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January 31, 2023

वर्तमान राजनीतिक हालातों पर तंज कसती वरिष्ठ पत्रकार दिनेश कुकरेती की ग़ज़ल-काठ के हिरण यहां नचा रहा है वो

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काठ के हिरण यहां नचा रहा है वो,
कैसे-कैसे सपने दिखा रहा है वो।
केंचुली बदल-बदल के थक नहीं रहा,
गिरगिट को आईना दिखा रहा है वो।
काम की बात वो करता नहीं कभी,
मन की बात बोल के भरमा रहा है वो।
झूठ उसके खून में झूठा है इस कदर
हर सच को झूठ ही ठहरा रहा है वो।
दावा था ओर-छोर से विकास लाएगा,
गीत अब विनाश के सुना रहा है वो।
चाय वाले से वो चौकीदार बन गया,
अब दोस्तों पे देश को लुटा रहा है वो।
कवि का परिचय
दिनेश कुकरेती उत्तराखंड में वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह प्रिंट मीडिया दैनिक जागरण से जुड़े हैं। वर्तमान में देहरादून में निवासरत हैं। साथ ही उत्तरांचल प्रेस क्लब में पदाधिकारी भी हैं।

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