June 13, 2021

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दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट का संपादकीय-पीएम मोदी का ध्यान आलोचना दबाने में ज्यादा, कोविड नियंत्रण में कम

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दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने अपने एक संपादकीय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना कर डाली।


दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने अपने एक संपादकीय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना कर डाली। इसमें लिखा है कि पीएम का ध्यान ट्विटर पर अपनी आलोचना को दबाने पर ज्यादा और कोविड –19 महामारी पर काबू पाने पर कम है। जर्नल ने लिखा कि ऐसे मुश्किल समय में मोदी की अपनी आलोचना और खुली चर्चा को दबाने की कोशिश माफी के काबिल नहीं है।
अगस्त तक मौत का आंकड़ा पहुंच सकता है दस लाख
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के अनुमान के मुताबिक भारत में एक अगस्त तक कोरोना महामारी से होने वाली मौतों की संख्या 10 लाख तक पहुंच सकती है। लैंसेट के मुताबिक कोरोना के खिलाफ शुरुआती सफलता के बाद से सरकार की टास्क फ़ोर्स अप्रैल तक एक बार भी नहीं नहीं मिली।
नए सिरे से उठाने होंगे कदम
जर्नल के मुताबिक अभी तक लिए गए फैसले का नतीजा हमारे सामने है। अब महामारी बढ़ रही है और भारत को नए सिरे से कदम उठाने होंगे। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अपनी गलतियों को मानती है और देश को पारदर्शिता के साथ नेतृत्व देती है या नहीं। जर्नल के मुताबिक वैज्ञानिक आधार पर पब्लिक हेल्थ से जुड़े कदम उठाने होंगे। लैंसेट ने सुझाव दिया है कि जब तब टीकाकरण पूरी तेजी से नहीं शुरू होता, संक्रमण को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाने चाहिए।
उपलब्ध कराना चाहिए सटीक डेटा
जर्नल के अनुसार, जैसे जैसे मामले बढ़ रहे हैं, सरकार को समय पर सटीक डेटा उपलब्ध कराना चाहिए। हर 15 दिन पर लोगों को बताना चाहिए कि क्या हो रहा है और इस महामारी को कम करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। इसमें देशव्यापी लॉकडाउन की संभावना पर भी बात होनी चाहिए। जर्नल के मुताबिक संक्रमण को बेहतर तरीके से समझने और फैलने से रोकने के लिए जीनोम सीक्वेंसींग को बढ़ावा देना होगा।
स्थानीय स्तर पर उठाए जा रहे हैं कदम
जर्नल ने लिखा कि लोकल स्तर पर सरकारों ने संक्रमण रोकने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन ये सुनिश्चित करना की लोग मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, भीड़ इकट्ठा न हो, क्वारंटीन और टेस्टिंग हो। इन सब में केंद्र सरकार की अहम भूमिका होती है।
टीकाकरण में तेजी की जरूरत
जर्नल में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान में तेजी लाने की जरूरत है। अभी सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं वैक्सीन की सप्लाई को बढ़ाना और इसके लिए डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर बनाना जो कि गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को तक पहुंचे क्योंकि ये देश की 65 प्रतिशत आबादी हैं और इन तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचती। सरकार को लोकल और प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
वाहवाही लूटने का किया प्रयास, नजरअंदाज की गई दूसरी लहर
जर्नल में भारत के अस्पतालों की मौजूदा स्थिति और स्वास्थ्य मंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत महामारी के अंत की ओर जा रहा है। जर्नल के मुताबिक कुछ महीनों तक मामलों में कमी आने के बाद सरकार ने दिखाने की कोशिश की कि भारत ने कोविड को हरा दिया है। सरकार ने दूसरी लहर के खतरों और नए स्ट्रेन से जुड़ी चेतावनियों को नजरअंदाज किया।
होते रहे आयोजन और चुनावी रैली
संपादकीय के अनुसार, चेतावनी के बावजूद सरकार ने धार्मिक आयोजन होने दिए। इनमें लाखों लोग जुटे। इसके अलावा चुनावी रैलियां भी हुईं।
केंद्र स्तर पर टीकाकरण भी फेल
जर्नल में सरकार के टीकाकरण अभियान की भी आलोचना की गई। लैंसेट ने लिखा कि केंद्र के स्तर पर टीकाकरण अभियान भी फेल हो गया। केंद्र सरकार ने टीकाकरण को बढ़ाने और 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका देने के बारे में राज्यों से सलाह नहीं ली और अचानक पॉलिसी बदल दी जिससे सप्लाई में कमी हुई और अव्यवस्था फैली।
राज्यों का दिया उदाहरण
जर्नल के मुताबिक महामारी से लड़ने के लिए केरल और ओडिशा जैसे राज्य बेहतर तैयार थे। वो ज्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन कर दूसरे राज्यों की भी मदद कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं थे और इन्हें ऑक्सीजन,अस्पतालों में बेड और दूसरी ज़रूरी मेडिकल सुविधाओं यहां तक की दाह-संस्कार के लिए जगह की कमी से जूझना पड़ा। लैंसेट में लिखा गया कि कुछ राज्यों ने बेड और ऑक्सीजन की डिमांड कर रहे लोगों के खिलाफ देश की सुरक्षा से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल किया।
विपक्ष ने उठाए सवाल
लैंसेट की इस रिपोर्ट का हवाला देकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा-लैंसेट के संपादकीय के बाद, अगर सरकार में शर्म है, को उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के इस्तीफे की भी मांग की। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा-सरकार में ढिंढोरा पीटने वाले पहले लैंसेट की रिपोर्ट के संपादकीय का इस्तेमाल अपनी तारीफ के लिए कर चुके हैं।
भारत में लगातार पांचवे दिन नए संक्रमितों का आंकड़ा चार लाख के पार
भारत में कोरोनावायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को एक बार फिर 4 लाख से ज्यादा नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए। यही नहीं। एक दिन में हुई मौतों का आंकड़ा भी 4,000 के पार है। नौ मई की सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रजारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में बीते 24 घंटे में 403738 नए मामले सामने आए हैं और 4092 मरीजों की घातक वायरस की वजह से जान गई है।
शनिवार आठ मई को 401078 कोरोना संक्रमण के नए केस सामने आए थे, जबकि 4187 लोगों की मौत हुई थे। मौत का ये आंकड़ा सर्वाधिक है। शुक्रवार सात मई को सर्वाधिक 414188 नए केस आए सामने थे। ये अब तक की सर्वाधिक संख्या है। रविवार लगातार 17 वां दिन है, जब कोरोना संक्रमण के मामले 3 लाख से ज्यादा आए हैं। साथ ही पांचवी बार संक्रमितों का आंकड़ा चार लाख के पार हुआ है।

1 thought on “दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट का संपादकीय-पीएम मोदी का ध्यान आलोचना दबाने में ज्यादा, कोविड नियंत्रण में कम

  1. भारत माता की जय
    इस माहामारी में किसी की अलोचना करने के बजाए हमें एक दूसरे की मदद की ज़रूरत है ज़रूरी नहीं कि पैसे से ही मदद होती है आप अपने परमपिता से सब की तंदुरुस्ती की कामना कर सकते परमात्मा अपने बच्चों की सच्चे मन से की हुई प्रार्थना ज़रूर सुनते हैं क्योंकि हर कोई पैसा नहीं दे सकता आप मन वचन तथा क्रम से अपने घर पर बैठ कर सकरातमक वाईब्रेशन दे सकते हो वह वाईब्रेशन उस ज़रूरत मंद बंदे के पास ज़रूर पहुँचेगी
    🙏🙏

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