May 23, 2022

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चारधाम में हार्ट अटैक से 29 श्रद्धालु तोड़ चुके हैं दम, यात्रियों के मुंह से तारीफ करवाना सरकार का फोकस, देखें यात्रा के नियम

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चारधाम में अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। ये मौत हृदय गति रुकने से हुई। कारण ये है कि धामों के अधिक ऊंचाई में होने के कारण वहां ऑक्सीजन का स्तर कम है। वहीं, सरकार का फोकस यात्रियों के मुंह से अपनी तारीफ कराना रह गया है।

उत्तराखंड में तीन मई से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो गई थी। इसके बाद छह मई को केदारनाथ और आठ मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। इसमें चिंताजनक बात ये है कि इन धामों में अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। ये मौत हृदय गति रुकने से हुई। कारण ये है कि धामों के अधिक ऊंचाई में होने के कारण वहां ऑक्सीजन का स्तर कम है। वहीं, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था को भी इसमें जिम्मेदार माना जा रहा है। हाल ही में जब चारधाम में मौत का आंकड़ा बीस पहुंचा था तो पीएमओ ने भी उत्तराखंड सरकार से इसका विवरण मांगा था। इस पर सरकार ने यात्रा के लिए स्वास्थ्य गाइडलाइन भी जारी की। साथ ही सरकार का ध्यान इन सब व्यवस्थाओं की बजाय अपनी तारीफ कराने में फोकस है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन की ओर से ऐसे यात्रियों का विवरण जारी किया गया है, जो व्यवस्थाओं की तारीफ कर रहे हैं।
गुरुवार को तीन श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने से मौत
केदारनाथ का जटिल भूगोल लगातार श्रद्धालुओं का दम फुला रहा है। गुरुवार को केदारनाथ पहुंचे दो श्रद्धालुओं ने फिर हृदयगति रुकने से दम तोड़ दिया। इसके अलावा यमुनोत्री में भी एक श्रद्धालु की मौत हुई। अब केदारनाथ में हृदयगति रुकने से मरने वालों संख्या दस और यमुनोत्री में 12 पहुंच गई है। जबकि, चारों धाम में अब तक 29 श्रद्धालु दम तोड़ चुके हैं।
खाई में गिरने से भी हो चुकी है एक की मौत
बीते दिनों केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गौरीकुंड में पैर फिसलने से भी एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी। वहीं, दूसरी तरफ केदारनाथ पैदल मार्ग पर पहाड़ी से लुढ़के पत्थर की चपेट में आकर ओडिशा के एक श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। झारसुगुड़ा (ओडिशा) निवासी पंचानन बराई को ऋषिकेश स्थित एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि सोनप्रयाग एयरलिफ्ट किए पंचानन को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
हृदय गति रुकने से मरने वाले श्रद्धालु
धाम———कुल मृतक
यमुनोत्री———-12
गंगोत्री————03
केदारनाथ——–10
बदरीनाथ———04
अब तक बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में पहुंचे 207225 श्रद्धालु
श्री बदरीनाथ धाम कपाट खुलने की तिथि 8 मई से 12 मई शाम तक 76968 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। श्री बदरीनाथ धाम 12 मई शाम 4 बजे तक 8564 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। वहीं श्री केदारनाथ धाम कपाट खुलने की तिथि 6 मई से 12 मई तक 130257 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। गुरुवार को श्री केदारनाथ धाम शाम 4 बजे तक 15483 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इन दोनों धामों में अब तक कुल 207225 तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं।
सरकार की भी कर लो तारीफ
चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन वो काम कर रहा है, जो काम मीडिया करता था। यानी कि व्यवस्थाओं की तारीफ में लोगों की प्रतिक्रिया ली जा रही है। इसे रुद्रप्रयाग प्रशासन की ओर से जारी किया जा रहा है। दावा किया गया है कि श्री केदारनाथ धाम यात्रा में विभिन्न राज्यों व अन्य जनपदों से आए तीर्थयात्रियों ने केदारनाथ धाम एवं यात्रा मार्ग में जिला प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं की सराहना की। यात्रा मार्ग सहित श्री केदारनाथ धाम में की गई व्यवस्थाओं के संबंध में तीर्थ यात्रियों ने केंद्र व राज्य सरकार सहित जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया है।
लोगों से बातचाीत की जारी
हालांकि प्रेस नोट में उन लोगों से बातचीत नहीं दर्शायी गई, जिनके अपने यात्रा के दौरान दुनिया से चले गए हैं। वे यहां की स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में क्या राय रखते हैं। ऐसे में प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ अपनी पीठ थपथपाना ही माना जा सकता है। यदि दूसरे पक्ष से भी बातचीत की जाती तो अपनी कमियां भी पता चलती। साथ ही उसमें सुधार का मौका मिल सकता था।
रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, श्री केदारनाथ धाम के दर्शन करने के बाद नासिक, महाराष्ट्र से आए प्रकाश मधुकर शिरोड़े ने केदारनाथ की पैदल यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि पैदल मार्ग में पेयजल, स्वास्थ्य आदि की बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। किसी तरह की कोई परेशानी यात्रा मार्ग में नहीं है। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। अन्य साथियों के साथ श्री केदारनाथ के दर्शन कर लौटी पूना की वैशाली बलतोड़े ने बताया कि उन्हें बहुत ही सुविधा पूर्वक बाबा केदारनाथ धाम के दर्शन हुए हैं। अपनी सुखद यात्रा के लिए उन्होंने स्थानीय जिला प्रशासन की प्रशंसा की है।
प्रेस नोट में आगे बताया गया है कि-वहीं पानीपत, हरियाणा के राकेश कुमार ने राज्य सरकार व जिला प्रशासन के द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पैदल मार्ग सहित मंदिर परिसर में भी बेहतर कार्य हुए हैं। पश्चिम बंगाल से संजीव व महाराष्ट्र से अपने अन्य साथियों के साथ श्री केदारनाथ के दर्शन कर लौटी अमोल माने ने भी जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ में तापमान माइनस डिग्री में होने के बाद भी व्यवस्थाएं दुरस्त हैं। केदारनाथ धाम में किए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों की भी सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए राज्य व जिला प्रशासन की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई है। पिथौरागढ़ निवासी दीपक कापड़ी ने भी दर्शन के बाद यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं को प्रशंसनीय बताया है।
बढ़ा चुके हैं पंजीकरण की क्षमता
हाल ही में सरकार ने चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं के भारी संख्या में आने के कारण सरकार ने प्रत्येक धाम में प्रतिदिन की पंजीकरण क्षमता एक-एक हजार बढ़ा दिया है। पहले तक अभी तक बदरीनाथ में 15000, केदारनाथ में 12000, गंगोत्री में 7000 और यमुनोत्री में 4000 यात्रियों का प्रतिदिन पंजीकरण कराने के व्यवस्था थी। अब यात्रा सीजन के प्रथम 45 दिनों के लिये गंगोत्री यमुनोत्री, श्री केदारनाथ एवं श्री बद्रीनाथ में दर्शन करने की सुविधा के दृष्टिगत प्रतिदिन मंदिर धामों में दर्शन के लिये आने वाले श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या में एक-एक हजार की वृद्धि की गई है। इस संबंध में पूर्व के शासनादेश में आंशिक संशोधन करते हुए नया शासनादेश भी जारी हो चुका है। संशोधित शासनादेश के अनुसार चार धाम यात्रा के लिये यात्रा सीजन के प्रथम 45 दिनों के लिये तीर्थयात्री प्रतिदिन दर्शन के लिए निर्धारित अधिकतम संख्या श्री गंगोत्री में 8 हजार, श्री यमुनोत्री में 5 हजार, श्री केदारनाथ में 13 हजार एवं श्री बद्रीनाथ में 16 हजार है।
यहां कराएं पंजीकरण
यात्रियों के लिए पर्यटन विभाग की वेबसाइट https://registrationandtouristcare.uk.gov.in/ में पंजीकरण अनिवार्य किया गया। वर्तमान में चारधाम यात्रा मार्ग के 18 स्थानों पर आफलाइन व आनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है।
यात्रा मार्ग पर होगी पंजीकरण की जांच
पंजीकरण की जांच यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्थापित जांच चौकियों और पुलिस चौकियों पर की जाएगी। बढ़ती संख्या के दृष्टिगत सरकार ने चारों धामों के लिए होने वाले पंजीकरण में प्रतिदिन की तय संख्या में एक-एक हजार की वृद्धि भी कर दी है।
केदारनाथ में दर्शन करने के समय में की बढ़ोतरी
केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दर्शन करने के समय में पांच घंटे की बढ़ोतरी की है। अब सुबह चार से दोपहर तीन बजे और फिर शाम चार बजे से रात 10:30 बजे तक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।
जारी की गई एडवाइजरी
चारधाम में काफी संख्या में यात्रियों की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमा भी अब नींद से जागा और दो दिन पहले अब यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि उत्तराखंड में समस्त तीर्थस्थल उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं। इनकी ऊंचाई समुद्र तल से 2700 मीटर से भी अधिक है। इन स्थानों पर श्रद्धालु अत्यधिक सर्दी, कम आद्रता, अत्यधिक अल्ट्रा वॉयलेट रेडिएशन, कम हवा का दबाव, कम ऑक्सीजन से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा के लिए ये दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
ये जारी किए गए हैं निर्देश
-स्वात्थ्य परीक्षण के उपरांत ही यात्रा के लिए प्रस्थान करें।
-पूर्व से बीमार व्यक्ति अपने चिकित्सक का परामर्श पर्चा एवं चिकित्सक का संपर्क नम्बर, एवं चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाईयां अपने साथ रखें।
-आति वृद्ध एव बीमार व्यक्तियों एवं पूर्व में कोविड से ग्रसित व्यक्तियों के लिए यात्रा पर ना जाना या कुछ समय के लिए स्थगित करना उचित होगा।
-तीर्थेस्थल पर पहुँचने से पूर्व मार्ग में एक दिन का विश्राम करना उचित होगा।
-गर्म एवं ऊनी वस्त्र साथ में अवश्य रखें।
-हदय रोग, श्वास रोग, मधुमेह, उच्य रक्तचाप से ग्रस्त रोगी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाते समय विशेष सावधानी बरतें।
-लक्षण जैसे- सिर दर्द होना, चक्कर आना, घबराहट का होना, दिल की धड़कन तेज होना, उल्टी आना, हाथ- पांव व होठों का नीला पड़ना, थकान होना, सांस फूलना, खॉसी होना अथवा अन्य लक्षण होने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे एवं 104 हैल्पलाईन नम्बर पर संपर्क करें।
-धूम्रपान व अन्य मादक पदार्थों के सेवन से परहेज करें।
-सन स्क्रीन एसपीएफ 50 का उपयोग अपनी त्वचा को तेज धूप से बचाने के लिए करें।
-युवी किरणों से अपनी आंखों के बचाव के लिए सन ग्लासेस का उपयोग करें।
-यात्रा के दौरान पानी पीते रहें और भूखे पेट ना रहें।
-लम्बी पैदल यात्रा के दौरान बीच-बीच में विश्राम करें।
-ऊचाई वाले क्षेत्रों में व्यायाम से बचें ।
-किसी भी स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के लिए 104 एवं एम्बुलेंस के लिए 108 हैल्पलाईन नम्बर सम्पर्क करें।

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