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February 7, 2026

देहरादून के 150 नागरिकों ने एलिवेटेड रोड के विरोध में सीएम, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे पत्र

देहरादून में प्रस्तावित रिस्पना बिंदाल एलिवेटेड ​कॉरिडोर के विरोध में देहरादून और मसूरी के करीब 150 नागरिकों ने अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायकों के साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजे। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पत्र भेजा गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

गौरतलब है कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर एलिवेटेड रोज बनाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट ने भी पारित किया है। वहीं, कई विपक्षी दलों के साथ ही सामाजिक संगठनों की ओर से इन सड़कों का विरोध हो रहा है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में पेड़ों के कटाने से देहरादून का पर्यावरण बिगड़ेगा। साथ ही नदी किनारे की बस्तियों के कई घरों में बुलडोजर चलेगा। मांग ये भी की जा रही है कि प्रभावितों को समुचित मुआवजा दिया जाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। कई माह से इस परियोजना को लेकर प्रदर्शन भी हो रहे हैं। वहीं, ये मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा हुआ है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दिसंबर 2025 में देहरादून और मसूरी के लगभग 150 नागरिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को इस परियोजना के विरोध में पत्र भेजा था। अब आंदोलन को औपचारिक रूप से राज्य और जिला स्तर पर भी आगे बढ़ाया गया है। देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम से जुड़े जगमोहन मेंदीरत्ता ने बताया कि लगभग 150 नागरिकों के हस्ताक्षर युक्त उसी मूल पत्र की प्रतियां सीएम पुष्कर सिंह धामी, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई हैं। इसका उद्देश्य इस परियोजना से जुड़े गंभीर पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक, सामाजिक और यातायात संबंधी मुद्दों पर राज्य स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यह पत्र उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड के सचिव पंकज पांडेय तथा देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल को भी भेजा गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसके अलावा यह नागरिक अपील निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी भेजी गई है। इनमें कैबिनेट मंत्री एवं मसूरी विधायक गणेश जोशी, देहरादून कैंट विधायक सविता कपूर, रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, राजपुर रोड विधायक खजान दास, धर्मपुर विधायक विनोद चमोली तथा देहरादून नगर निगम के मेयर सौरभ थपलियाल शामिल हैं। इस प्रकार नागरिकों की सामूहिक आपत्तियां और सुझाव कुल 11 जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष औपचारिक रूप से रखे गए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया ज्ञापन नहीं है, बल्कि वही नागरिक पत्र है जो पहले केंद्रीय मंत्री को भेजा गया था और अब इसे राज्य स्तर पर भी प्रस्तुत किया जा रहा है। ताकि निर्णय-प्रक्रिया केवल केंद्र तक सीमित न रहे। बीते कई महीनों से देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम के सदस्य सार्वजनिक संवाद, विशेषज्ञ चर्चाओं में भाग लेते रहे हैं और इस परियोजना से जुड़े वैकल्पिक यातायात व परिवहन समाधान भी प्रस्तुत करते रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नागरिकों का कहना है कि​ रिस्पना और बिंदाल जैसी मौसमी नदियों के ऊपर 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना भूकंपीय रूप से संवेदनशील देहरादून शहर के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। उन्होंने बाढ़ के खतरे, भूमि धंसाव, भूजल पुनर्भरण में कमी, शहरी तापमान में वृद्धि और वायु गुणवत्ता में गिरावट को लेकर भी चिंता जताई है। नागरिकों ने यह भी इंगित किया है कि यह परियोजना यातायात की समस्या को कम करने के बजाय उसे नए क्षेत्रों में स्थानांतरित कर सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि देहरादून को एलिवेटेड रोड की नहीं, बल्कि एक सशक्त सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता है। नागरिकों ने इलेक्ट्रिक बसों, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के अनुकूल अवसंरचना तथा नदियों के किनारे ब्लू–ग्रीन कॉरिडोर के विकास की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया है कि ये सभी विकल्प देहरादून कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान–2024 के अनुरूप हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम के अनुसार, 150 नागरिकों द्वारा किया गया यह सामूहिक प्रयास एक लोकतांत्रिक, तथ्यों पर आधारित और जिम्मेदार नागरिक पहल है, जिसका उद्देश्य शहर के दीर्घकालिक हितों में पारदर्शी और सुरक्षित निर्णय-निर्माण सुनिश्चित करना है।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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