June 15, 2021

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भारत में कोरोना वैक्सीन की कमी के बीच अब टीके की दूसरी डोज में ज्यादा अंतर बढ़ाने की सिफारिश

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अब कोविशिल्ड वैक्सीन के टीकाकरण की पहली और दूसरी डोज के बीच के अंतर को बढ़ाने की सिफारिश कर दी गई है।

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के बीच जो हो रहा है वो ठीक नहीं हो रहा है। अस्पतालों में व्यवस्था नहीं। श्मशानघाटों में जगह नहीं। मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। महामारी रोकने के लिए एकमात्र उपाय टीकाकरण में भी संकट के बादल छा रहे हैं। अब कोविशिल्ड वैक्सीन के टीकाकरण की पहली और दूसरी डोज के बीच के अंतर को बढ़ाने की सिफारिश कर दी गई है।
कोरोना के टीकारण का अभियान उस गति से नहीं चल पा रहा है, जितनी बढ़चढ़कर घोषणा की गई थी। अब तो राज्यों के पास टीके समाप्त होने लगे हैं। ऐसे में चिंता इस बात की होने लगी कि लोगों को दूसरी डोज लगाई जाए या फिर 18 साल से लेकर 44 साल तक के लोगों का भी टीकाकरण जारी रखा जाए। इसी उहापोह में केंद्र ने राज्यों को ज्यादा टीके देने से हाथ खड़े कर दिए। साथ ही राज्यों से सीधे टीके खरीदने को कहा है।
अब दिक्कत ये है कि भारत में टीका तैयार करने वाली दोनों ही कंपनी बगैर केंद्र की सिफारिश के किसी को टीके देने को तैयार नहीं है। अब सिर्फ एकमात्र विकल्प विदेशों से कोरोना वैक्सीन आयात करने का है। अब इसके रेट भी बहुत ज्यादा हैं। यदि राज्य सरकारें फ्री टीका नहीं लगाती या फिर कीमतों में छूट नहीं देती, तो आने वाले समय में लोगों को टीके लगाने के लिए भारी कीमत अदा करनी पड़ सकती है। यानी जिसकी जेब में पैसा होगा, जो जान बचा सकेगा। बाकी लोगों की रक्षा भगवान करेगा।
अब टीकों की किल्लत के बीच एक और खबर आ रही है। इसमें वैक्सीनेशन के दूसरी डोज का अंतर बढ़ाने की सिफारिश की गई है। भारत में कोरोनावायरस के खिलाफ चल रहे वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत दो वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन है। इन दोनों ही वैक्सीन की दो-दो डोज दी जा रही हैं। कई राज्यों में वैक्सीन की कमी आ रही है। तीसरा चरण शुरू हो जाने के बाद भी कई राज्यों में 18 से 44 साल के लोगों में वैक्सीनेशन शुरू नहीं हो पाया है। इस बीच खबर आई है कि एक सरकारी पैनल ने कोविशील्ड के दो डोज़ के बीच के अंतर को बढ़ाने की सिफारिश की है।
सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतर बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने की सिफारिश की। कोवैक्सीन की खुराकों के लिए बदलाव की अनुशंसा नहीं की। कोविशील्ड के डोज़ के बीच में अंतर की सिफारिश तब आ रही है, जब वैक्सीन की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन उत्पादन को लेकर संघर्ष कर रही है। मांग के मुताबिक, उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
तीसरी बार बढ़ाया जा रहा है अंतर
ऐसा पिछले तीन महीनों में तीसरी बार है, जब कोविशील्ड के डोज के बीच में अंतर बढ़ाया गया है। मार्च में केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा था कि वो बेहतर नतीजों के लिए 28 दिनों के अंतराल को बढ़ाकर 6-8 हफ्ते कर दें।
संक्रमण के बाद स्वस्थ होने पर छह माह तक टीका न लगाने की सलाह
वैसे इसके इतर एक और अहम जानकारी गर्भवती महिलाओं के वैक्सीनेशन को लेकर है। पीटीआई सूत्रों के मुताबिक- गर्भवती महिलाओं को कोविड-19 का कोई भी टीका लगवाने का विकल्प दिया जा सकता है। स्तनपान करवाने वाली महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद किसी भी समय टीका लगवा सकती हैं। सरकारी परामर्श समिति ने कहा कि कोविड-19 से पीड़ित रह चुके लोगों को स्वस्थ होने के बाद छह महीने तक टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए।

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