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June 6, 2023

धामी सरकार का एक साल, कांग्रेस नेता लालचंद ने पूछा सवाल-पहली घोषणा का क्या हुआ, गिनाई नाकामियां

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उत्तराखंड में धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आज दिनांक 23 मार्च को एक साल पूरा हो रहा है। सरकार के एक साल से कार्यकाल को लेकर उत्तराखंड में देहरादून महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दिनांक 23 मार्च, 2023 को राज्य के जनपद मुख्यालयों में ‘एक साल नई मिसाल’ कार्यक्रम के अन्तर्गत ‘जन सेवा’ थीम पर बहुद्देशीय शिविरों एवं चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर सरकार खुद ही अपनी पीठ थपथपाने जैसा काम कर रही है। साथ ही बीजेपी संगठन भी अब झूठ के प्रचार तंत्र के जरिये सरकार की उपलब्धियां गिना रहा है। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ सीएम धामी से एक ही सवाल पूछूंगा। वो सवाल भी उनके पहले कार्यकाल के दौरान शपथ लेते ही मीडिया के सामने किए गए दावों को लेकर है। यदि सीएम अपने उस दावे के अनुरूप किए गए कार्यों को गिना देंगे तो वह अपनी पीठ थपथपाने के लायक हैं। नहीं तो जनता समझ जाएगी कि सिर्फ जुमलेबाजी के इस सरकार ने कुछ नहीं किया और ना ही इससे पिछली बीजेपी सरकार ने ही कुछ किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

याद दिलाई सीएम को शपथ
लालचंद शर्मा ने उत्तराखंड सीएम को पहले कार्यकाल की शपथ की याद दिलाई। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2021 में जुलाई माह में तत्कालीन सीएम तीरथ सिंह रावत ने इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही पुष्कर सिंह धामी की सीएम के पद पर ताजपोशी की गई थी। सीएम की शपथ लेते ही सीएम धामी ने कहा था कि वह जो भी घोषणा करेंगे, उसे छह माह के भीतर पूरा करके दिखाएंगे। यदि वह शिलान्यास करेंगे तो अपने उसी कार्यकाल में उसे पूरा करेंगे। शपथ लेते ही सीएम ने सबसे पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगले छह माह के भीतर प्रदेश में विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े 22 हजार पदों पर नियुक्तियां कर दी जाएंगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

लालचंद शर्मा ने कहा कि पहली बार सीएम के रूप में धामीजी का कार्यकाल करीब आठ माह का रहा। दूसरी बार के उनके कार्यकाल का 23 मार्च 2023 को एक साल का पूरा हो रहा है। इन 18 माह में 22 हजार नियुक्तियों का क्या हुआ। इसका जवाब सीएम को देना चाहिए। यदि छह माह में वह अपनी घोषणा पूरी करते तो अब तक 66 हजार से ज्यादा लोगों को नियुक्ति मिल जाती। क्योंकि सरकारी विभागों में अभी भी लगभग 80 हजार के करीब पद रिक्त हैं। साफ है कि सीएम की पहली घोषणा कोरी जुमलेबाजी साबित हुई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

घाटे का बजट और बढ़चढ़कर दावे
लालचंद शर्मा ने कहा कि अब सरकार 2023-24 के लिए घाटे का बजट लेकर आई। सरकार ने पिछले साल की तुलना में 18 फीसद की वृद्धि के साथ 77407 करोड़ का बजट पेश किया। इसके लिए 24744.31 करोड़ रुपए सरकार अपने संसाधनों से जुटाएगी। उन्होंने सीएम से सवाल किया कि बाकी 52663 करोड रुपए सरकार कहां से जुटाएगी। क्या सरकार अपने बाकी कामों को पूरा करने के लिए बाजार से कर्ज लेगी। या फिर महंगाई का बोझ जनता पर डालेगी। इसका जवाब भी सीएम को देना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

महंगाई से आमजन त्रस्त
पूर्व महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि राजधानी देहरादून में पानी की आपूर्ति राजधानी देहरादून में ही लचर है। अब प्रदेश सरकार एक अप्रैल से उत्तराखंड में पीने का पानी भी नौ से 15 फीसदी तक महंगा करने जा रही है। इसी तरह एक अप्रैल से बिजली दरों में 12 फीसदी तक बढ़ोतरी करने की सूचना मिल रही है। पिछले साल भी तीन बार बिजली की दरें बढ़ाई गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इसी तरह जमीन के सर्किल रेट में 33.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी पहले ही की जा चुकी है। ऐसे में आमजन के लिए जमीन खरीदना मुश्किल हो गया है। पिछले महीने उत्तराखंड की यूपी से होकर गुजरने वाली बसों का किराया बढ़ा दिया गया था। परिवहन निगम ने 13 ऐसे रूटों पर किराये में पांच रुपये से लेकर 60 रुपये तक की बढ़ोतरी लागू की है। वहीं, केंद्र की ओर से भी महंगाई का डबल इंजन का चाबुक चल रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

रसोई गैस का घरेलू सिलेंडर अब देहरादून में 1122 रुपये का हो चुका है। वर्ष 2014 से पहले सिलेंडर की कीमत 410 रुपये थी। वहीं तब पेट्रोल की कीमत 36.81 रुपये थी, जो अब सौ रुपये के करीब है। यही नहीं, कागज और स्याही पर जीएसटी बढ़ने से बच्चों की शिक्षा का बजट भी बिगड़ चुका है। स्टेशनरी के रेट 20 फीसद तक बढ़ गए हैं। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नवीं कक्षा का बैग अब आठ हजार रुपये में तैयार हो रहा है, जबकि वर्ष 2014 में डेढ़ से दो हजार रुपये इसकी कीमत थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंकिता भंडारी हत्याकांड में बीजेपी नेता गिरफ्तार, लेकिन सीबीआई जांच नहीं
लालचंद शर्मा ने कहा कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित रिसोर्ट से 18 सितंबर की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा पुलकित आर्य है। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था। सीएम को को जवाब देना चाहिए कि इस मामले में सीबीआई की जांच क्यों नहीं कराई गई। साथ ही वीआईपी के नाम का उजागर क्यों नहीं किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बार बार क्यों हो रहे हैं परीक्षा घोटाले
लालचंद शर्मा ने कहा कि बार बार परीक्षा घोटाले क्यों हो रहे हैं। इस पर भी सीएम को जवाब देना चाहिए। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से चार और पांच दिसंबर 2021 को आयोजित स्नातक स्तर की परीक्षा में अनियमितता के संबंध में गड़बड़ी को लेकर एसटीएफ ने सबसे पहले छह युवकों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में अब तक कुल 44 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें बीजेपी नेता हाकम सिंह का नाम सामने आया। परीक्षा भर्ती मामले में अब तक कुल 94.79 लाख कैश बरामद किया है। ऐसे में कई परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि इसके बाद परीक्षाओं का संचालन उत्तराखंड लोकसेवा आयोग को दिया गया। फिर भी नकल और पेपर लीक पर रोक नहीं लगी। आयोग की परीक्षाओं में भी पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इनमें लेखपाल, पटवारी परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया है। वहीं, जेई और एई परीक्षा में पेपर लीक के मामले में भी गिरफ्तारियां हो रही हैं। इनमें एक आरोपी बीजेपी का नेता भी है। वहीं, पिछले साल आयोजित की गई राज्य कनिष्ठ अभियंता सेवा परीक्षा 2021 को भी निरस्त कर दिया गया है। सीएम को जवाब देना चाहिए कि बार बार परीक्षा घोटाले उनके कार्यकाल में क्यों हो रहे हैं। साथ ही ऐसे परीक्षा घोटालों में बीजेपी नेताओं के नाम क्यों सामने आ रहे हैं। यदि नाम सामने आ रहे हैं तो सीबीआई जांच कराने में क्या दिक्कत है। ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बेरोजगारों पर लाठीचार्ज, फिर किस बात की वाहवाही
लालचंद शर्मा ने कहा कि सरकार का हाल तो ये है कि उत्तराखंड में भर्ती परीक्षा घोटालों की जांच सीबीआइ से कराने, जांच के बगैर भर्ती परीक्षा ना करने की मांग को लेकर बेरोजगार संघ ने आठ फरवरी को गांधी पार्क देहरादून में धरना दिया था। सरकार ने उनकी बात तो नहीं मानी, लेकिन इसी रात पुलिस ने कुछ आंदोलनकारियों को जबरन उठाया गया। इससे अगले दिन नौ फरवरी को आंदोलनकारी भड़क गए और देहरादून में गांधी पार्क के समक्ष हजारों युवा एकत्र हो गए, तो सरकार ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। साथ ही बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार सहित कई आंदोलनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इन सभी को 15 फरवरी को जमानत मिल गई। अब ऐसे में सरकार के पास क्या उपलब्धियां हैं, इसका जवाब सीएम धामी को खुद देना चाहिए।

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भानु बंगवाल
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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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