पूर्व सीएम हरीश रावत ने भाजपा पर भरी हुंकार, बोले-हिम्मत है तो ललकारो

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने भाजपा के हमले पर एक बार फिर पलटवार किया। भाजपा के प्रवक्ता ने उन्हें वर्ष 2017 का फ्लॉप हीरो करार दिया था। इसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया में लंबी चौड़ी पोस्ट डाली। इसमें उन्होंने अपनी बात करने के साथ ही कहा कि वे अपने कार्यकाल के ढेरों आंकड़े सामने रखने को तैयार हैं। यदि हिम्मत है तो ललकार के दिखाओ।
हरीश रावत ने नौ जनवरी की रात सोने से पहले दो पोस्ट डाली। इसमें एक भाजपा को ललकारने वाली पोल्ट थी, तो दूसरी आउटसोर्सिंग कर्मियों की समस्या को लेकर। फिलहाल इन दिनों वे प्रदेश में सरकारी नौकरी के सवाल पर हर दिन पोस्ट डाल रहे हैं। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में लिखा कि-
भाजपा, मुझे 2017 का फ्लॉप हीरो बता रही है। थैंक्यू दोस्तों, सत्य कितना ही कड़वा हो, मगर है तो सत्य ही। मगर याद रहे हीरो और फ्लॉप हीरो बनाने वाली जनता जनार्दन ही है। मेरे हाथ में कर्म था। यदि आपको प्रिय लगने वाले शब्द में कहूँ तो इस फ्लॉप हीरो ने उत्तराखंड के विकास को फ्लॉप नहीं होने दिया। मैं कुछ बोलने वाले तथ्य भाजपा के दोस्तों को बताना चाहता हूँ।
हरीश रावत ने लिखा कि- मेरे नेतृत्व में आपदा पुनर्वास और पुनार्निमाण में जो कार्य हुआ, उसे श्री केदारनाथ धाम में उदाहरण स्वरूप देखा जा सकता है। मोदी जी, घंटों ध्यान लगाने के बाद भी मेरी सरकार की इस उपलब्धि को हिंदू मानस से मिटा नहीं पा रहे हैं। यहाँ तक की चारधाम यात्रा सुधार मार्ग भी मेरे कार्यकाल में स्वीकृत हुआ और प्रधानमंत्री जी ने मेरी अध्यक्षता में प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया।
हरीश रावत के मुताबिक-दैवीय आपदा से पूरी तरीके से क्षतिग्रस्त हुये क्षेत्र में ऐतिहासिक नंदाराज यात्रा, भविष्य के लिये एक रिकार्ड स्थापित करके गई है। 50 हजार से ऊपर की यात्रा में किसी के पांव में खरोच भी नहीं आयी। अर्धकुंभ में बिना केंद्र सरकार की मदद के मैंने जो स्थाई निर्माण कार्य करवाये। उसकी तुलना में आपकी सरकार शून्य पर खड़ी है।
हरीश रावत ने कहा कि- मैंने खेल-कूद, मोटर मार्गों, विघुत गृहों और संप्रेक्षण योजनाओं का जाल बिछाया। आपकी सरकार उनकी रख-रखाव व मरमम्त नहीं कर पा रही है। आपदाग्रस्त उत्तराखंड में जितने MSME उघोग मेरे कार्यकाल में खड़े हुये, भाजपा उसकी तुलना में कहीं भी खड़ी नहीं है। मेरे द्वारा स्वीकृत और संचालित डिग्री कॉलेजेज, इंजीनियरिंग कॉलेजेज, मेडिकल कॉलेजेज, नर्सिंग कॉलेजेज, स्पोर्टस कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेजेज, आईटीआई कॉलेजेज का संचालन करना तो छोड़िये, आप उन्हें बंद कर रहे हैं।
उन्होंने लिखा कि- मेरे समय में स्वीकृत और निर्माणाधीन 18 लिफ्ट पेयजल योजनाओं, शिल्प संस्थान, सहासिक खेल संस्थान, भाषा-बोली संस्थान के कार्य को आप आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। कहानी लंबी है, एक कहावत है, “निम्खण रजै की कथे कथ” दोस्तों फ्लॉप हीरो और भी ढेरों आंकड़े देने को तैयार है।
और अंत में लिखा- हिम्मत है, तो ललकारो।
कहां जाएं आउसोर्सिंग कर्मचारी
हरीश रावत ने उत्तराखंड पंचायती राज के आउसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्या पर भी ध्यान आकर्षित किया। लिखाकि-उत्तराखंड पंचायती राज आउटसोर्सिंग कर्मचारी आखिर जाएं तो कहां जाएं? केंद्र पोषित कार्यक्रम था। मैं, सरकार के तर्क को जानते हुये भी यह कहना चाहूंगा कि उत्तराखंड में एक बार आपने किसी को कहीं कार्यरत कर दिया, तो उसको निकालना महापाप है। क्योंकि यहां ये नौकरी ओरिएंटल स्टेट है, कहां जाएंगे ये नौजवान! तो इसलिये सरकार को चाहिये कि मनरेगा और राज्य वित्त में जो इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के लिए पैसा है, कुछ पैसे को बचाकर के उस पैसे के आधार पर इनको काम पर लगाएं। ताकी वित्तीय कठिनाई का जो बहाना है सरकार का, उसका समाधान यही है।




