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February 22, 2024

अग्निवीर योजना को युवक कांग्रेस ने बताया अन्याय, गिनाई खामिया, चरणवार आंदोलन की दी जानकारी

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उत्तराखंड युवक कांग्रेस ने अग्निवीर योजना को युवाओं के साथ अन्याय वाली योजना बताया। साथ ही इस योजना की खामियों को सिलसिलेवार गिनाया। बताया कि इसके विरोध में युवक कांग्रेस की ओर से जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही चरणवार आंदोलन की भी जानकारी दी। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर ने कहा कि केंद्र सरकार ने अग्निवीर योजना के बहाने 1.5 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है। इन युवाओं को सेना में भर्ती के लिए पहले से चयनित किया गया था, लेकिन सरकार ने आज तक उन्हें ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी जी ने उन युवाओं से मुलाकात की, जो अपनी भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से लाखों युवाओं और हमारी सेना के साथ हुए अन्याय के खिलाफ़ राहुल गांधी ने 31 जनवरी को बिहार की धरती से जय जवान: अन्याय के विरुद्ध न्याय का युद्ध, आंदोलन की शुरुआत की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

भुल्लर ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सेना बलों में भर्ती के लिए 2019 से 2022 के बीच पहले से चयनित लगभग 1.5 लाख युवाओं को ज्वाइनिंग से वंचित कर दिया गया। इनमें एयरफोर्स के 7,000 युवा शामिल थे, जिन्होंने अपनी सारी प्रक्रिया पूरी कर ली थी और केवल ज्वाइनिंग लेटर की प्रतीक्षा में थे। इन भर्तियों को अग्निपथ योजना के तहत रद्द कर दिया गया, जिसमें नर्सिंग असिस्टेंस आर्मी (मेडिकल कोर) के लगभग 2,500 नर्सिंग असिस्टैंट्स भी शामिल थे। जिन्हें भर्ती के बाद ज्वाइनिंग लेटर का इंतजार था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि 2019 से 2021 के बीच आर्मी में की गई लगभग 97 भर्तियां भी रद्द की गईं, जिससे युवाओं से एकत्रित किया गया लगभग 100 करोड़ रुपए का शुल्क भी अनुत्तरित रह गया। देश के करोड़ों युवा, जो देश के लिए मर मिटने और भारतीय सेना में सेवा करने के लिए तैयार हैं, उनका भविष्य अग्निपथ योजना के कारण अंधेरे में पहुंच गया है। भाजपा की राजनीतिक चालबाजियों ने इन युवाओं की मेहनत और आशाओं को नष्ट कर दिया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कम वेतन और सम्मान का अभाव
उन्होंने बताया कि अग्निपथ में चयनित युवाओं को रेगुलर सेना के जवानों से कम वेतन मिलता है। कुल मासिक तनख्वाह केवल 21 हजार रुपए के आस-पास है, जबकि रेगुलर सैनिकों को 45 हजार रुपए होते हैं। इन युवाओं को ‘डियरनैस अलाउंस’ और ‘मिलिट्री सर्विस पे’ की भी सुविधा नहीं मिलती। शहीद होने के बाद भी उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिलता, जिसके परिणामस्वरूप उनके परिवार को वह सहयोग और सहारा राशि नहीं मिलती, जो एक रेगुलर सेना के जवान को मिलती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि उदाहरण के तौर पर एक रेगुलर सेना के जवान को 15 साल तक पूरे पे मिलते हैं और उनकी पेंशन उनकी ताउम्र तक मिलती है, जबकि अग्निपथ में चयनित युवा के परिवार को इसका लाभ तब मिलता है, जब तक पत्नी और माता-पिता जीवित रहते हैं। अग्निपथ में चयनित युवा किसी भी प्रकार के चिकित्सा और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकते हैं, जो रेगुलर सेना के जवानों को मिलता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रेगुलर सेना के जवानों को मिलता है ये लाभ
1.15 साल तक फुल पे मिलती तथा रिटायरमेंट उम्र आने पर यह पे, उसकी फैमिली पेंशन में तब्दील हो जाती, जो कि ताउम्र उसके परिवार को मिलती रहती, जब तक पत्नी व माता-पिता जीवित रहते है।
2.आम सैनिक की शहादत पर दिए जाने वाले 75 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस मिलता है।
3.55 लाख रुपए एक्स-ग्रेशिया अमाउंट जितनी राशि मिलती है।
4.मेडिकल फैसिलिटी मिलती है।
5.CSD फैसिलिटी मिलती है।
6.सभी तरह के मिलिट्री बेनेफिट जो सरकार कभी भी अनाउंस करती, वह मिलता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अग्निपथ योजना की खामिया
-चार साल बाद भी फिर से बेरोजगारी का सामना।
-अग्निपथ में चयनित युवाओं को स्थाई नौकरी की गारंटी नहीं होती, जिसके कारण उन्हें असुरक्षित महसूस करना पड़ता है।
-पहले की नियुक्तियों को खारिज़ किया जाना। अग्निपथ के आने के बाद पूर्व की भर्ती प्रक्रिया से चयनित उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग देने से मना किया जाता है, जिनकी संख्या 1.5 लाख है।
अग्निवीर को ‘रिटायरमेंट’ के बाद यह नहीं मिलेगा
-ग्रेच्युटी, मेडिकल फेसिलिटीज़, पेंशन, कैंटीन फैसिलिटी, पूर्व सैनिक का दर्जा, पूर्व सैनिकों और उनके बच्चों के लिए आरक्षित वैकेंसी, बच्चों को छात्रवृत्ति और कोई भी मिलिट्री बेनिफिट, जो सरकार कभी भी रेगुलर सैनिकों के लिए अनाउंस करेगी, वह सब नहीं मिलेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

करियर के अवसर की कमी
आरटीआई के अनुसार, 2022-23 में आवेदन करने वालों की संख्या 34 लाख थी, जो 2023-24 में 10 लाख के करीब हो गई है। इसका स्पष्ट संकेत है कि युवाओं का सेना की ओर रुझान अब घट रहा है। हाल के दिनों में यूपी कांस्टेबल की भर्ती में 50 लाख से भी अधिक आवेदन किए गए हैं, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। 4 साल के अग्निवीर बनने की जगह, वे दूसरे क्षेत्रों में रोजगार की खोज कर रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

जवान आंदोलन: अन्याय के विरूद्ध, न्याय का युद्ध
प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रभारी शिवि चौहान ने कहा कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान युवाओं से मुलाकात की, जो आज अपनी भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैं। उनकी पीड़ा को सुनी। राहुल गांधी ने इन युवाओं के साथ बातचीत की और वादा किया कि हम सड़क से लेकर संसद तक इस मुद्दे को उठाएंगे। केंद्र सरकार द्वारा लाखों युवाओं और हमारी फ़ोर्सेज़ के ख़िलाफ़ हुआ अन्याय के विरुद्ध, राहुल गांधी गांधी ने 31 जनवरी को बिहार की धरती से “जय जवान” आंदोलन की शुरुआत की है। इस मौके पर उन्होंने आंदोलन के मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

चयनित अभ्यर्थियों की तत्काल सेना में जॉइनिंग
उन्होंने कहा कि हम मांग करते हैं कि 1.5 लाख युवाओं, जिन्हें आर्मी, एयरफोर्स, और नेवी में चयनित किया गया है, उन्हें बिना किसी विलंब के उनकी जॉइनिंग प्रदान की जाए। विशेष रूप से, जिन 7,000 युवाओं को एयरफोर्स में और 2,500 नर्सिंग असिस्टेंट को आर्मी में जॉइनिंग नहीं मिली, उन्हें तुरंत सेवा में शामिल किया जाए। इन युवाओं को उचित सम्मान और आयु सीमा में उचित छूट भी प्रदान की जानी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अग्निवीर योजना की तत्काल समाप्ति
उन्होंने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं कि अग्निपथ योजना को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। इस योजना ने युवाओं के बीच अनिश्चितता और निराशा का माहौल पैदा किया है। हमारी मांग है कि सरकार द्वारा पहले लागू की गई पुरानी और स्थायी भर्ती प्रक्रिया को पुनः लागू किया जाए, जिससे युवाओं को निश्चिंतता और सुरक्षित भविष्य प्राप्त हो सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि यह संघर्ष मात्र 1.5 लाख से अधिक चयनित युवाओं का नहीं है, जिन्हें सरकार ने न्याय से वंचित किया है, बल्कि यह हर वो युवा के लिए है जो सेना में सेवा करने का सपना देखता है। यह उन सभी युवाओं के लिए न्याय की लड़ाई है। हम सभी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य, इस अन्याय के खिलाफ़ खड़े हैं और युवाओं के सपनों और भारत की सैन्य विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस अन्याय के खिलाफ न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे। इस अभियान को तीन चरणों में व्यापक रूप से आयोजित किया जा रहा है, जो 31 जनवरी से शुरू हो चुका है और 20 मार्च तक चलेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पहला चरण: संपर्क
इसका लक्ष्य 30 लाख परिवारों तक यात्रा पहुँचाना है। इसकी समय सीमा 1 फरवरी से 28 फरवरी तक है। इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा “न्याय पत्र” (एक फॉर्म और लीफलेट के साथ) को रक्षा परिवारों (वर्तमान/पूर्व) और सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं से संपर्क करके उन्हें इस आंदोलन से जुड़ने और समर्थन देने के लिए मांग करना है। “न्याय पत्र” को परिवारों द्वारा उनके हस्ताक्षर के साथ भरा जाएगा, और यह जानकारी डिजिटल रूप में रिकॉर्ड की जाएगी, साथ ही घर के दरवाजे पर न्याय पत्र का स्टिकर लगाया जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दूसरा चरण: सत्याग्रह
इसका लक्ष्य अधिक से अधिक युवाओं और उनके परिवारों तक पहुँचना है। जानकारी इकट्ठा करना और चल रहे अभियान से अवगत कराते हुए उन्हें जोड़ना है। इसकी समयसीमा 5 मार्च से 10 मार्च तक है। इसके तहत सभी ब्लॉकों/शहरों में धरना आयोजित करना और Coordination Committee का गठन करना है। यह धरना शहीद चौक या गांधी चौक पर आयोजित किया जाएगा।सामान्यत हर शहर के पास अपना शहीद चौक या गांधी चौक होता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

तीसरा चरण: पदयात्रा
इसके तहत पैदल यात्रा (न्याय यात्रा) कर सभी जिलों में 50 किलोमीटर तक करने का लक्ष्य है। इसकी समयसीमा 17 मार्च से 20 मार्च तक है। प्रत्येक जिले में जवानों के लिए “न्याय यात्रा” का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 50 किलोमीटर की पदयात्रा की जाएगी। इस यात्रा को Coordinators Committee और न्याय योद्धाओं के नेतृत्व में किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम के लिए गढ़वाल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी नवीन रमोला को दी गई है व कुमाऊं की जिम्मेदारी भुवन चौबे को दी गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये रहे उपस्थित
प्रेस वार्ता में युवक कांग्रेस के मीडिया प्रभारी शिवा वर्मा, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव गोपाल गाड़िया, उपाध्यक्ष मोहन भण्डारी, प्रदेश सचिव प्रियांश छाबरा, प्रदेश सचिव देवेश उनियाल, प्रदेश प्रवक्ता अमनदीप सिंह बत्रा, प्रदेश सचिव मानवेन्द्र, जिला अध्यक्ष सिद्धार्थ वर्मा, जिला उपाध्यक्ष मोहित मेहता, जिला सचिव सुधांशु पुण्डीर, विधान सभा अध्यक्ष धर्मपुर मोहम्मद वसीम, उपाध्यक्ष गौरव रावत, विधानसभा अध्यक्ष राजपुर सागर सेमवाल, विधानसभा अध्यक्ष रायपुर, शुभम चौहान, विधानसभा अध्यक्ष कैंट कार्तिक बिरला, विधानसभा अध्यक्ष थराली मनोज राम कोठियाल, रोहित कर्णवाल आदि उपस्तिथ थे।
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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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