June 15, 2021

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आप नेता जुगरान का आरोप, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है देवस्थानम बोर्ड

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आम आदमी पार्टी नेता रवीन्द्र जुगरान ने देवस्थानम बोर्ड पर आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित परम्पराओं, मान्यताओं, व्यवस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने व करोड़ों आस्थावान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं एवं आस्थाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

उत्तराखंड आंदोलनकारी व आम आदमी पार्टी नेता रवीन्द्र जुगरान ने देवस्थानम बोर्ड पर आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित परम्पराओं, मान्यताओं, व्यवस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने व करोड़ों आस्थावान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं एवं आस्थाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। जुगरान ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के गठन के समय उत्तराखंड सरकार का दावा था कि इसका गठन चारों धामों व चार धाम यात्रा के उन्नयन व सुचारु संचालन एवं रखरखाव के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो की पूर्णतः ग़लत साबित हुआ। इसके ठीक उलट देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद एक के बाद एक विवाद उत्पन्न हो रहे हैं, जिससे श्रृद्धालुओं, हक हुकूक धारियों, तीर्थ पुरोहितों, स्थानीय नागरिकों व आस्थावान नागरिकों में आक्रोश व रोष उत्पन्न हो रहा है।
रवीन्द्र जुगरान ने कहा कि विगत एक वर्ष पूर्व भी भगवान बद्रीनाथ जी के कपाट खुलने की तिथि भी देवस्थानम बोर्ड के अधिकारियों के गलत निर्णय के कारण विवादित हुई थी। बद्रीनाथ जी के कपाट खुलने की तिथी पूर्व निर्धारित व घोषित थी, जिसे बदला गया। इसके साथ इस वर्ष भी देवस्थानम बोर्ड की ओर से कोरोना गाइड लाइन का हवाला देते हुए कपाट खुलने के समय को सुबह सात बजे कर दिया गया, जबकि ये ब्रह्ममुहुर्त में खोले जाते हैं। कुछ दिनों तक सवेरे सात बजे ही कपाट खोले गए, जिसको बाद में भारी विरोध होने पर ब्रह्ममुहुर्त में ही खोलने का निर्णय लिया गया। जुगरान ने कहा कि सरकार की हठधर्मिता, अदूरदर्शिता, अज्ञानता के चलते देवस्थानम बोर्ड नौकरशाही के चंगुल में फंस चुका है ।
जुगरान ने कहा यद्यपि तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद घोषणा की थी कि देवस्थानम बोर्ड के बारे में पुनर्विचार किया जायेगा। जो कि हवा-हवाई साबित हुई। जुगरान ने कहा कि यह सरकार हिंदू मंदिरों के दैनिक कार्यों में अनावश्यक दखल, मान्यताओं, परंपराओं का अनादर कर देश विदेश के करोड़ों आस्थावान हिन्दुओं की भावनाओं और धार्मिक आस्था के साथ भद्दा मजाक कर रही है। देवस्थानम बोर्ड के अब तक के सभी फैसले विवादित और हिंदुओं की धार्मिक आस्था पर चोट है।

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