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December 1, 2022

सात अक्टूबर को राजधानी देहरादून में रैली निकालेंगे राज्यकर्मी, ऐतिहासिक बनाने का प्रयास, ये हैं मांगे

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उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति बीस सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत है। आंदोलन के पहले चरण में जिला स्तर पर विभागवार गेट मीटिंग कर जनजागरुकता अभियान चलाया जा चुका है। इस दौरान शासन से भी कर्मचारियों की बैठकें हो चुकी हैं। बैठक में बिंदुवार चर्चा के बाद निर्णय भी लिए गए थे। वहीं, जब शासने ने बैठक का कार्यवृत्त जारी किया गया तो उसमें कई मुद्दों को परीक्षण में डाल दिया। इससे कर्मचारियों में रोष है। समिति में विभिन्न कर्मचारी संगठन जुड़े हैं। अब आंदोलन के दूसरे चरण में सात अक्टूबर को बीस सूत्रीय मांगों के समर्थन में राजधानी देहरादून में रैली निकाली जाएगी। इसे लेकर आज गूगल मीट के जरिये समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें प्रदेश के लगभग समस्त जनपदों के संयोजकों ने भागीदारी निभाई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बैठक का संचालन करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पाण्डे ने समस्त जनपदों के जिला मुख्य संयोजकों से उनके जनपदों की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। साथ ही अधिक से अधिक संख्या में प्रदेशव्यापी रैली में प्रतिभाग कर रैली को ऐतिहासिक बनाने हेतु आह्वान किया गया। प्रदेश के समस्त जनपदों के पदाधिकारियों नेआश्वस्त किया कि राजधानी देहरादून में होने वाली समन्वय समिति की रैली को ऐतिहासिक बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। यह रैली समस्त संघों परिसंघों के कार्मिकों की एकता की मिसाल कायम करेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इन पदाधिकारियों ने रखे विचार
आनलाइन बैठक में जनपद बागेश्वर के मुख्य जिला संयोजक श्री नारायण सिंह, अल्मोड़ा से गोविन्द डोभाल, रमेश कनवाल पिथौरागढ से विजेन्द्र लुंठी, प्रदीप भट्ट, नैनीताल से असलम अली, शशिवर्धन अधिकारी, ऊधमसिंह नगर से रविन्द्र कुमार, उत्तरकाशी से प्रकाश पंवार, गोपाल राणा, पौड़ी गढवाल से सोबन सिंह रावत, चमोली से मोहन जोशी, गोविन्द सिंह रावत, हरिद्वार से अनिल चौधरी, देहरादून से सुभाष देवलियाल, ठाकुर ओमवीर सिंह, आर पी जोशी, शान्तनु शर्मा ने अपने विचार रखे गए एवं ऐतिहासिक रैली की भावी तैयारियों से अवगत कराया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये रहे उपस्थित
समन्वय समिति की आज की बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पाण्डे, महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरिजेश काण्डपाल, डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ से प्रदेश अध्यक्ष एस एस चौहान, महामंत्री मुकेश रतूड़ी, मण्डल अध्यक्ष गढवाल जगमोहन सिंह रावत, मिनिस्टीरियल फैडरेशन से प्रदेश अध्यक्ष पूर्णानन्द नौटियाल, महामंत्री मुकेश बहुगुणा, पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, ड्राइंग संघ के अध्यक्ष निशंक सरोही सहित कई अन्य संघों, परिसंघों के पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

शासन के साथ पूर्व में हुई बैठक में लिए गए थे ये निर्णय
1. मांग की गई कि राज्य कार्मिकों के लिए भारत सरकार की तर्ज पर लिये गये डाउन ग्रेडवेतन के अन्यायपूर्ण निर्णय पर पुर्नविचार करते हुये इसे तत्काल वापस लिया जाए। इस मांग पर शासन की ओर से अवगत कराया गया कि उक्त निर्णय का प्रभाव किसी भी प्रकार से वर्तमान में कार्यरत कार्मिकों पर नहीं पड़ेगा। इस सम्बन्ध में शासन समन्वय समिति के पदाधिकारियों को शासनादेश का प्रारुप दिखाने के उपरांत ही जारी किया जाएगा ।
2.प्रदेश के समस्त राज्य कार्मिकों मिनिस्टीरियल संवर्ग एवं वैयक्तिक सहायक संवर्ग सहित, शिक्षकों, निगम, निकाय, विश्व विद्यालय-महाविद्यालय, पुलिस कार्मिकों को पूर्व की भांति 10, 16 व 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति न होने की दशा में पदोन्नति वेतनमान अनुमन्य करने की मांग पर अपर मुख्य सचिव वित्त ने वित्त विभाग को निर्णय के उपरांत पड़ने वाले व्यय भार की गणना कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
3.राज्य कार्मिकों, निगम, निकाय, परिषद् के लिए निर्धारित गोल्डन कार्ड (SGHS) की व्यवस्था के लिए जारी शासनादेश संख्या-1256 1)/XXVVIII (3) / 21-04/2008. T.C, दिनांक 25.11.2021 को स्वास्थ्य प्राधिकरण से धरातल पर शत-प्रतिशत लागू कराते हुये इसमें उत्पन्न विसंगतियों का शीघ्र निराकरण कराने तथा सुविधा युक्त उच्चकोटी के अन्य समस्त अस्पतालों को भी योजना में सूचीबद्ध करते हुये सेवानिवृत्त कार्मिकों से निर्धारित धनराशि में 50 फीसद कटौती कम करने की मांग पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि मांग के अनुसार शासन स्तर पर कार्य़वाही करते हुए शासनादेश जारी किए जाएं। समन्वय समिति की मांग के आधार पर निगम व निकाय कर्मिर्यों के प्रतिनिधित्व को भी इस सम्बन्ध में गठित समन्वय समिति में शामिल करने के निर्देश दिए गए।
4.पदोन्नति के लिए पात्रता अवधि में पूर्व की भांति शिथिलीकरण की व्यवस्था दिनांक 30.06.2022 तक ही बढ़ायी गयी है, जिसे बिना शर्त के निरन्तर बढ़ाने की मांग पर न्यूनतम सेवा अवधि निर्धारित करते हुए लागू करने पर विचार किया गया।
5.प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग पर अन्य राज्यों के द्वारा पुरानी पेशन बहाली के लिए दी जा रही व्यवस्था का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। ताकि तद्नुसार राज्य सरकार के कार्मिकों के समबन्ध में भी निर्णय लिया जा सके।
6.मिनिस्टीरियल संवर्ग में कनिष्ठ सहायक को लेवल-4 में वेतनमान 25500-81100 अनुमन्य करने तथा प्रधान सहायक लेवल -06 वेतनमान 35400-1, 12,400 के पद को प्रशासनिक अधिकारी लेवल-07 वेतनमान 44900-1,42,400 में आमेलन / उच्चीकृत करते हुए कुल 18+8=26 फीसद पद प्रशानिक अधिकारी के स्वीकृत करने की मांग पर परीक्षणोपरान्त निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया।
7.वैयक्तिक सहायक संवर्ग में पदोन्नति के सोपान बढ़ाते हुये स्टाफिंग पैर्टन के अन्तर्गत ग्रेड वेतन रू0 4800.00 में वरिष्ठ वैयक्तिक अधिकारी का पद सृजित करने की मांग पर परीक्षणोपरान्त निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया।
8.राजकीय वाहन चालकों को ग्रेड वेतन रु० 2400.00 इग्नोर करते हुए स्टाफिंग पैर्टन के अन्तर्गत ग्रेड वेतन रू0 4800.00 तक अनुमन्य करने की मांग पर परीक्षणोपरान्त निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया।
9.चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को भी वाहन चालकों की भांति स्टाफिंग पैर्टन वेतन रु0 4200.00 तक अनुमन्य करने की मांग पर परीक्षणोपरान्त निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया। वर्दी के स्थान पर वर्दी भत्ता अनुमन्य किए जाने पर भी निर्णय का आश्वासन दिया गया।
10.समस्त अभियन्त्रण विभागों में कनिष्ठ अभियन्ता (प्राविधिक ) / संगणक के सेवा प्राविधान एक समानकरते हुए इस विसंगति को दूर किया करने के संबंध में अपर सचिव वित्त को पत्रावली सिंचाई विभाग से वापस मंगाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
11.विभिन्न विभागीय संवर्गों के वेतन विसंगति / वेतन उच्चीकृत एवं स्टाफिंग पैर्टन के प्रकरण जो शासन स्तर पर लम्बित हैं और उनका शीघ्र निस्तारण करने की मांग पर वित्त विभाग को वेतन समिति की आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। जिससे कि वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर विचार किया जा सके।
12.जिन विभागों के ढ़ाचे का पुर्नगठन / एकीकरणका प्रस्ताव शासन स्तर पर लम्बित है, उन विभागों के पूर्व स्वीकृत पदों में कटौती न की जाये, ताकि कार्मिकों के पदोन्नति के अवसर बाधित न हो, इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया।
13.राज्य सरकार द्वारा लागू एसीपी, एमएसीपी के अन्तर्गत जारी शासनादेश संख्या-05/XXVVIII (7)/50/(09)/2018, दिनांक 06.01.2022 द्वारा अतिउत्तम के स्थान पर उत्तम एवं 05 वर्ष की चरित्र पंजिका देखने की व्यवस्था को दिनांक 01.01.2022 से लागू गया है, जिसे पूर्व से लागू किया करने की मांग पर वित्त विभाग को संशोधित शासनादेश निर्गत करने के निर्देश दिए गए।
14.जिन विभागों में विभिन्न सेवा संवर्गों की पदोन्नतियां अभी तक लम्बित है, उन विभागों में शीघ्र
पदोन्नति आदेश जारी कराने की त्वरित कार्यवाही करने की मांग पर कार्मिक विभाग को समस्त विभागों को पुनः निर्देश जारी करने के लिए आदेशित किया गया।
15.31 दिसम्बर तथा 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को 06 माह की अवधि पूर्ण मानते हुये एक वेतन वृद्धि अनुमन्य कर सेवानिवृत्ति का लाभ प्रदान करने की मांग पर भारत सरकार द्वारा किए गए निर्णय के आधार पर कार्य़वाही के निर्देश दिए गए।
16.विभिन्न परिसंघों / संघों द्वारा स्थानान्तरण अधिनियम-2017 में उत्पन्न विसंगतियों के सम्बन्ध में दिये गये बिन्दुवार सुझाव एवं समस्याओं का शीघ्र निराकरण करने की मांग पर विसंगतियों के निराकरण के लिए समन्वय समिति से संशोधन सम्बन्धी प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई। साथ ही शासन स्तर पर हरियाणा राज्य की स्थानान्तरण नीति के आधार पर कार्यवाही गतिमान रहने की भी जानकारी दी गई ।
17.राज्य कार्मिकों की भांति निगम, निकाय, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय कार्मिकों को भी समान रूप से समस्त लाभ प्रदान करने की मांग पर परीक्षणोपरान्त निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया।
18.तदर्थ रूप से नियुक्त कार्मिकों की विनियमितिकरण से पूर्व तदर्थ रूप से नियुक्ति की तिथि से सेवाओं को जोड़ते हुये वेतन, सैलेक्शन ग्रेड, एसीपी, पेंशन आदि समस्त लाभ प्रदान करने की मांग पर केस बाई केस के आधार पर निराकरण करने का आश्वासन दिया गया।
19.समन्वय समिति से सम्बद्ध समस्त परिसंघों के साथ पूर्व में शासन स्तर पर हुई बैठकों में किये गये समझौते, निर्णयों के अनुरूप शीघ्र शासनादेश जारी करने की मांग पर प्रत्येक तीन माह पर कार्मिक संघों/परिसंघों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर लम्बित प्रकरणों के निराकरण का आश्वासन दिया गया।
20.वर्तमान में गठित वेतन विसंगति समिति द्वारा शासन को सौंपी गयी रिर्पोट में कर्मचारी विरोधी निर्णय / सुझावों को अस्वीकार करते हुये इन्हें लागू न करने की मांग पर वित्त विभाग को वेतन समिति की आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए जिससे कि वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर विचार किया जा सके।

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