June 16, 2021

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उत्तराखंड के सीएम के मुख्य सलाहकार शत्रुघ्न से मिले राज्य कर्मचारी, दोहराई कार्मियों की मांग, दिया ज्ञापन

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उत्तराखंड राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम तीरथ सिंह रावत के मुख्य सलाहकार शत्रुघ्न सिंह से मुलाकात कर उन्हें कर्मचारियों की समस्या से अवगत कराया।

उत्तराखंड राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम तीरथ सिंह रावत के मुख्य सलाहकार शत्रुघ्न सिंह से मुलाकात कर उन्हें कर्मचारियों की समस्या से अवगत कराया। साथ ही उन्हें कर्मचारियों की मांगों से संबंधित ज्ञापन देकर बिंदुवार उनसे चर्चा की। उनसे अपेक्षा की है कि वे कर्मचारियों की समस्या का समाधान कराने का प्रयास करेंगे।
परिषद नेताओं ने मुख्य सलाहकार का ध्यान उत्तराखंड शासन के कार्मिक अनुभाग-2 की ओर से स्व प्रकाश पन्त तत्कालीन वित्तमंत्री की अध्यक्षता में राज्य के कार्मिकों की मांगों के संबंद में दिनांक 27 अगस्त 2018 को आहूत समीक्षा की तरफ दिलाया। बताया कि बैठक की जारी की गई कार्यवृत्ति में उल्लिखित बिन्दुओं पर लिये गये निर्णयों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके 11 सूत्रीय मांगपत्र पर उस समय सर्वसहमति से कार्यवाही के लिए विभिन्न निर्देश दिये गये थे। इसके तहत कार्मिकों को एसीपी 10, 16 एवं 26 वर्ष की सेवा अवधि पर पदोन्नति वेतनमान के साथ दिये जाने के साथ ही ऊर्जा निगम के कार्मिकों को 09, 14 एवं 19 वर्ष की सेवा अवधि पर एसीपी का लाभ दिये की मांग पर माननीय वित्तमंत्री ने तब निर्देशित किया था। कहा गया था कि मुख्य सचिव, उत्तराखंड ऐसे विभागों/संवर्गों जिनमें कुल सेवा अवधि में न तो 03 पदोन्नतियां प्राप्त हो रही हैं और न ही 03 एसीपी का लाभ कार्मिकों को प्राप्त हो रहा है, के सम्बन्ध में विभागवार सचिव, वित्त, उत्तराखंड शासन से केस-टू-केस समीक्षा कर मंत्री के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
इसके अतिरिक्त ऊर्जा निगमों में जिन कार्मिकों को सातवें वेतनमान का लाभ प्राप्त होने के फलस्वरूप छठे वेतनमान में प्राप्त वेतन से कम वेतन प्राप्त हो रहा है, के सम्बन्ध में निदेशक, वित्त, ऊर्जा विभाग से परीक्षणोंपरान्त प्रस्ताव वित्त विभाग के विचारार्थ उपलब्ध कराने के भी दिये गये थे। जिस पर शासन के वित्त विभाग, ऊर्जा विभाग, समस्त प्रशासकीय विभाग एवं निदेशक, वित्त, ऊर्जा निगम के द्वारा अपेक्षित कार्यवाही की जानी थी। इसी प्रकार विभिन्न अन्य बिन्दुओं पर भी कार्यवाही के लिए माननीय मंत्री जी द्वारा निर्देश दिये गये थे।
प्रतिनिधिमण्डल ने यह भी अवगत कराया कि परिषद की मांग पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) की अध्यक्षता में शासन के सम्बन्धित अधिकारियों की उपस्थिति में परिषद के प्रतिनिधिमण्डल के साथ पुनः बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न बिन्दुओं यथा- एसीपी के अन्तर्गत पदोन्नत वेतनमान दिया जाना, विभिन्न विभागों में रिक्त पदों के सापेक्ष लम्बित पदोन्नति किया जाना, विभागीय कार्मिकों के लम्बित प्रकरणों पर कार्यवाही हेतु विभागीय सचिव की अध्यक्षता में परिषद व विभागीय संगठन के साथ बैठकों का आयोजन कर प्रकरणों का निस्तारण किया जाना आदि पर बनी सहमति के उपरान्त शासन स्तर से सम्बन्धित अधिकारियों को पत्र भी निर्गत किये गये। इसके बावजूद प्रकरणों में यथा स्थिति बनी हुई है एवं प्रकरण विभागाध्यक्ष अथवा शासन स्तर पर लम्बित हैं। आज के प्रतिनिधिमंडल में ठा प्रहलाद सिंह, अरूण पाण्डे, चौधरी ओमवीर सिंह, सोबन सिंह रावत आदि कर्मचारी नेता सम्मिलित थे।
ये हैं लंबित मामले
-एसीपी की पूर्व व्यवस्था 10, 16 एवं 26 वर्ष को पदोन्नत पद के वेतनमान के साथ बहाली।
-प्रदेश के समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में पूर्व की भांति पदोन्नति में शिथिलीकरण का लाभ दिया जाना।
-राज्य कर्मियों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जाना।
-विभिन्न विभागों में ढांचा/नियमावली अविलम्ब बनाई जाये तथा जिन विभागों में पदोन्नति नहीं हुई है उन विभागों में पदोन्नति किया जाना।
-चुतर्थ श्रेणी कार्मिकों को एसीपी के अन्तर्गत ग्रेड पे-4200 दिया जाय तथा मृत घोषित किये गये सभी पदों को पुर्नजीवित किया जाय।
-स्थानान्तरण अधिनियम में महिलाओं को 50 वर्ष एवं पुरूषों को 52 वर्ष दुर्गम क्षेत्र में स्थानान्तरण पर छूट दिया जाना।
-विभिन्न विभागों में लम्बित वेतन विसंगति के प्रकरणों का पुनः मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निस्तारण किया जाय।
-विभिन्न विभागों में दैनिक वेतनभोगी, संविदा, उपनल, आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण की कार्यवाही की जाय।
-जिन विभागों में पदोन्नति के अवसर नहीं है उन्हें अन्य संवर्गों की भांति स्टापिंग पैटर्न का लाभ दिया जाय।
-समस्त संवर्गों में समान रूप से पदोन्नति के अवसर प्रदान किये जायें। प्रत्येक संवर्ग को पूरे सेवाकाल में कम से कम 03 पदोन्नति प्रदान की जायें।
-जिन विभागों के कार्मिकों को वाहन भत्ता नहीं दिया जा रहा है, उन्हें पूर्व की भांति वाहन भत्ता दिये जाने हेतु सम्बन्धित विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए जाएं। वर्ष 2013 में किये गये शासनादेश के अनुरूप समस्त फील्ड कर्मचारियों को वाहन भत्ता अनुमन्य किया जाय।
-पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाना।

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