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January 16, 2026

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच का ऐलान, आठ फरवरी को देहरादून में होगी महापंचायत

अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के नाम का खुलासा करने की मांग को लेकर उत्तराखंड में आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सीबीआई जांच की संस्तुति को केंद्र सरकार को भेज चुके हैं। वहीं, आंदोलन करने वाले सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का कहना है कि सीबीआई जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। साथ ही जिस वीआईपी को सेवा देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था, इसमें कामयाब नहीं होने पर अंकिता की हत्या की गई, उस वीआईपी के नाम का खुलासा किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून स्थित शहीद स्मारक में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP के खुलासे तथा VIP को बचाने में संलिप्त सभी लोगों को सज़ा दिलाने की मांग को लेकर 08 फरवरी 2026 को देहरादून में एक विशाल महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया गया। इस महापंचायत में देश-प्रदेश से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मंच की कमला पंत ने कहा कि जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से VIP को केंद्र में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जाँच की माँग की थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने केवल अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जाँच की संस्तुति की गई। इससे स्पष्ट होता है कि अब भी VIP को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

संघर्ष मंच के मोहित डिमरी ने कहा कि जब अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जाँच की माँग की थी, तो उसी ज्ञापन को FIR मानते हुए सीबीआई जाँच का आधार बनाया जाना चाहिए था। इसके विपरीत उत्तराखंड पुलिस ने अचानक सामने आई अनिल प्रकाश जोशी की FIR को सीबीआई जाँच का आधार बनाया। इससे सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह प्रतीत होता है कि VIP को बचाने के लिए षड्यंत्र रचा जा रहा है। अन्यथा ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि जिस उर्मिला सनावर को पुलिस, खुफिया विभाग और यहाँ तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक खोज नहीं पा रहा था, वह कई दिनों बाद अचानक दर्शन भारती के साथ दिखाई देती है। उन्होंने माँग की कि दर्शन भारती के फोन की भी जाँच की जाए कि वह कितने समय से उर्मिला सनावर के संपर्क में था। उसने उसे कैसे खोजा और इस प्रक्रिया में उसकी सहायता किसने की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मंच की मांग
1. अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP को केंद्र में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जाँच कराई जाए।
2. अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन को ही FIR मानते हुए सीबीआई जाँच का आधार बनाया जाए।
3. उर्मिला सनावर को ढूँढकर लाने का दावा करने वाले दर्शन भारती की भूमिका की गहन जाँच की जाए।
4. सीबीआई जाँच के लिए बनाई गई अनिल प्रकाश जोशी की FIR को रद्द किया जाए तथा उनकी भूमिका की भी जाँच हो।
5. अंकिता भंडारी हत्याकांड में वनंतरा रिसॉर्ट को ढहाने का आदेश देने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों की जाँच की जाए और इसे सबूत मिटाने का अपराध मानते हुए उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कर उन्हें दंडित किया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक में मुख्य वक्ता
बैठक में वक्ता के रूप में पीसी थपलियाल, सुजाता पॉल, समदर्शी बर्तवाल, पद्मा गुप्ता, संजीव घिल्डियाल, कमलेश खंतवाल, विमला कोली, आशुतोष कोठारी, सोनिया आनंद, राजू सिंह, स्मृति नेगी, मंजू बलोदी, तुषार, कृष्णा सकलानी, हेमलता नेगी सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हाल ही में अचानक इस मामले में नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने इस नाम को उजागर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। इस नए खुलासे के बाद से ही हत्याकांड की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने और वीआईपी सहित अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के साथ ही आम लोग सड़कों पर उतर गए थे। सीएम धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी है। ये संस्तुति एनजीओ चलाने वाले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी की ओर से दर्ज एफआईआर के बाद की गई।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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