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February 22, 2024

जब मछलियां करती हैं सैक्स, तेज आवाजों से लोगों की उड़ रही नींद, जानिए दिलचस्प बातें

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इस धरती पर जीव जंतु सहित लाखों प्राणी है। इन सबकी विचित्र कहानियां सामने आती हैं। ये कहानियां इनकी आदतों को लेकर होती हैं। लोग अपने घरों में एक्वेरियम में मछलियां रखते हैं। इसे लेकर ही एक अनोखी बात सामने आई है। कारण ये है कि जब मछलियां संभोग करती हैं तो उसकी आवाज से एक्वेरियम में मछलियों को पाल रहे व्यक्ति और उसके परिवार की नींद उड़ जाती है। फ्लोरिडा के टंपा बे इलाके में रहने वाले लोग इन दिनों कुछ ऐसे ही हालात से गुजर रहे हैं। रातों को आने वाली अजीब सी आवाज उनकी नींद में खलल डाल देती है। न सिर्फ बड़े लोग, बल्कि बच्चे भी इन आवाजों को सुन कर नहीं सो पाते। कारण तलाशा गया तो मछलियां निकली। इन आवाजों से जुड़ा वैज्ञानिकों का खुलासा और भी ज्यादा चौंकाने वाला हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

साइंटिस्ट ने किया खुलासा
न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के मुताबिक, अजीबोगरीब आवाजों को सुनकर आसपास के लोगों ने अलग-अलग थ्योरियां बनानी शुरू कर दी थीं। इन आवाजों की वजह जानने के लिए लोगों ने इसे सीक्रेट मिलिट्री ऑपरेशन से लेकर नाइट क्लब का काम तक मान लिया था। कुछ लोग तो ये तक मानने लगे थे कि एलियन्स आकर उनके क्षेत्र में ऐसी आवाजें कर रहे हैं। इस बीच एक साइंटिस्ट ने ये दावा किया कि ये आवाजें एक खास किस्म की मछलियों की वजह से आ रही हैं। साइंटिस्ट ने ये भी दावा किया कि ये अजीब सी आवाजें मछलियों के मेटिंग करने के समय यानी कि शारीरिक संबंध बनाने के समय आती हैं। इन मछलियों का नाम वैज्ञानिक ने ब्लैक ड्रम फिश (Black Drum Fish) बताया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

किया गया ये दावा
इस मामले के एक्सपर्ट James Locascio ने उस एरिया में कुछ माइक्रोफोन्स भी लगाए। ये साइंटिस्ट सरसोटा की मरीन लैबोरेट्री एंड एक्वेरियम में काम करते हैं। वैज्ञानिक अपने दावे को लेकर कॉन्फिडेंट इसलिए भी थे, क्योंकि वो कम से कम दो दशक पहले केप कोरल में ऐसी ही रिसर्च कर चुके थे। न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में उन्होंने कहा कि ब्लैक ड्रम फिश विंटर मेटिंग के समय 165 वॉटर डेसीबल तक का साउंड प्रोड्यूस कर सकती हैं, जो जमीन पर भी साफ सुनाई देता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सामने आई विचित्र घटना, लोग कर रहे शिकायत
फ्लोरिडा से एक विचित्र घटना सामने आई। टाम्पा खाड़ी निवासियों ने रहस्यमयी रोलिंग बेस टोन के बारे में शिकायत कर रहे हैं। रात में उनकी दीवारें कंपन करती हैं। साथ ही उनके बच्चे सो नहीं पाते हैं। इन रहस्यमय आवाज़ों ने सभी को परेशान कर रखा है। पास इलाके के सैन्य अड्डे पर रात भर की गुप्त कार्रवाई से लेकर नाइट क्लब तक सभी इस बात पर गहराई से विचार कर रहे हैं कि इस शोर का कारण क्या हो सकता है। कई लोगों ने आने वाले विदेशी स्क्वाड्रनों के सिद्धांत पर भी विश्वास किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पता चला कि संभोग के समय ये मछली करती हैं शोर
हालांकि, क्षेत्र के एक वैज्ञानिक का मानना है कि डरावनी मछलियाँ इस भ्रमित करने वाले शोर का कारण बन रही हैं। जानकारी के अनुसार वैज्ञानिक ने बताया किया कि यह अप्रिय आवाज संभोग (Sex) का शोर है। यह शोर ब्लैक ड्रम नामक मछली संभोग के दौरान निकालती है। मछली ध्वनिक विशेषज्ञ जेम्स लोकासियो सारासोटा में समुद्री प्रयोगशाला और एक्वेरियम में काम करते हैं। अपने सिद्धांत की पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक ने क्षेत्र में समुद्री माइक्रोफोन स्थापित किए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मछली वैज्ञानिकों का तर्क
मछली वैज्ञानिक जेम्स लोकासियो ने कहा कि एक सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षक ने मेरे शोध के लिए मुझे तीन महीने तक अपने पिछले बरामदे का उपयोग करने दिया। यह बहुत उपयोगी था। मछली ध्वनिक विशेषज्ञ ने कहा कि उनके शीतकालीन संभोग के मौसम के दौरान काले ड्रम द्वारा उत्सर्जित यह शोर 165 पानी डेसिबल तक पहुंच सकता है। जब वे एक समूह में शोर उत्सर्जित करती हैं, तो ध्वनियाँ जमीन के माध्यम से संचालित होती हैं और जमीन व दीवार पर सुनाई देने लगती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वैज्ञानिक लोकासियो ने बताया कि यह एक शहरी रहस्य जैसा बन गया है। इस शोर को लेकर बहुत सारे अलग-अलग सिद्धांत मिल रहे हैं। लोग बस यह जानना चाहते हैं कि यह किस चीज का शोर है। सोशल मीडिया के युग में यह खबर बहुत जल्दी फैल गई। लोगों ने अलग-अलग विचार सुनना शुरू कर दिए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कब सोती हैं मछली
जानवरों को देख कर बता पाना आसान है कि वे सोते हैं कि नहीं। उनके शरीर के अंगों की निष्क्रियता भी काफी कुछ बता देती है। सवाल ये है कि क्या मछलियां भी सोती हैं। यह कैसे पता चलता है कि वे सोती हैं। या क्या वे केवल आराम करती हैं। उनकी शारीरिक भाषा पढ़ना मुश्किल होता है और उनके चेहरे से भी अधिक कुछ जानकारी नहीं मिल पाती है। उनकी पलकें भी नहीं होती हैं जिन से पता चल सके कि वे जाग रही हैं या सो रही हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सोने जैसी स्थिति
गौर किया जाए तो बहुत सारी मछलियां एक निष्क्रिय अवस्था में जरूर पहुंच जाती हैं, जिससे लगता है कि शायद वे सो रही हैं। यह अवस्था एक लंबे समय तक की अवधि के लिए होती है। या फिर कई छोटे छोटे दौर होते हैं। ऐसा लगता है कि यह रात के समय अधिक होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

करती हैं अलग सा बर्ताव
मछलियां अपने आराम के समय में पानी के नीचे के हिस्से में चली जाती हैं या वे बिना किसी गतिविधि के तैरती रहती हैं। डैमसेल मछली मूंगे की चट्टानों की शाखाओं में शरण लेती पाई जाती हैं, जबकि वेल्स कैटफिश नाम की मछली आसपास के पौधों के पास पहुंच जाती हैं। वहीं पैरटफिश मछली रात को नीचे जाती है और अपने आसपास एक म्यूकस चैम्बर बना लेती हैं, जो उन्हें परजीवियों से बचाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नींद के अलावा अन्य कारण
ये सारे तथ्य यह नतीजा निकालने के लिए काफी नहीं है कि मछलियां वास्तव में सोती हैं। हो सकता है कि वे अंधेरे में भोजन या अंतरक्रिया नहीं कर पाती होंगी। या केवल अपनी ऊर्जा बचाने के लिए ही ऐसा करती होंगी। वे सरीसृप, पक्षी और स्तनपायी जानवरों की तरह वे आसपास के वातावरण से प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। या बहुत ही कम करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नींद के भी संकेत
इस तरह के भी प्रमाण मिलते हैं कि मछलियों के लिए नींद भी एक आवश्यकता है। देखा गया है कि सिकलिड मछली के आराम के समय में बाधा पड़ने का असर उसके अगले दिन की सक्रियता पर पड़ता है। जेबरा मछली नींद में बाधा पड़ने पर आराम करने के अगले मौके को तलाशने लगती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एक ये भी है सच्चाई
इसके अलावा एक सच यह भी है कि मछलियों के सोने या नींद की प्रक्रिया संबंधी जैविक कार्य की वैज्ञानिकों को पूरी तरह से जानकारी नहीं है। इस पहलू को अच्छे से अभी तक समझा नहीं गया है। ऐसा लगता है कि नींद जागने के समय के दौरान होने वाले अनुभवों की यादों को मजबूत करने का काम करती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नजर आती हैं ऐसी गतिविधियां
कई मछलियां जैसे ट्यूना और माकेरेल नींद या आराम की स्थिति में समूह से अलग हो जाती हैं। मैक्वायर यूनिवर्सिटी के क्यूलम ब्राउन दकन्वरसेशन में लिखते हैं कि ट्यूना और कुछ शार्क सांस ले सकें, इसलिए तैरती रहती हैं। हो सकता है कि वे डॉलफिन की तरह अपने आधे दिमाग को ही सुलाती हों, लेकिन एक संभावना यह भी है कि चूंकि उनके दिमाग में संसाधित करने लायक अधिक यादें नहीं होती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एक तथ्य ये भी
इसके बावजूद कुछ मछलियां ऐसी ही होती हैं जो सोती ही नहीं है और यह बहुत ही बड़ा अपवाद है। वहीं इस बात के कम संकेत मिले हं कि मछलियां भी स्तनपायी औरअन्य जानवरों की तरह आरईएम नींद का अनुभव करती हैं। इसमें आंख की मांसपेशियां हिलती हैं, लेकिन साफ है कि मछलियों में नींद की प्रक्रिया का विकास अलग ही तरह से हुआ है।
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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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