October 29, 2021

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अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने पुरुषों के लिए दी 400 खेलों की अनुमति, महिला खेलों पर फिलहाल प्रतिबंध

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अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने खेल नीति के तहत पुरुषों के लिए करीब 400 खलों को अनुमति दी है। वहीं, महिलाओं के लिए फिलहाल कोई निर्णय नहीं किया है। यानी महिलाओं के खेल पर प्रतिबंध है।

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने खेल नीति के तहत पुरुषों के लिए करीब 400 खलों को अनुमति दी है। वहीं, महिलाओं के लिए फिलहाल कोई निर्णय नहीं किया है। यानी महिलाओं के खेल पर प्रतिबंध है। अफगानिस्तान के नए खेल प्रमुख ने महिलाओं के खेलने से जुड़े सवाल पर जवाब देने से इंकार कर दिया। बशीर अहमद रुस्तमजई ने एएफपी से कहा कि कृपया महिलाओं के बारे में सवाल न करें। काली-सफेद दाड़ी वाले रुस्तमजई पूर्व कुंग फू और रेसलिंग चैंपियन रहे हैं। उन्हें इस इस्लामिक ग्रुप की ओर से अफगानिस्तान में खेल और फिजिकल एजुकेशन के लिए डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया गया है।
बता दें कि 1996 से 2001 के तालिबान के क्रूर और दमनकारी शासन के दौरान महिलाओं के किसी भी खेल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। साथ ही पुरुषों के खेलों पर भी कड़ा नियंत्रण रखा जाता था। महिलाओं का शिक्षा और काम पर भी काफी हद तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। यही नहीं सार्वजनिक तौर पर फांसी देने के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियमों का इस्तेमाल इनके द्वारा खूब किया गया। रुस्तमजई ने कहा कि हम किसी भी खेल पर तब तक प्रतिबंध नहीं लगाएंगे जब तक कि वह शरिया कानून का उल्लंघन नहीं करता। 400 प्रकार खेलों की अनुमति दी गई है।
रुस्तमजई ने कहा कि इस्लामी कानून का पालन करने का मतलब अन्य देशों की तुलना में व्यवहार में थोड़ा बदलाव है। ये भी ज्यादा नहीं है। उदाहरण के लिए फुटबॉल खिलाड़ियों या मॉय थाई मुक्केबाजों को थोड़े लंबे शॉर्ट्स पहनने होंगे, जो घुटने से नीचे होंगे। महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी शीर्ष तालिबान नेतृत्व के आदेश का इंतजार है।
उनके एक सलाहकार ने कहा कि महिलाओं को खेलने की अनुमति देना, हम विश्वविद्यालयों की तरह कल्पना कर सकते हैं। पुरुषों से बिल्कुल अलग, लेकिन रुस्तमजई ने सीधे तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की। नए नियमों के मुताबिक- महिलाओं को विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की अनुमति दी गई है, लेकिन उन्हें पुरुषों से अलग रखा जाता है। साथ ही खास तरह का परिधान अबाया उन्हें पहनना होगा। यही नहीं पढ़ाई का सलेबस भी उनके हिसाब से ही होता है। अभी तक जो संकेत मिले हैं महिलाओं के लिए कुछ भी साफ नहीं है। पिछले हफ्ते, तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के उप प्रमुख अहमदुल्ला वासीक ने कहा कि महिलाओं के लिए खेल खेलना जरूरी नहीं है।

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