, वे सूफी सिद्ध पुरुषों की मजारें हैं। सूफी संत इस क्षेत्र में सभी धर्मों में सम्मानित रहे हैं। यह बात जाने-माने इतिहासकार और उत्तराखंड सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष इस्लाम हुसैन ने कही। वह उत्तराखंड इंसानियत मंच के वार्षिक सम्मेलन के मौके पर आयोजित विचार गोष्ठी में बोल रहे थे। इस सम्मेलन में कोटद्वार में इंसानियत और भाईचारे की मिसाल कायम करने वाले दीपक कुमार और विजय रावत को सम्मानित भी किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस्लाम हुसैन ने कहा कि मुसलमान विभिन्न चरणों में उत्तराखंड आये। ज्यादातर मुसलमानों को यहां के राजाओं ने उनके हुनर को देखकर बुलाया और सम्मान के साथ यहां बसाया। वन गूजरों को सिरमौर के राजा ने अपनी बेटी के दहेज में गढ़वाल के राजकुमार को दिया था। सिरमौर को ये गूजर कश्मीर के राजा के ओर से दहेज में दिये गये थे। इस तरह अगल-अलग कालखंडों में मुसलमान यहां आते रहे और यहीं के होकर रह गये। रोहिलों ने गोरखों को उत्तराखंड से खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कश्मीर से उत्तराखंड तक पूरे हिमालयी क्षेत्र में मुस्लिम आबादी सैकड़ों सालों से रहती आ रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
हाल के दिनों बहुचर्चित मजार जेहाद के बारे में उन्होंने कहा कि अखंड भारत में सूफी संत अफगानिस्तान से वन मार्गों से होकर उत्तराखंड आये थे। वे यहां के समाज में सम्मानित थे। मुख्य रूप से बीमारियों का इलाज करने के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हीं सिद्ध पुरुषों के सम्मान में ये मजारें बनी थी। उनके सम्मान में उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में आज भी सैयदी जागर होते हैं। उन जागरों में कुरान की पोथी का जिक्र है और कई पीर फकीरों को भी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस सम्मेलन में कोटद्वार में इंसानियत और भाईचारे की मिसाल कायम करने वाले दीपक कुमार और विजय रावत को सम्मानित किया गया। दीपक रावत ने कहा कि युवाओं का एक वर्ग रास्ते से भटक गया है और नफरत फैला रहा है। सीनियर सिटीजन को ऐसे युवाओं के माता-पिता से मिलकर उन्हें सही रास्ते पर लाने का प्रयास करना चाहिए। विजय रावत ने कहा कि जिन लोगों ने कोटद्वार में दंगा करने का प्रयास किया, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन दीपक और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सम्मेलन में एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल, सीएफजीडी की जया सिंह, एडवोकेट स्निग्धा तिवारी, सर्वोदय मंडल के यशवीर आर्य, साहित्यकार समदर्शी बर्त्वाल, जन विज्ञान के विजय भट्ट, ट्रांस जेंडर समुदाय के शमन गुप्ता और एडवोकेट रिजवान अली ने भी अपने विचार रखे और इंसानियत मंच को आगे के कार्यक्रमों के बारे में सलाह दी। डॉ. रवि चोपड़ा ने स्वागत भाषण दिया और कमला पंत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मंच संचालन हरिओम पाली ने किया। सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, धर्मानन्द लखेड़ा, ममता राव और ऊमा भट्ट ने जनगीत गाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर निर्मला बिष्ट, पद्मा गुप्ता, आरपी विशाल, विमला कोली, नन्द नंदन पांडेय, तुषार रावत, चंद्रकला, मंजू बलौदी, विजय नैथानी, राजेश सकलानी, जगमोहन मेहंदीरत्ता, डॉ. जितेन्द्र भारती, सुजाता पॉल, मुकेश बहुगुणा, राकेश अग्रवाल, प्रेम सिंह दानू, राजू सिंह, जगदीश कुकरेती, मंजूर बेग, बीजू नेगी, ईश्वर पाल सिंह, समर भंडारी, पूरन बर्त्वाल, दीपा कौशलम, वीके डोभाल, प्रो. राघवेन्द्र, परमजीत सिंह कक्कड़, विभापुरी दास, एस एस पांगती, हरजिन्दर सिंह, हरवीर कुशवाहा, राकेश पंत, तरविन्दर कौर, समीना मलिक, गीतिका, सुधांशु रावत, रोबिन त्यागी, विनीत प्रसाद भट्ट सहित कई लोग मौजूद थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


