June 15, 2021

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी रास बिहारी बोस की 135वीं जयंती मनाई, जानिए उनके जीवन के बारे में

1 min read
वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की ओर से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी रास बिहारी बोस का 135 वां जन्मदिवस मनाया गया।

वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की ओर से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी रास बिहारी बोस का 135 वां जन्मदिवस मनाया गया। ऑनलाइन मोड में आयोजित कार्यक्रम में एएस रावत महानिदेशक भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून एवं निदेशक वन अनुसंधान संस्थान देहरादून ने मुख्य अतिथि के रूप मौजूद रहे।
इस अवसर पर एएस रावत ने अपने जानकारी दी कि स्व. श्री रास बिहारी बोस का भारतीय क्रांतिकारियों में प्रमुख स्थान है जिन्होंने अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 25 मई, 1886 को हुआ था। उनकी प्रारभिक शिक्षा अपने दादाजी की देखरेख में हुई। 1789 की फ्रांस क्रांति का रास बिहारी पर गहरा प्रभाव पड़ा।
बिहारी जी का देहरादून, उत्तराखंड में आगमन प्रमंथा नाथ टैगोर के आवास में गृहशिक्षक के रूप में हुआ। उन्होंने अपना कुछ समय वन अनुसंधान संस्थान में बिताया तथा वे घोसी गली, पल्टन बाजार देहरादून में भी रहे। देहरादून की गलियां, यहां का राजा पीएन टैगोर गार्डन तथा वन अनुसंधान संस्थान आदि उनके पसंदीदा स्थान रहें।
क्रांतिकारी दल के बंगाल शाखा ने उन्हें भारतीय सेना के सदस्यों को क्रांतिकारी पंथ में परिवर्तित करने के उद्देश्य से देहरादून भेजा। रास बिहारी ने खुद को सेना में भर्ती करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में काम किया। उन्होंने बंगाल और पंजाब के क्रांतिकारी नेताओं के साथ निकट संपर्क बनाए रखा। एफआरआई में नौकरी उनके लिए बम बनाने की अपनी योजनाओं को अंजाम देने और उन जगहों से क्रांतिकारी आंदोलन को निर्देशित करने के लिए उपयोगी थी। इन पर सरकार को संदेह नहीं हो सकता था और आसानी से पता नहीं चल सकता था।
उन्होंने बताया कि जब वे एफआरआई में लिपिक के रूप में काम कर रहे थें, उन्होंने 1912 में लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंग की हत्या के साजिश के लिए 37 दिन की छुट्टी ली। जब तक अंग्रेजों को एहसास हुआ कि साजिश का मास्टरमाइंड कौन था, वे जापान भाग गए। यहाँ उल्लेख करना है कि उन्होंने 4 सितंबर 1906 को एफआरआई में कार्यग्रहण किया और बाद में 65 रुपये के वेतन पर हेड क्लर्क के पद पर पदोन्नत हुए। मई 1914 में लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के आधार पर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। वर्तमान में एफआरआई परिसर में एक सड़क का नाम रास बिहारी बोस के नाम पर रखा गया है।
आयोजित की गई कई प्रतियोगिताएं
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए ऑनलाइन भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें मांसी सिंघल, सुधान सिंह, साची पांडे ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्राप्त किए। स्कूली बच्चों की श्रेणी में पोस्टर प्रतियोगिता में सेंट पैट्रिक अकादमी देहरादून की आठवीं कक्षा की छात्रा शाम्भवी ने प्रथम पुरस्कार, एन मेरी स्कूल देहरादून की दसवीं कक्षा की छात्रा नव्या भंडारी ने द्वितीय और कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल की बारहवीं कक्षा की छात्रा दीक्षा उनियाल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पोस्टर प्रतियोगिता में विश्वविद्यालयी श्रेणी में वन अनुसंधान संस्थान सम विश्वविद्यालय के सचिन कुमार और गरिमा कुमारी ने प्रथम और द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की नितिका बंसल को तीसरा पुरस्कार दिया गया।
इस मौके पर एन. बाला, प्रमुख, वन पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण प्रभाग और डॉ. विजेंद्र पंवार, समन्वयक एनविस सेंटर, वन अनुसंधान संस्थान ने ऑनलाइन समारोह को सफल बनाने के लिए सभी अधिकारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों, शोधार्थियों एवं छात्रों को धन्यवाद ज्ञापन किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *