June 16, 2021

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कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर स्टेट टास्क फोर्स अलर्ट, पहली बैठक में बच्चों के बचाव की रणनीति

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उत्तराखंड में कोविड महामारी के दौरान संभावित तीसरी लहर की तैयारियों के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक तैयारियां आरम्भ कर दी गयी हैं। उत्तराखंड शासन की ओर से गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक में बच्चों में संक्रमण एवं महामारी के संभावित खतरों से बचाव के लिए अपनायी जाने वाली रणनीति को लेकर चर्चा की गई।


उत्तराखंड में कोविड महामारी के दौरान संभावित तीसरी लहर की तैयारियों के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक तैयारियां आरम्भ कर दी गयी हैं। उत्तराखंड शासन की ओर से गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक में बच्चों में संक्रमण एवं महामारी के संभावित खतरों से बचाव के लिए अपनायी जाने वाली रणनीति को लेकर चर्चा की गई।
स्वास्थ्य महानिदेशालय एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से इस महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में टास्क फोर्स के सभी सदस्यों ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। ज्ञातव्य है कि कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए एवं राजकीय अस्पतालों तथा प्राईवेट अस्पतालों में महामारी के दौरान आपसी तालमेल बनाने और उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं, उपकरणों की आपूर्ति, मानव संसाधन की उपलब्धता, प्राथमिक स्तर से उच्च स्तर पर रैफरल की व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुगा ने 24 मई को स्टेट टास्क फोर्स का गठन किया था।
यह टास्क फोर्स एचाएनायी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. हेन चन्द्रा की अध्यक्षता में बनायी गयी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सरोज नैथानी को टास्क फोर्स का सदस्य सचिव नामित्तकरते हुये कुल 21 सदस्यों को टास्क फोर्स में रखा गया है। टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य संभावित तीसरी लहर के दौरान उपचार एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए राज्य सरकार को सुझाव देना एवं निर्धारित एसओपी तैयार करना है। ताकि महामारी में उपचार के बारे में समुचित मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ० हेम चन्द्रा की अध्यक्षता में स्टेट टास्क फोर्स की पहली बैठक में निग्न बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इन बिंदुओं पर की गई चर्चा
– कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए पब्लिक हेल्थ रिस्पान्स कार्ययोजना क्या होगी और उसे किस प्रकार से अमल में लाया जायेगा, ताकि बच्चों में संक्रमण को रोका जा सके।
-कितने बच्चों के संक्रमित होने संभावना है तथा कितने बेड की आवश्यकता होगी, जिसमें आईसीयू बेड, आक्सीजन बेड तथा आईसोलेशन बेड सम्मिलित किये गये हैं।
-ऐसे बेसिक उपकरण एवं दवाईयां, जिनकी महामारी के दौरान उपचार के लिए आवश्यकता रहेगी, जिसमें विशेष तौर पर बच्चों के वेन्टीलेटर्स एवं अन्य उपकरण की आवश्यकता महत्वपूर्ण है।
-प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र / सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र/जिला चिकित्सालय/प्राईवेट अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज स्तर पर देखभाल एवं उपचार का क्या प्रोटोकॉल रहेगा, ताकि संकमण से बचाया जा सके।
-उपचार के दौरान सरकारी एवं निजी अस्पतोलों को उपलब्धता को देखते हुए के अस्पतालों को कलस्टर एवं संमन्वित संसाधन किस प्रकार से उपयोग में लिये जायेगे, ताकि उन जनपदों के बच्चों को उपचार मिल सके, जहां पर समुचित सुविधायें नहीं है।
ये दिया सुझाव
टास्क फोर्स के अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. हेम चन्द्रा ने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए हमे सर्वप्रथम बच्चों में मास सप्लीमेन्टेशन (आरम्भिक स्तर पर पूरक उपचार) को आरंभ करना होगा। इसमें जिंक एवं विटामिन-डी की खुराक दिये जाने पर एसओपी तैयार कर इसको अमल में लाये जाने की रणनीति के अनुसार कार्य
किया जाय। चन्द्रा ने कहा कि बच्चों को संक्रमण से लड़ाई के लिए उनकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किए जाने के बारे में सर्वप्रथम कार्य करने की आवश्यकता है।
सभी बाल रोग विशेषज्ञ करें सहयोग
प्रो. हेम चन्द्रा ने सभी निजी चिकित्सकों एवं बाल रोग विशेषज्ञों से अनुरोध किया कि वे मिलकर उत्तराखंड के बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर चितंन करें एवं समन्वित प्रयास से उपचार की कारगर रणनीति बनाने में सहयोगी बने। उन्होनें बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए प्रोफाईलैक्सिस की रणनीति के लिए प्रभावी एसओपी बनाने में आईसीएमआर, डब्ल्यूएचओ एवं अन्य संस्थाओं के सुझाव भी प्राप्त करने के बारे में कहा।
उत्तराखंड में बच्चों की संख्या
उत्तराखण्ड में बच्चों की आबादी के बारे में जानकारी देते हुए इसकी सदस्य सचिव एवं निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि उत्तराखण्ड में 0-9 वर्ष के बच्चों की संख्या 2258790 है, जबकि 10-19 वर्ष के कुल 2906337 बच्चे राज्य में है। डॉ. नैथानी के अनुसार दिसम्बर 2020 से 2021 के दौरान कोविड संकमण से ग्रसित बच्चों की आबादी 10-17 वर्ष आयु वर्ग में देखी गयी है, जो लगभग 25 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि बच्चों में कोविड न्यूमोनिया बड़ों की तुलना में साधारण नहीं है और गंभीर कोविड न्यूमोनिया के मामले बच्चों में नहीं देखें गये हैं।
संभावना के मद्देनजर तैयारी पर जोर
रुड़की के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अशांक ऐरन के अनुसार कोविड-19 की तीसरी लहर कितनी गम्भीर होगी और बच्चों को कितनी अधिक संक्रमित करेगी, इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए संभावना के आधार पर हमे अपनी तैयारियों के अनुसार कार्य करते रहना चाहिए। सामान्य जनमानस में अनावश्यक भय उत्पन्न नहीं होने देना है। डॉ. ऐरन के अनुसार अधिकांश बच्चे कोरोना की दूसरी लहर
में स्वयं प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर स्वस्थ हुए है।
वैक्सीनेशन पर जोर
निजी क्षेत्र के बाल रोग विशेषज्ञों ने बच्चों को कोविड वैक्सीन की भी वकालत की और कहा कि हमें सभी बच्चों को वैक्सीन की दो डोज शीघ्र दिये जाने पर तुरन्त प्रभावी रणनीति के अनुसार कार्य करना होगा। विशेषज्ञों ने बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने संबंधित दवाईयों को भी शुरू किये जाने के बारे में चर्चा की।
स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण का सुझाव
टास्क फोर्स की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के समस्त सरकारी एवं निजी क्षेत्र के अस्पतालों में कार्यरत हैल्थ केयर प्रोवाईडर्स तथा मेडिकल आफिसर्स को बच्चों की देखभाल एवं उपचार के बारे में एक मूलभूत प्रशिक्षण दिया जायेगा, ताकि महामारी की स्थिति में वेन्टीलेटर्स का संचालन, आईसीयू में बच्चों की देखभाल तथा अन्य परिस्थितियों में उपचार को निर्धारित गाईडलाईन एवं प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा सके। उपचार के दौरान बच्चों को उच्च स्तरीय चिकित्सालयों तक रेफर किये जाने के लिए सरकारी एवं निजी अस्तपालों के लिए एक समान रैफरल की समुचित व्यवस्था निर्धारित की जाय। रैफरल ट्रांसपोर्ट से एम्बुलेंस के चालक एवं ईएमटी को भी प्रशिक्षित किया जायेगा।
ये रहे उपस्थित
स्टेट टास्क फोर्स की बैठक में प्रमुख रूप से पूर्व महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, जौलीग्रांट मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. गिरीश गुप्ता, हरिद्वार से डॉ. सुधीर चौधरी, काशीपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ रवि सहोता, एचआईएचटी बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. अल्पा गुप्ता, रुड़की से डॉ. अशांक ऐरन, डब्ल्यूएचओ के डॉ. विकास शर्मा, दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार आदि उपस्थित हुए।

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