October 16, 2021

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सीपीआइ (एम) का दो दिवसीय 16 वां जिला सम्मेलन शुरू, भारत बंद को दिया समर्थन

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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी ) का 16 वां जिला देहरादून का सम्मेलन सहसपुर में डाक्टर दिनेश प्रताप नगर स्थित धर्मशाला सभागार में शुरू हो गया। इस मौके पर ध्वजारोहण किया गया। शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही नगर क्षेत्र में रैली भी निकाली गई।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी ) का 16 वां जिला देहरादून का दो दिवसीय सम्मेलन सहसपुर में डाक्टर दिनेश प्रताप नगर स्थित धर्मशाला सभागार में शुरू हो गया। इस मौके पर ध्वजारोहण किया गया। शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही नगर क्षेत्र में रैली भी निकाली गई। सम्मेलन में मंहगाई, पैट्रो पदार्थ, गैस के दामों में वृद्धि, बिजली के बढ़ते बिल, शिक्षा, रोजगार, कानून व्यवस्था, मजदूर, किसान, महिलाओं तथा बेरोजगारी, शहर की बिगड़ती व्यवस्था, स्मार्ट सिटी आदि मुद्दे पर चर्चा की गई। साथ ही केंद्र सरकार की श्रम, मजदूर, किसान विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की गई।
तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल की अध्यक्षता में सम्मेलन का उद्घाटन करते हुऐ पार्टी राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि यूपीए द्वितीय सरकार की विफलताओं का लाभ उठाते हुए बर्ष 2014 में मोदी के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन सरकार ने सबका साथ, सबका विकास के लुभावने नारे के साथ भारी बहुमत हासिल किया। ये सरकार अपने पहले ही कार्यकाल में सबसे विफल सरकार साबित हुई। अपनी विफलताओं को छुपाने के लिये इस सरकार ने घोर साम्प्रदायिक एजेंडे पर काम करना शुरू किया।

उन्होंने कहा है कि अब तक अन्य सरकारों के कार्यकाल में जो नहीं हो पाया, वह मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ। तमाम जनतांत्रिक तथ्य धर्मनिरपेक्ष परम्पराओं को दरकिनार करते हुए एक के बाद एक संवैधानिक संस्थाओं तथा संवैधानिक परम्पराओं पर हमला आम बात हो गई। देश को चन्द मुठ्ठी भर घरानों के हाथों बेचा जाने लगा है। इस सरकार ने संसद तथा संसद के बाहर विपक्ष पर हमले तेज किए।हमारी स्वतंत्र विदेश नीति के विरूद्ध आचरण कर दुनियाभर में देश को कमजोर किया। युध्दोन्माद पैदाकर, पड़ोसी राष्ट्रों के साथ सम्बन्ध खराब करने के कार्य किया। 2019 में पुलवामा घटना में संदिग्ध भूमिका तथा चुनाव तन्त्र को प्रभावित कर, कारपोरेट घरानों के बल पर तथा साम्प्रदायिकता बल पर पुनःप्रचण्ड बहुमत हासिल कर सत्तासीन हुई।
उत्तराखंड राज्य में प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार ने कुल मिलाकर जनता को न केवल निराश किया, बल्कि राज्य में पहले के मुकाबले भ्रष्टाचार व अव्यवस्था के बोलबाले को बढ़ावा दिया। उन्होंने ने कहा राज्य में बार-बार मुख्यमन्त्रियों का बदला जाना भाजपा की आन्तरिक गुटबाजी का ही परिणाम है। भाजपा की यही नीतियां जनता पर आर्थिक बोझ डालने के लिये जिम्मेदार हैं । यह सरकार भी केन्द्र की मोदी सरकार के नक्शे कदम पर है। तथा जनता का ध्यान मुख्य समस्याओं से हटाकर साम्प्रदायिक एजेंडे को लागू करवाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि कोविडकाल में कुम्भ मेला का आयोजन तथा कुम्भ से फैले संक्रमण के कारण अनेक लोगों की असमय मृत्यु का कारण बनी। कुम्भ मेले की व्यवस्था की आड़ में भारी भ्रष्टाचार जनता के सामने है। कोविडकाल में लचर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था तथा महंगे निजी अस्पतालों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा है। सम्पूर्ण कोविड काल में आमजनता को सहायता न देना एक घोर जनविरोधी कदम है। कोविड के कारण बाहर से बेरोजगार होकर आए लोगों के साथ ही स्थानीय स्तर पर बेरोजगार हो चुके लोगों को कोई सहायता नहीं दी गई। आए दिन राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के चलते जन धन के नुकसान एक आम बात है।
उन्होंने कहा कि जोशीमठ बिष्णु प्रयाग परियोजनाओं में 200 से ज्यादा लोग दफन होना 2013 केदारनाथ की त्रासदी के बाद बड़ी दुर्घटना है। सरकारों ने इससे सबक नहीं सीखा। सरकार की गलत नीतियों के परिणामस्वरूप आल वेदर रोड के नाम पर पर्यावरण तथा स्थानीय लोगों को भारी क्षति पहुंची है। आज सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना सरकार की ही अविवेकपूर्ण नीति, अनियोजित योजना तथा भ्रष्टाचार के कारण असफल साबित हो चुकी है। सरकारकी ओर से टीएचडीसी का नीजिकरण कर निजी कम्पनियों के लिए दरवाजा खोल दिया है। राज्य अनेक क्षेत्रों में सरकारी भूमि का प्रभावशाली लोगों के लिये आंवटन आम बात है। यह सरकार शिक्षा, रोजगार तथा विकास के क्षेत्र में फिसड्डी साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा है कि सरकार की विफलता के परिणामस्वरूप राज्य में समाज के विभिन्न हिस्से, ट्रेड यूनियन, छात्र, बेरोजगार तथा किसान आन्दोलित हैं।
इस अवसर पर राज्य सचिव मंडल के सदस्य सुरेंद्र सिंह सजवाण ने कहा कि सरकार के तीन किसान विरोधी कानूनों के कारण पिछले 9 माह से भी अधिक समय से इन कानूनों के खिलाफ आन्दोलित हैं। यह आन्दोलन का उत्तराखंड में मुख्य रूप से देहरादून, हरिद्वार तथा उधमसिंहनगर के तराई क्षेत्र में है। राज्य में आसन चुनाव सनिकट भाजपा सत्ता में वापसी के लिये एक बार फिर से खरीद फरोख्त करने में लगी है। साथ ही मतदाताओं को प्रभावित करने के लिये सरकारी धन को लुटाने में लगी है। कांग्रेस में भगदड़ व आन्तरिक गुटबाजी चरम पर है। राज्य की स्थानीय यूकेडी की स्थिति में ठहराव में है। भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने की आवश्यकता है। इसका कार्यभार वामपंथी दलों खासकर हमारी पार्टी पर है। समय रहते हमारी पार्टी पहल करते भाजपा के खिलाफ संगठित आन्दोलन तैयार करना होगा।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली ने कहा है कि सरकार तीन किसान कानून के खिलाफ किसानों का आन्दोलन जारी है। 27 को भारत बन्द है। इसकी तैयारी में किसान संगठन दिनरात एक कर रहे हैं। सचिव मंडल की सदस्य इन्दु नौडियाल ने महिलाओं की समस्याओं पर विचार रखे। कहा कि राज्य अनेक क्षेत्रों में सरकारी भूमि का प्रभावशाली लोगों के लिये आंवटन आम बात है। यह सरकार शिक्षा, रोजगार तथा विकास के क्षेत्र में फिसड्डी साबित हो चुकी है। राज्य में यदा कदा वामपंथी दल ज्वलंत मुद्दों पर हस्तक्षेप करते आऐं हैं, किन्तु राज्य की विकट समस्याओं को देखते हुऐ यह नाकाफी है। सरकार की विफलता के परिणाम स्वरूप राज्य में समाज के विभिन्न हिस्से, ट्रेड यूनियन, छात्र, बेरोजगार तथा किसान आन्दोलित हैं।
इससे पूर्व पार्टी के सचिव मंडल सदस्य स्थानीय कमेटी के सदस्य कमरूद्दीन ने पार्टी का झंडा फहराया तथा उपस्थित प्रतिनिधियों ने शहीद वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर अमर शहीद, अमर रहे के गगनभेदी नारे लगाए गए। इस मौके पर सहसपुर के पूर्व प्रधान सुन्दर थापा, कारबारी की प्रधान माला गुरूंग, सचिव मंडल सदस्य लेखराज, अनन्त आकाश, शम्भु प्रसाद ममगाई, कृष्ण गुनियाल, याकूब अली, सत्य प्रकाश, साधूराम, मामचंद, भगवन्त पयाल, विजय भट्ट, पुरूषोत्तम बडोनी, शेरसिंह, हिमांशु, गगन गर्ग, मनीष, राजेश, अर्जुन सिंह रावत, रंजन सोलंकी, गयूर अहमद, प्रमोद शर्मा, अशोक चौधरी, एनएस पंवार, जितेंद्र गुप्ता, शैलेंद्र, नितिन, इन्देश, देवसिंह, शिशुपाल, नुरैशा, रविन्द्र नौडियाल, नुरैशा, सुधा देवली, अमर बहादुर, गुमान सिंह, वहीद, इस्लाम, ब्रह्मानन्द कोठारी, ऐना, ज्योति गुरूंग, रोशन मौर्य आदि ने विचार व्यक्त किए।

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