June 16, 2021

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे चौधरी अजीत सिंह का कोरोना से निधन, जानिए उनका राजनैतिक सफर

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कोरोना से संक्रमित राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह का गुरुग्राम के निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 22 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुए थे।

कोरोना से संक्रमित राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह का गुरुग्राम के निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 22 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुए थे। मंगलवार रात उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था।
जानकारी के मुताबिक उनके फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने के कारण उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। इलाज के दौरान उनके निधन की सूचना व्हाट्सएप, फेसबुक समेत विभिन्न सोशल मीडिया पर छा गई। गाजियाबाद राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष अजय चौधरी ने इसकी पुष्टि की है। रालोद कार्यकर्ताओं में अपने नेता के निधन से शोक व्याप्त है और यह अपने संदेशों के माध्यम से शोक जता रहे हैं। रालोद कार्यकर्ताओं में अपने नेता के निधन से शोक व्याप्त है और यह अपने संदेशों के माध्यम से शोक जता रहे हैं।
बता दें कि अजीत सिंह देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह के पुत्र थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चौधरी अजीत सिंह जाटों के बड़े नेता माने जाते थे। वह कई बार केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। पिछले 2 लोकसभा चुनाव और 2 विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय लोकदल का ग्राफ तेजी से गिरा। यही वजह है कि वह अपने गढ़ बागपत से भी लोकसभा चुनाव हार गए। अजीत सिंह के सुपुत्र जयंत चौथरी भी मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव हारे।
हालांकि, पंचायत चुनाव पर नजर डाले से रालोद अपना वोट बैंक दोबारा पाने में कुछ हद तक कामयाब होती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में रालोद-सपा गठबंधन ने प‌श्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को कांटे की टक्कर दी है। परिणाम आने के बाद पश्चिनी उत्तर प्रदेश के बागपत, मेरठ, शामली से लेकर अलीगढ़ और मथुरा तक में रालोद को जबरदस्त बढ़त और जीत मिली है। रालोद ने अन्य जिलों में सपा के साथ मिलकर जीत दर्ज की है।
जाटों के गढ़ बागपत में जिला पंचायत सदस्य पद पर रालोद ने 20 में से 07 वार्डों में जीत का झंडा फहराया है। वहीं, मेरठ में 6, शामली में रालोद को 5 सीटें मिली हैं। रालोद कार्यकर्ता इस जीत का जश्न मनाते, लेकिन पार्टी प्रमुख की मौत से वे निराश हैं।

उधर, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राष्ट्रीय लोक दल के नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। धस्माना ने चौधरी अजित सिंह को ग्रामीण भारत और किसान पृष्ठभूमि के नेता करार देते हुए कहा कि अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की तरह चौधरी अजित सिंह ने भी हमेशा किसानों व ग्रामीण भारत के मुद्दों पर मुखर होकर बोला।

उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय लोक दल के भूतपूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। धीरेंद्र प्रताप ने चौधरी अजीत सिंह को किसानों का सच्चा हितैषी बताते हुए कहा है उनके निधन से देशभर में किसानों की आवाज कुंद हो गई है। उन्होंने करीब 20 वर्ष चौधरी अजीत सिंह के साथ गुजारे और उन्हें इस पर गर्व है।

जीवन परिचय
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह का जन्म 12 फरवरी, 1939 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। लोकप्रिय जाट नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके अजीत सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय और आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं। सत्रह वर्ष अमरीका में काम करने के बाद चौधरी अजीत सिंह वर्ष 1980 में अपने पिता द्वारा स्थापित लोक दल को एक बार फिर सक्रिय करने के उद्देश्य से भारत लौटे थे। इनके परिवार में पत्नी राधिका सिंह और दो बच्चे हैं। अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए।
चौधरी अजीत सिंह का राजनैतिक सफर
वर्ष 1986 में राज्य सभा सदस्य के तौर पर संसद में प्रवेश करने वाले चौधरी अजीत सिंह सात बार लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं। 1987 में अजीत सिंह ने लोक दल (अजीत) नाम से लोक दल के अलग गुट का निर्माण किया। एक वर्ष बाद ही लोक दल (अजीत) का जनता पार्टी के साथ विलय कर दिया गया। चौधरी अजीत सिंह इस नव निर्मित दल के अध्यक्ष बनाए गए। जब जनता पार्टी, लोक दल और जन मोर्चा के विलय के साथ जनता दल का निर्माण किया गया तब चौधरी अजीत सिंह ही इसके महासचिव चुने गए।
विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में चौधरी अजीत सिंह 1989-90 तक केन्द्रीय उद्योग मंत्री रहे। नब्बे के दशक में अजीत सिंह कांग्रेस के सदस्य बन गए। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के काल में वर्ष 1995-1996 तक वह खाद्य मंत्री भी रहे। 1996 में कांग्रेस के टिकट पर जीतने के बाद वह लोकसभा सदस्य बने, लेकिन एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय किसान कामगार पार्टी का निर्माण किया।
अगले उपचुनावों में वह इसी दल के प्रत्याशी के तौर पर बागपत निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीते। 1998 में उन्हें हार देखनी पड़ी। 1999 में अजीत सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल का निर्माण किया। जुलाई 2001 के आम-चुनावों में इस दल का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार का निर्माण किया गया। अजीत सिंह को कैबिनेट मंत्री के तौर पर कृषि मंत्रालय का पदभार सौंपा गया। इसके बाद अजीत सिंह ने अपनी पार्टी को बीजेपी और बीएसपी के गठबंधन में शामिल कर लिया, लेकिन बीजेपी और बीएसपी के अलग होने से कुछ समय पहले ही अजीत सिंह ने अपनी पार्टी को बीएसपी से अलग कर लिया। इसके कारण बीएसपी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। मुलायम सिंह यादव के सत्ता में आने के साथ अजीत सिंह ने 2007 तक उन्हें अपना समर्थन दिया, लेकिन किसान नीतियों में मदभेद के चलते उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया। 2009 के चुनावों में उन्होंने एनडीए के घटक के तौर पर चुनाव लड़ा और वह पंद्रहवीं लोकसभा में चुने गए।

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