June 16, 2021

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यू टर्नः आचार्य बालकृष्ण बोले-रामदेव ने एलोपैथी का नहीं किया विरोध, नोटिस का जवाब नोटिस से देंगे

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योग गुरु बाबा रामदेव और आइएमए के बीच एलोपैथी और आर्युवेद चिकित्सा पद्धति को लेकर चल रहे विवाद में हर दिन नए मोड़ नजर आ रहे हैं।

योग गुरु बाबा रामदेव और आइएमए के बीच एलोपैथी और आर्युवेद चिकित्सा पद्धति को लेकर चल रहे विवाद में हर दिन नए मोड़ नजर आ रहे हैं। वहीं, अब देश भर से भाजपा के कई नेताओं ने ट्विटर, फेसबुक में आयुर्वेद के समर्थन में अभियान छेड़ा हुआ है। इसमें ठीक उसी तरह एलोपैथ के बहिष्कार की बात की जा रही है, जैसे पिछले साल चीन के उत्पादों के बहिष्कार की बात की जा रही थी। आपको याद होगा कि टिकटाक जैसे ऐप बंद कर दिए गए थे। ये अलग बात है कि अब कोरोनाकाल में चीन से ही उपकरण मंगवाए जा रहे हैं। उपकरण भी उस वुहान से लाए जा रहे हैं, जहां से कोरोना शुरू होकर पूरे विश्व में फैला था।
अब इसी तर्ज पर एलोपैथी के बहिष्कार के संदेश सोशल मीडिया में डालने वाले ऐसे ऐसे नेता शामिल हैं, जो कोरोना या किसी अन्य बीमारी में सीधे अस्पताल जाकर एलोपैथ पद्धति की सेवाएं जरूर लेते होंगे। अब सोशल मीडिया में एलोपैथी को ऐसे प्रचारित किया जा रहा है, जैसे ये पद्धति दुश्मन हो। ऐसे में साफ नजर आ रहा है कि इस विवाद को जानबूझकर उलझाया जा रहा है। ताकी लोग कोरोना के टीकों की कमी पर सवाल न पूछें और ऐसे अनावश्यक विवाद में उलझकर रह जाएं। क्योंकि देशभर में कोरोना के टीकों का अकाल पड़ा हुआ है। कोरोना को जड़ से मिटाने का सिर्फ एक ही उपाय है कि हर नागरिक को टीका लगे। ऐसे सवालों की बजाय विवादित बयानों और अभियान से लोगों का ध्यान हटाने की मुहीम सी चल पड़ी है। हालांकि आयुर्वेद, एलोपैथी और होम्योपैथी तीनों ही पद्धति का अपना अपना महत्व है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) और फार्मा कंपनियों से 25 सवाल पूछने के बाद वीरवार 27 मई को योगगुरु बाबा रामदेव ने एलोपैथी पर फिर से यू-टर्न लिया है। उनके हवाले से पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि योगगुरु ने कभी भी एलोपैथी का विरोध नहीं किया। उनकी आपत्ति आइएमए के कार्य व्यवहार और अनर्गल आरोपों पर है। कहा कि, उन्हें आइएमए से सवालों के जवाब का इंतजार है। यह भी स्पष्ट किया कि आइएएमए के नोटिस का जवाब नोटिस के माध्यम ही दिया जाएगा।
आचार्य बालकृष्ण ने बातचीत में कहा कि योगगुरु बाबा रामदेव ने कभी भी किसी चिकित्सा पद्धति का विरोध नहीं किया और ना ही उसे गलत साबित किया। रोग के प्रबल अवस्था में होने की दशा में उसके फौरी उपचार के लिए एलोपैथी के इस्तेमाल करने हमने कभी आपत्ति नहीं की। तमाम मौकों पर हम भी यही सलाह देते हैं। इस स्थिति से बाहर निकलने के बाद जिंदगी भर एलोपैथिक दवा खिलाते रहें, यह सही नहीं है।
आचार्य ने कहा कि, हम सभी चिकित्सा पद्धति और पैथियों का सम्मान करते हैं, इसका मतलब नहीं है कि कोई हमारा अपमान करे। हम इसे चुपचाप सहन नहीं कर सकते। बाबा रामदेव ने आइएमए के आयुर्वेद चिकित्सा को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान का विरोध किया है। आरोप लगाया कि आइएमए ने ऐसा करके राष्ट्र का अपमान किया है, राष्ट्रवादी भारतीयों का अपमान किया है। इसके लिए आइएमए को सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
आइएमए के एक हजार करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस के संदर्भ में उन्होंने सवाल किया कि आइएमए दो फीसद कोर्ट फीस के रूप में 20 करोड़ की रकम कहां से लाएगा। अलबत्ता, नोटिस का नोटिस के जरिये ही जवाब दिया जाएगा। आचार्य बालकृष्ण ने यह भी कहा कि बाबा रामदेव के हालिया बयानों को गलत संदर्भ में लिया गया है, इसके गलत अर्थ-निहतार्थ निकाले गए।
एलोपैथी का उड़ाया था मजाक
गौरतलब है कि आईएमए ने सोशल मीडिया पर उस वायरल वीडियो पर आपत्ति जताई थी, जिसमें रामदेव ने दावा किया है कि एलोपैथी ‘बेवकूफी भरा विज्ञान’ है। उन्होंने कहा था कि कोरोना के इलाज के लिए स्वीकृत रेमडेसिविर, फेवीफ्लू और ऐसी अन्य दवाएं कोविड-19 मरीजों का इलाज करने में असफल रही हैं।
बाबा रामदेव मोबाइल से पढ़कर बोल रहे थे। उनके इस बयान ने जब तूल पकड़ा तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एलोपैथी के बारे में योग गुरु रामदेव के बयान को रविवार को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया था। साथ ही इसे वापस लेने को कहा था। इसके बाद कहा गया कि बाबा रामदेव ने अपना बयान वापस ले लिया।
इसके बाद फिर पूछ डाले सवाल
फिर बाबा रामदेव ने फिर रंग बदला और ट्विटर अकाउंट में आइएमए को खुला पत्र जारी किया। उन्होंने आइएमए को चुनौती दी। साथ ही उनसे 25 सवाल पूछे और कई बीमारियों का स्थायी इलाज पूछा। अब उनके इस बयान से एक बार फिर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। गौरतलब है कि बाबा की ओर से एलोपैथ को लेकर दिए गए पूर्व के बयान पर उन्हें आइएमए ने नोटिस भी भेजा है।
पहले ऑक्सीजन की कमी को लेकर आया था बयान
इससे पहले भी बाबा रामदेव विवादों में आए। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें बाबा रामदेव कह रहे थे कि-चारों तरफ ऑक्सीजन ही ऑक्सीजन का भंडार है, लेकिन मरीजों को सांस लेना नहीं आता है और वे नकारात्मकता फैला रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी है। रामदेव ने कहा था कि जिसका भी ऑक्सीजन स्तर गिर रहा है उसे ‘अनुलोम विलोम प्रामायाम’ और ‘कपालभाती प्राणायाम’ करना चाहिए। बाबा रामदेव की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के उपाध्यक्ष डॉ. नवजोत सिंह दहिया ने शनिवार को जालंधर पुलिस में केस दर्ज कराया और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नए वीडियो से फिर विवाद में आए थे रामदेव
नए वीडियो में बाबा रामदेव आइएमए के मानहानि के नोटिस पर प्रतिक्रया देते दिख रहे हैं। बकौल बाबा-ट्रेंड चला रहे हैं कि क्विक अरेस्ट स्वामी रामदेव। कभी कुछ चलाते हैं, कभी ठग रामदेव, कभी महाठग रामदेव, कभी गिरफ्तार रामदेव चलाते रहते हैं। चलाने दो। इसका उपहास उड़ाते हुए वह पतंजलि कार्यकर्ताओं को बधाई दे रहे हैं कि इस कारण अब अपने लोगों को भी ट्रेंड चलाने की प्रैक्टिस हो गई। बाबा यहां तक कहते सुनाई दे रहे हैं कि- खैर! अरेस्ट तो उनका बाप भी नहीं कर सकता स्वामी रामदेव को।’
विवाद को आचार्य बालकृष्ण ने ईसाइयत से जोड़ा था
आयुर्वेद बनाम एलोपैथ को लेकर हो रहे विवाद को योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने नया मोड़ दे दिया था। आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट कर इसे देश के भीतर चल रहे ईसाई मंतातरण से जोड़ा है। वह चिंता जताते हुए कहते हैं कि देश में ईसाइयत को बढ़ावा देने के साथ ईसाई बनाने की साजिश रची जा रही है। इसी के तहत बाबा रामदेव को निशाना बनाया जा रहा है, योग और आयुर्वेद को बदनाम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस मामले में गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो यह साजिश सफल हो जाएगी। जो ताकतें ऐसा कर रही हैं, उन्हें रोकना होगा। वह आगे कहते हैं, ‘पूरे देश को क्रिश्चियनिटी में कनवर्ट करने के षडयंत्र के तहत योग ऋषि रामदेव को टारगेट कर योग एवं आयुर्वेद को बदनाम किया जा रहा है।
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