May 23, 2022

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बढ़ रही है खुदरा महंगाई की दर, पैकेट में मात्रा हुई कम, दूध का पैकेट भी हो गया छोटा, उपभोक्ताओं को पता नहीं

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बढ़ती महंगाई से देश में मध्यम और गरीब वर्ग परेशान हो उठा है। अब दाल, सब्जी से लेकर रसोई में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री के दाम बढ़ने से लोगों को बजट बिगड़ता जा रहा है। वहीं, कंपनियों ने उत्पाद तो बेचने के नया तरीका निकाला।

बढ़ती महंगाई से देश में मध्यम और गरीब वर्ग परेशान हो उठा है। अब दाल, सब्जी से लेकर रसोई में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री के दाम बढ़ने से लोगों को बजट बिगड़ता जा रहा है। वहीं, कंपनियों ने उत्पाद तो बेचने के नया तरीका निकाला। इसमें पैकेट में सामग्री की मात्रा कम कर दी। साथ ही रेट भी बढ़ा दिए हैं। यहां तक दूध के पैकेट भी लगातार छोटे होते जा रहे हैं। कई कंपननियों ने 500 एमएल दूघ के पैकेट को सिकौड़ कर 380 एमएल तक पहुंचा दिया है। वहीं, अधिकांश उपभोक्ता इससे अनजान हैं।
डराने वाले हैं खुदरा महंगाई के आंकड़े
सरकार की ओर से जारी अप्रैल के खुदरा महंगाई के आंकड़े डराने वाले हैं। द इंडियन एक्‍सप्रेस की खबर के मुताबिक, अप्रैल में खाद्य उत्‍पादों की खुदरा महंगाई दर 8.38 फीसदी रही। इसमें अनाज के बाद सबसे बड़ी भूमिका दूध की रहती है। वहीं, रिफाइंड, तेल आदि की कीमत भी झटका दे रही हैं। वहीं, रसोई गैस, सीएनजी, पीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों की पहले ही उपभोक्ताओं पर मार पड़ चुकी है।
दूध के रेट में हो रहा खेल
गांव और कस्बे में कुछ दिनों पहले तक दूध 40 से 45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, अब वह 50 से 55 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डेयरियों पर दूध के दाम 60 रुपये तक पहुंच गए हैं। मदर डेयरी में आधा लीटर दूध 30 रुपये में बिक रहा है। अमूल दूध की भी यही कीमत है। वहीं, कई कंपनियों ने दूध की कीमत नहीं बढ़ाई, लेकिन उसका पैकेट छोटा कर दिया और मात्रा घटा दी। आरएसडी ग्रुप के जी मिल्क के पैकेट की कीमत 20 रुपये ही रखी, लेकिन दूध की मात्रा 380 एमएल भरी जा रही है। उपभोक्ता तो ऐसे पैकेट को पांच सौ एमएल समझ कर ही खरीद रहे हैं। हर दिन पैकेट में लिखे गए मैटर को जांचने की शायद हर किसी को फुर्सत न हो। ऐसे में जब भगोने में दूध उबालने को डाला जाता है, तो कम मात्रा देखकर लोग हैरत में पड़ सकते हैं।
मिर्च और हुई लाल
पिछले एक सप्ताह में लाल मिर्च से लेकर हल्दी और गर्म मसालों तक के भाव बढ़ गए हैं। इस नमक के लिए महात्मा गांधी ने दांडी मार्च किया, वह भी अब महंगा हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह शुरूआत है। आने वाले दिनों में इन सामग्री की महंगाई और बढ़ेगी। इस समय सबसे अधिक असर लाल मिर्च के दाम पर पड़ा है। लाल मिर्च ज्यादा ही तीखी हो गई है। पहले 100 ग्राम लाल मिर्च पाउडर 46 रुपये में मिल रहा था, जोकि अब 63 रुपये का हो गया है। गर्म मसाला 78 रुपये का 100 ग्राम की बजाय अब 92 रुपये का हो गया है। देगी मिर्च 72 रुपये से 92 रुपये की 100 ग्राम मिल रही है। हल्दी के दाम भी 100 रुपये प्रतिकिलो बढ़ गए हैं। पिसे हुए मिश्रित गर्म मसाले की खुशबू भी सब्जी से गायब हो रही है। यही नहीं, कई पैकेटों में मात्रा भी कम कर दी गई है।
रेट बढ़ाए, मात्रा घटाई, ऐसे कवर हो रही महंगाई
चाय के साथ बिस्कुट और भुजिया के रूप में स्नैक्स लेना भी जेब पर भारी पड़ रहा है। लगभग सभी कंपनियों ने हर प्रकार की भुजिया के दाम बढ़ा दिए हैं और पैकेट पर ग्राहकों को दिए जाना वाला ऑफर भी बंद कर दिया है। एक नामी कंपनी की साधारण भुजिया का 400 ग्राम का पैकेट 93 रुपये से बढ़कर 107 रुपये का कर दिया है। साथ ही इस पर मिलने वाला 10 फीसदी अतिरिक्त का ऑफर कंपनी ने बंद कर दिया है।
यही नहीं, भुजिया का पैकेट 440 ग्राम की बजाय 400 ग्राम कर दिया गया है। यानी अब 40 ग्राम भुजिया अतिरिक्त नहीं मिल रही है। बिस्कुट कंपनियों ने ग्राहकों की संतुष्टि के लिए अनोखा फार्मूला खोजा है। कंपनियों की ओर से दाम नहीं बढ़ाए गए, लेकिन पैकेट में बिस्कुट की मात्रा कम कर दी है। किसी ने पांच रुपये के पैकेट में 10 की बजाय छह बिस्किट कर दिए हैं तो किसी ने 14 की जगह 10 कर दिए हैं।
मैदा से बनी सामग्री भी महंगी
स्नैक्स या नाश्ते में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश खाद्य सामग्री मैदा से बनी होती है। मैदा और खाद्य तेल के दाम का असर इन सामग्री के दामों पर साफ दिखने लगा है। रस्क, मेक्रॉनी, पाश्ता, ब्रेड से लेकर दूसरी सामग्री 7 से 10 रुपये (प्रति पैकेट) महंगी हो गई है। खाने का असली जायका देने वाला नमक भी स्वाद बिगाड़ रहा है। यह तीन रुपये प्रति किलो तक महंगा हो गया है।
ठंडा भी हो रहा गर्म
इन खाद्य सामग्री के साथ गर्मी में गला तर करने वाला शीतल पेय पदार्थ भी महंगा हो गया है। हर प्रकार की कोल्ड ड्रिंक की दो लीटर की बोतल पर पांच रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। पहले यह 90 रुपये की थी। विशेष बात यह है कि इसके साथ ऑफर में मिलने वाली छोटी बोतल भी बंद कर दी गई। गर्मियों में हर घर में इस्तेमाल होने वाली रुह-अफजाह के दाम भी 150 रुपये से 160 रुपये हो गए हैं।
अब आटे ने बिगाड़ दिया रसोई का बजट
अब आटा भी महंगाई की दौड़ में शामिल हो गया है। बीते 15 दिनों में इसकी कीमत में पांच रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इस समय मध्यप्रदेश के गेहूं (चक्की) का आटा 38 रुपये प्रति किलो व अन्य प्रदेशों से मंगाये गये गेहूं का आटा 34 रुपये में मिल रहा है। 10 किलो के पैकेट बंद आटे में भी 20 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। मक्के का आटा भी करीब 42 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जा रहा है।

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