18 सूत्रीय मांगों के समर्थन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने शुरू किया गेट मीटिंग का सिलसिला, पढ़िए- मांगें और आगामी आंदोलन की रूपरेखा
उत्तराखंड में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 18 सूत्रीय मांगों को लेकर सिलसिलेवार आंदोलन की घोषणा की हुई है। इसके तहत अब विभिन्न विभागों के कार्यालयों के समक्ष गेट मिटिंग का आयोजन किया जा रहा है। गेट मिटिंग के रूप में आंदोलन की शुरुआत राज्य कर विभाग एवं निदेशालय कोषागार लक्ष्मी रोड देहरादून से की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम का नेतृत्व परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष अरुण कुमार पांडे ने किया। गेट मीटिंग का संचालन राज्य कर विभाग के भानु रावत ने किया। गेट मीटिंग में उपस्थित सभी कर्मचारियों को परिषद की ओर से प्रस्तुत 18 सूत्रीय मांगों की जानकारी दी गई। सभी कर्मचारियों एवं घटक संगठनों ने कर्मचारी हित में प्रस्तावित द्वितीय चरण के आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर परिषद के संरक्षक चौधरी अमवीर सिंह, प्रांतीय महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष राज्य कर विभाग जगमोहन सिंह, सुरेश शर्मा (प्रांतीय संगठन मंत्री), सुनील निरंजन (प्रांतीय प्रवक्ता), बलवंत राणा (प्रांतीय कोषाध्यक्ष), हरीश राणा (उपाध्यक्ष शाखा देहरादून), निशा जुगल (शाखा मंत्री), भानु रावत (पूर्व प्रांतीय महामंत्री), गीता राम डोभाल, रघुवीर तोमर, अरविंद थपलियाल, दिनेश रावत, वर्षा भट्टाचार्य, पूजा कंडवाल, सुनीता जोशी, हरीश राठौर, पंकज डबराल, राकेश मेहता सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसके अतिरिक्त राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश कोषाध्यक्ष रविंद्र चौहान, ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष एवं परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता हर्ष डी जोशी, गन्ना पर्यवेक्षक संघ उत्तराखंड के अध्यक्ष सुरेश चंद्र डबराल, बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण विभाग की प्रदेश अध्यक्ष रेखा भंडारी तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। निदेशालय कोषागार से प्रदेश अध्यक्ष योगेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष कोमल उप्रेती एवं सचिव गोपाल बिनवाल की उपस्थिति रही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आंदोलन की रूपरेखा1-15 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक विभिन्न विभागों में गेट मीटिंग के माध्यम से मांगों को लेकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
2- सात फरवरी 2026 को प्रदेश के प्रत्येक जनपद पर एक दिवसीय धरना एवं जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा।
3- 21 फरवरी 2026 को देहरादून में एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय धरने का आयोजन किया जाएगा।
4- 22 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक अपने अपने क्षेत्रीय विधायकों को कार्मिकों की मांगों से सम्बन्धित ज्ञापन दिया जाएगा।
5- 13 मार्च 2026 को प्रदेश स्तरीय रैली का आयोजन किया जाएगा। साथ ही अनिश्चितकालीन आन्दोलन की घोषणा की जाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये हैं मांग
1- एसीपी के अन्तर्गत 10, 16 एंव 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नत वेतनमान देने के लिए विभिन्न विभागों में तीन पदोन्नति न प्राप्त कर सकने वाले कार्मिकों का संवर्गवार आंकडा वित्त विभाग की ओर से सम्बन्धित विभागों से वर्ष 2023 से पत्राचार किया जा रहा है। इसे लेकर संज्ञान में आया है कि कतिपय विभागों की ओर से तीन वर्ष की समयसीमा पूर्ण होने के उपरान्त भी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी है। ऐसे विभागाध्यक्षों को चिह्नित करके लापरवाही करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही इस प्रकरण पर शीघ्रातिशीघ्र निर्णय किया जाए। ताकि पात्र कर्मियों को पदोन्नत वेतनमान दिया जा सके।
2- गोल्डन कार्ड के अन्तर्गत ओपीडी में जन औषधि केन्द्रों से कैशलैस दवा एवं सुपरस्पेस्लिसट पंजीकृत चिकित्सालयों में कैशलैस जांच की सुविधा अनुमन्य की जाय।
3- वेतन समिति के सम्मुख विभिन्न संवगों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए मजबूत पैरवी की गई थी। दिनांक 12. 8. 2022 की वार्ता को लेकर वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। भारत सरकार की ओर से आठवें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया जा चुका है। उक्त के दृष्टिगत सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए गठित वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
4- पदोन्नति में शीथिलीकरण की अवधि से प्रोवेशन की शर्त को हटाया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
5- वाहन भत्ता प्रतिमाह 1200 रूपये में बढ़ोत्तरी की मांग परिषद की ओर से की गई थी। इसके आधार पर वाहन भत्ते की दरों में वृद्धि की गई। इस वृद्धि का लाभ 2013 के शासनादेश से वाहन भत्ता प्राप्त कर रहे कार्मिकों को नहीं प्राप्त हो रहा है। परिषद की मांग है कि अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में आहूत बैठक में बनी सहमति के अनुसार वंचित कार्मिकों को भी वाहन भत्ते की बढ़ी दरों का लाभ अनुमन्य किया जाए। इसके साथ ही यात्रा भत्ता की दरों में संशोधन के प्रस्ताव को मंत्रीमंडल की आगामी बैठक में स्वीकृत कराया जाए।
6- विभिन्न विभागों के पुर्नगठन एवं सेवा नियमावलीयों में संशोधन के सम्बध में विभाग, शासन एंव वेतन समिति के स्तर पर कार्यवाही लम्बित है। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर सम्बन्धित विभागीय संगठनों को विश्वास में लेकर पूर्ण किया जाए।
7- परिषद के संज्ञान में यह भी आया है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा गोल्डन कार्ड धारकों से कैशलेस चिकित्सा के लिए मात्र कटौती की धनराशि से ही भुगतान किया जा रहा है। वहीं, समस्त राज्यकर्मी एवं पेशनर पूर्व की भांति चिकित्सा प्रतिपूर्ति के हकदार हैं। इसलिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं चिकित्सालयों के भुगतान के लिए कम पड़ रही धनराशि को सरकार वहन करे।
8- एनपीएस के स्थान पर अन्य राज्यो यथा पंजाब एवं राजस्थान की भांति पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
9- आठवें वेतन आयोग के सम्बध में भारत सरकार की ओर से अपने अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से राज्यों से सुझाव आमन्त्रित किये गये हैं। इसे लेकर मांग है कि परिषद को आमन्त्रित कर उसके सुझावों को सम्मलित करते हुए भारत सरकार को राज्य सरकार प्रेषित करें।
10- वर्कचार्ज कर्मियों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार अनुमन्य की गई पेंशन एवं ग्रेच्युटी के भुगतान को लेकर आ रही समस्या का शासन व सरकार के स्तर से कार्यवाही कर समस्या का समाधान किया जाए।
11- सेवानिवृत्त कार्मिकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए बिल आहरण वितरण अधिकारी अथवा संबंधित कोषागार के माध्यम से प्रस्तुत करने की व्यवस्था चिकित्सा विभाग की ओर से जारी शासनादेश में की गई है। वित्त विभाग से शासनादेश जारी न होने के कारण कतिपय कोषागार इस संबंध में आनाकानी कर रहे हैं। अतः इसके लिए वित्त विभाग से भी शासनादेश निर्गत किया जाए।
12- समस्त वर्दीधारियों को पुलिस कर्मियो की भांति सुविधाए अनुमन्य करने की मांग पर शासन स्तर पर कार्यवाही लंबित है। ये मांग पूर्ण कराई जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
13- दिनांक 30 जून एवं 31 दिसम्बर को सेवा निवृत्त होने वाले कार्मिकों को वेतनवृद्धि के लाभ के शासनादेश में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार संशोधन किया जाए।
14- हरियाणा, राजस्थान एवं पंजाब राज्यों की ओर से राशिकरण की कटौती के समय में की गई कमी के दृष्टिगत उत्तराखंड के सेवानिवृत्त एवं सेवारत कार्मिकों के राशिकरण की कटौती पर भी समय में कमी की जाए।
15- राज्य कर्मियों को भी केन्द्र की भांति मकान किराया भत्ता अनुमन्य किया जाए।
16- विभिन्न विभागों में पदोन्नति सेवानियमावली एवं पुर्नगठन के लिए मुख्य सचिव के स्तर पर बैठक आयोजित की जाए।
17- समस्त निगम, निकाय, विश्वविद्यालय, राजकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, अशासकीय विद्यालय सहित अन्य समान प्रकृति के कार्मिकों को राज्य कर्मियों की भांति समस्त सुविधाए अनुमन्य करने का निर्णय शासन स्तर पर किया जाए।
18- आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों की सेवा बरकरार रखने के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाए।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



