October 24, 2021

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सीएम ने पूरा नहीं किया वायदा, जनहित में आशाओं ने लिया आंदोलन वापस, जल्द शासनादेश जारी नहीं हुआ तो होगा संघर्ष

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आशाओं ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। साथ ही कहा कि सीएम ने अपना वायदा पूरा नहीं किया। इसके बावजूद वे जनहित में आंदोलन वापस ले रही हैं।

उत्तराखंड में कैबिनेट की बैठक में आशा वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोत्तरी के संबंध में फैसला होने पर आशाओं ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। साथ ही कहा कि सीएम ने अपना वायदा पूरा नहीं किया। इसके बावजूद वे जनहित में आंदोलन वापस ले रही हैं। बाकी मांगों को लेकर वे निरंतर प्रयारसरत रहेंगी। साथ ही उन्होंने फैसले के अनुरूप जल्द शासनादेश जारी करने की मांग की है। सीटू से संबंधित उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन की बैठक में हड़ताल समाप्ति की घोषणा की गई।
कर रही थीं लंबे समय से आंदोलन
उत्तराखंड में 12 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से आशा वर्कर्स आंदोलनरत कर रही थी। इसके तहत दो अगस्त से कार्य बहिष्कार कर गढ़वाल मंडल के सभी जिलों में सीएमओ कार्यालय के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों के समक्ष धरने का लंबा कार्याक्रम चलाया गया। सीटू से संबंद्ध आशा वर्कर्स यूनियन की बीती नौ अगस्त को स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी से यूनियन के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई थी। इस पर शासन ने कुछ मांगों पर सहमति दी थी, लेकिन शासनादेश जारी नहीं किया गया। इसके अगले दिन 10 अगस्त को आशाओं ने सीएम आवास कूच भी किया था। इसके बाद 27 अगस्त को आशा वर्कर्स ने विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन किया था। 21 अगस्त को सचिवालय समक्ष धरना दिया गया। इस दिन भी आशाओं के प्रतिनिधिमंडल को स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने वार्ता के लिए बुलाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों के संबंध में 24 सितंबर को कैबिनेट की मीटिंग में प्रस्ताव रखा जाएगा। इस आश्वासन पर आशाएं वापस लौटीं।
29 सितंबर को यूनियन ने सचिवालय कूच किया और वहीं धरने पर बैठ गईं। मांग की गई कि मानदेय वृद्धि के संबंध में शासनादेश जल्द जारी किया जाए। देर रात करीब सवा दस बजे आशाओं को फिर स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने वार्ता को बुलाया और उन्होंने लिखित में आश्वासन दिया कि आशा वर्कर्स का जो प्रस्ताव है, उसे आगामी कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इस पर आशाएं मानी। साथ ही उन्होंने समस्त कार्य बहिष्कार और स्वास्थ्य केंद्रों के समक्ष धरने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया।
कैबिनेट में हुआ ये फैसला
मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में तय किया गया कि आशा वर्कर्स को हर महीने साढ़े 6 हजार खाते में दिए जाएंगे। एक हजार रुपये मानदेय में बढ़ोतरी की गई और 500 रुपये प्रोत्साहन राशि है।


आशाओं की बैठक में लिया ये निर्णय
बुधवार 13 अक्टूबर को आशाओं की बैठक में कहा गया कि उत्तराखंड कैबिनेट की ओर से आशाओं के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव आशाओं के संघर्ष और आंदोलन के बल पर ही संभव हुआ है। हालांकि वृद्धि मुख्यमंत्री के वादे के अनुसार नहीं की गई है। फिर भी जनहित में कार्य बहिष्कार समाप्त कर आशा वर्कर्स काम पर लौट रही हैं। साथ ही उन्होंने हड़ताल के समय का पैसा काटने का फैसला सरकार से वापस लेने की मांग की। कहा कि सभी आशाओं को अगस्त और सितंबर माह का पैसा दिया जाए। साथ ही ये भी कहा कि यदि शीघ्र शासनादेश जारी नहीं हुआ तो यूनियन पुनः आंदोलन की राह पर जाने को विवश होगी। आशा वर्कर अपनी एकजुटता से अपने हक और सम्मान के लिए भविष्य में संघर्ष जारी रखेंगी।
इस मौके पर यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे ने कहा कि आशाओं को मासिक वेतन पेंशन और आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने समेत 12 सूत्री को मांगों को लेकर चल रहा आशाओं का राज्यव्यापी बेमियादी कार्य बहिष्कार उत्तराखंड राज्य कैबिनेट की बैठक के फैसले के बाद समाप्त हो गया है। कैबिनेट में मासिक पारिश्रमिक में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पारित किया गया है। मांगपत्र में उठाए गए मासिक वेतन, पेंशन और अन्य लंबित मुद्दों पर भविष्य में संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि मासिक पारिश्रमिक को बढ़ाने का प्रस्ताव दो अगस्त से यूनियन की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन व हड़ताल के बल पर ही संभव हुआ। भले ही राज्य सरकार अपने वादे पर खरी नहीं उतरी और राज्य के मुख्यमंत्री ने आशाओं से किए गए अपने वादे को तोड़ा है। जनता के स्वास्थ्य संबंधी हितों के मद्देनजर आशाओं ने काम पर वापस लौटने का फैसला कर लिया है। अभी भी मासिक वेतन, नियमितीकरण, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान जैसे सवालों पर सरकार ने कुछ भी नहीं किया गया है। इसके लिए भविष्य में संघर्ष जारी रहेगा।
इस मौके पर कहा गया कि आशा वर्कर का कार्य एक माह या 2 माह का नहीं होता है। आशा वर्कर निरंतर एक गर्भवती और एक बच्चे के साथ लगातार 10 माह तक कार्य करती हैं। तब उसको पारिश्रमिक मिलता है। इसके बावजूद हड़ताल के दौरान भी आशा वर्कर्स ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सभी गर्भवती तथा बच्चों के टीकाकरण संबंधी कार्य फोन के माध्यम से सूचित किए हैं। लगातार लोगों को समझा कर सुविधाएं दिलाने का प्रयास किया है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए कार्यबहिष्करा की अवधि के मानदेय का भुगतान किया जाए।
ये रहीं उपस्थित
बैठक में कलावती चंदोला, धर्मिष्ठा, आशा चौधरी, सुनीता चौहान, लोकेश रानी, अनीता भट्ट, मीना जखमोला, सरोज, अनीता अग्रवाल, पिंकी, सीमा, नीलम, सविता, सरिता नौटियाल, सुशीला, प्रमिला राणा, नीरा कंडारी, नीरज, सुनीता पाल, पिंकी, रत्ना, सीमा, संगीता, सुनीता, इंदरजीत कौर, बबीता शर्मा, रामा, ललिता, रोशनी राणा, फुलमा देवी, विमला मैठानी, साक्षी, यशोदा, कीर्ति. मनप्रीत, लता, पिंकी, सोलंकी, ममता आदि बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता शामिल थीं।
आशा वर्कर्स की मांगे
आशाओं को सरकारी सेवक का दर्जा दिया जाऐ, न्यूनतम वेतन 21 हजार प्रतिमाह हो, वेतन निर्धारण से पहले स्कीम वर्कर की तरह मानदेय दिया जाए, सेवानिवृत्ति पर पेंशन सुविधा हो, कोविड कार्य में लगी सभी आशाओं को भत्ता दिया जाए, कोविड कार्य में लगी आशाओं 50 लाख का बीमा, 19 लाख स्वास्थ्य बीमा का लाभ, कोरनाकाल में मृतक आशाओं के परिवारों को 50 लाख का मुआवजा, चार लाख की अनुग्रह राशि दी जाए। ओड़ीसा की तरह ऐसी श्रेणी के मृतकों के परिवारों विशेष मासिक भुगतान, सेवा के दौरान दुर्घटना, हार्ट अटैक या बीमारी की स्थिति में नियम बनाए जाएं, न्यूनतम 10 लाख का मुआवजा दिया जाए, सभी स्तर पर कमीशन खोरी पर रोक, अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति हो, आशाओं के साथ सम्मान जनक व्यवहार किया जाए, कोरना ड्यूटी के लिये विशेष मासिक भत्ते का प्रावधान हो।
पूर्व में शासन से वार्ता में आशाओं के संबंध में ये लिए गए थे निर्णय
-आशाओं को छह हजार का मानदेय देने की पेशकश स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने की। अन्य देय भी मिलते रहेंगे।
– प्रत्येक केन्द्र में आशा रूम स्थापित किये जाऐंगे।
-अटल पेंशन योजना में उम्र की सीमा समाप्त करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा।
-आशाओं के सभी प्रकार के उत्पीड़न एवं कमीशनखोरी पर कार्रवाई होगी।
-अन्य सभी मांगों पर सौहार्दपूर्ण कार्यवाही होगी।
-स्वास्थ्य बीमा की मांग पर समुचित कार्यवाही होगी।
-उपरोक्त सन्दर्भ में शासन द्वारा आवश्यक कार्यवाही के बाद अति शीध्र शासनादेश जारी किया जाएगा।

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