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December 6, 2023

छठ पूजन पर्व को लेकर उत्तराखंड में भी उत्साह, दून में बनाई गई कृत्रिम झील

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इस बार नहाय-खाय से छठ पर्व 17 नवंबर से शुरू हो चुका है। आज शाम खरना के साथ ही छठ व्रत की शुरुआत होगी, जो लगभग 36 घंटे बाद उषा अर्घ्य यानी सूर्य उदय के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पारण होगा। यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान की रक्षा और घर – परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह व्रत बहुत्य ही दुर्लभ और कठिन होता है। व्रत रखने वाली महिलाएं 36 घंटे निर्जला व्रत रहती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

छठ पर्व चार दिनों तक चलने वाला आस्था का प्रतीक होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से नहाय-खाए के साथ ही शुरू हो जाता है। साथ ही पंचमी तिथि वाले दिन खरना होता है और षष्ठी तिथि पर डूबते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही सप्तमी तिथि को उगते सूर्य देव को जल देने से छठ व्रत संपूर्ण हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठ पर्व पर सूर्य भगवान और छठी माता की पूजा की जाती है। उत्तराखंड में भी बिहार के लोगों में इस त्योहार को लेकर उत्साह होता है। राजधानी देहरादून में तो कई जगह सामूहिक आयोजन होते हैं। वहीं, ऋषिकेश के त्रिवेंणी घाट में भी छठ पूजा की जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बनाई गई कृत्रिम झील
महापर्व छठ पूजा के आगमन पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पूर्व विधायक राजकुमार, पार्षद निखिल कुमार व क्षेत्रवासियों के सहयोग से नई बस्ती तेगबहादुर रोड, डालनवाला में हर साल कृत्रिम झील बनाई जाती है। इस बार भी छठ पूजा स्थल पर कृत्रिम झील को तैयार कर लिया गया है। साथ ही क्षेत्र में साफ सफाई करवाई गई। पूर्व विधायक राजकुमार ने कृत्रिम झील का निरीक्षण किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस अवसर पर पूर्व विधायक राजकुमार ने हर्ष जताते हुए कहा कि बहुत कम समय में छठ पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हजारों लोग इस स्थल पर आकर पूजा करते हैं। यह बिहार के सबसे कठिन व्रतों में से एक है। मान्यता है कि छठ मइया का व्रत रखने वाले व विधि-विधान से पूजा करने वालों के परिवार को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस अवसर पर अशोक शर्मा, राकेश पवार, रामनाथ, सुशील मिश्रा, राम, दिनेश, अशोक कुमार, प्रदीप, नीरज, रमेश,सुरेश परछा आदि भी उपस्थित थे।
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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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