October 29, 2021

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शिक्षिका हेमलता बहुगुणा की गढ़वाली कविता-बीज

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शिक्षिका हेमलता बहुगुणा की गढ़वाली कविता-बीज।

बीज

‌पहली मिलदूं छौ बीज घरों म
अब मिलणु मुश्किल ह्वैगी
घरों म बीज सम्भाली नी रखदा
भरोसो सरकार पर ह्वैगी।

पैली का लोग फसल औण पर
बीज पैली सम्भाल दा था
वैका बाद ही खाण की खातिर
अन्न तैं सम्भालिक रखदा था।

अब त लोगुन इनी सिख्याली
गेहूं ,दाल ,चौंल सरकार देली
नी देली सरकार त सब जन
भूखा ही सीई जाली।

कनू समय आई भाईयौं
बीज घर म उक्टणौं कूं
कनै खाला कनै रला
ह्वैगी बात सोचण कूं।

मैं तुमतैं बात बतौंदू
बात की गांठ तुम बांधि द्या
बीज तैं नी खावा तुम
बीज सभालिक रखि द्या।

कवयित्री का परिचय
नाम-हेमलता बहुगुणा
पूर्व प्रधानाध्यापिका राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय सुरसिहधार टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड।

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