July 4, 2022

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

युवा कवि विनय अन्थवाल की कविता- समय

1 min read
युवा कवि विनय अन्थवाल की कविता- समय।

समय

समय यूँ ही बीत रहा है
दिन यूँ ही गुजर रहा है।
मंजिल का कुछ पता नहीं है
साँसें व्यर्थ जा रही हैं।
उम्र ढ़लती जा रही है
काया जीर्ण हो रही है।
भौतिकता के इस युग में
आत्मा मैली हो रही है।

हम विकारों में जकड़े हुए हैं
परमशक्ति का ज्ञान नहीं है
आडम्बर ओढ़े हुए हैं।
मन मलिन बन रहा है
झूठा चेहरा सज रहा है।
बुद्धि दूषित बन रही है
आँखें मतलब खोज रही हैं।
जीवन यूँ ही चल रहा है
मूल्यहीन मानव बन रहा है।

कवि का परिचय
नाम -विनय अन्थवाल
शिक्षा -आचार्य (M.A)संस्कृत, B.ed
व्यवसाय-अध्यापन
मूल निवास-ग्राम-चन्दी (चारीधार) पोस्ट-बरसीर जखोली, जिला रुद्रप्रयाग उत्तराखंड।
वर्तमान पता-शिमला बाईपास रोड़ रतनपुर (जागृति विहार) नयागाँव देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page