July 4, 2022

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

शिक्षिका डॉ. पुष्पा खण्डूरी की कविता-बेचैन मन

1 min read
शिक्षिका डॉ. पुष्पा खण्डूरी की कविता-बेचैन मन

बेचैन मन

बेचैन मन सोचता बहुत है
तर्क बितर्क के जंजाल में
वो फंसता सा चला जाता है
निरन्तर जीता है अतीत में
और अपनी दशा का करता
रहता है विचारी कह आकलन
तरस खाता है बस दशा पर
अपनी और रोता है जार जार
सभी पर क्रोध करता है बेकार
भूलना चाहता है बेवश यादों को
अन किए अपने सब वादों को
तोड़ना चाहता है उस कारा को
जो उसके विचारों की मकड़ी ने
बुनी थी उसकी स्मृति के धागों से
पर तब बहुत देर हो चुकी होती है
अतीत से लेकर वर्तमान की खाई
और भी गहरी हो चुकी होती है
जिसको पाटना मुश्किल ही नहीं
अब नामुमकिन सा ही दिखता है
इसी लिए अतीत में नहीं हमें
वर्तमान में ही रहना और जीना है
दिल में भर कर नहीं जीना
दिल खोल कर ही जीना है ।
भविष्य फिर हमारा ही होगा ”
“बीति ताहि बिसार दे
आगे की सुधि लेय”

कवयित्री का परिचय
डॉ. पुष्पा खण्डूरी
एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हिन्दी
डी.ए.वी ( पीजी ) कालेज
देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page