संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति उत्तराखंड का प्रांतीय कन्वेंशन, केंद्र की मोदी सरकार पर बोला हमला, 12 फरवरी को सफल होगी हड़ताल
संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति उत्तराखंड का एक दिवसीय कनवेंशन देहरादून में उत्तराखंड प्रेस क्लब सभागार में सम्पन्न हुआ। इस दौरान देश की प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 12 फ़रवरी की हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति बनाई गई। साथ ही केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीति के खिलाफ जोरदार हमला किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सीटू, इंटक, एटक की ओर से आयोजित कन्वेंशन में वक्ताओ ने मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों का विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि जब पूरी दुनियां मे करोना से त्राहि -त्राहि मची थी। इसमें सबसे अधिक मजदूर वर्ग प्रभावित हुआ था। ऐसे समय मे केंद्र की मोदी सरकार ने बड़े संघर्षो और बलिदानो के बाद हासिल किये श्रम कानूनों को समाप्त कर मजदूर विरोधी व कारपोरेट परस्त चार श्रम सहिताएं बनाई। इसका श्रमिक संगठनों की ओर से जमकर विरोध किया गया। इस कारण मोदी सरकार उन्हें लागू नहीं कर सकी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओं ने कहा कि इसके बाद गत वर्ष नौ जुलाई कि हड़ताल के बाद केंद्र सरकार ने इन श्रम संहिताओं को लागू नहीं करने का आश्वाशन दिया गया था, किन्तु बिहार चुनाव जितने के पश्चात 21 नवंबर 2025 को इन्हे लागू करने का फरमान सुना दिया। मजदूर संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है और 12 फ़रवरी को एक मुकम्मल हड़ताल का आयोजन किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वक्ताओ ने कहा कि मजदूर इन गुलाम बनाने वाली नीतियों अथवा चारों श्रम सहिताओं को कभी भी नही अपनायेगा। सरकार को को इन्हे वापस लेने के लिए मजबूर कर देगा । इस अवसर पर तय किया गया कि उत्तराखंड कि धामी सरकार इन श्रम सहिताओं को लागू करने कि ओर अग्रसर है। इसलिए इस सरकार के खिलाफ भी 12 फरवरी को गाँधी पार्क से सचिवालय पर कूच किया जाएगा ओर धामी सरकार को भी इन नितिओ पर आगे बढ़ने से रोकेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर चारों श्रम सहिताएं वापस लेने, न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, केंद्र व राज्य सरकार के विभागों, संस्थाओ मे कार्यरत संविदा व ठेकेदार के श्रमिकों को समान काम का समान वेतन देने, नियमितीकरण करने, सभी को पेंशन का लाभ देते हुए न्यूनतम पेंशन 7000 से ज्यादा करने, पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने, एलआईसी मे 100 FDI को वापस करने, रेल, बिजली, बैंक, पोस्टल के निजीकरण पर रोक, आयुध निर्माणियों का रजकीयकारण करने व निजीकरण पर रोक लगाए, नये एमवी एक्ट को वापस लेने, स्कीम वर्कर्स आशा, भोजन माता, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सेविकाओं को कर्मकार घोषित करने, उन्हें न्यूनतम वेतन देने, देहरादून में रिस्पना, बिंदाल नदियों पर ऐलीवेटेड रोड परियोजना रद्द करने, बस्तीयों के उजाड़ने पर रोक व मालिकाना हक देने सहित कई मांगो का प्रस्ताव पास किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर तीन सदस्य अध्यक्ष मंडल मे पूर्व केबिनेट मंत्री व इंटक के प्रदेश अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट, सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष एमपी जखमोला, ऐटक के प्रांतीय अध्यक्ष सुभाष चंद्र त्यागी ने संयुक्त रूप से की। कान्वेंशन का संचालन सीटू के प्रांतीय सचिव लेखराज ने किया। इस अवसर पर इंटक के जिला अध्यक्ष अनिल कुमार, वीरेंद्र नेगी, सीटू के जिलाध्यक्ष एस. एस. नेगी, ऐटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, आशा, भोजन माता आंगनवाड़ी की ओर से शिवा दुबे, बिजली विभाग से अनिल उनियाल किसान सभा से राजेंद्र पुरोहित व जगदीश कुड़ियाल, एमआर यूनियन से दीपक शर्मा, रोडवेज व परिवहन से दयाकिशन पाठक, उपनल से वीरेंद्र कवि आदि ने हड़ताल को सफल बनाने का आश्वाशन देते हुए आह्वान किया कि इस श्रमिक विरोधी सरकार को वे आने वाले समय में उखाड़ फंकेगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर बड़ी संख्या मे विभिन्न ट्रेड यूनियनों के लग उपस्थित थे। कन्वेंशन में कृष्ण गुनियाल, अभिषेक भंडारी, हिमांशु, सुनीता रावत, मोनिका, कलावती चंदौला, देवानंद पटेल, प्रदीप तोमर, मोहन सिंह, हरीश कुमार, विजय कुमार, मनोज बंसल, विकटर थॉमस, ओपी सोढ़ी आदि बड़ी संख्या मे लोग उपस्थित थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



