April 14, 2021

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उत्तराखंडः कोरोना से जंग के साथ ही सीएम तीरथ कामकाज के प्रति सजग, वर्चुअली संभाल रखी है कमान, शासन ने स्वास्थ्य विभाग में बदले दो पदनाम

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कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आइसोलेशन में रहते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत कोरोना से जंग लड़ने के साथ ही कामकाज के प्रति भी सजग नजर आ रहे हैं।


कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आइसोलेशन में रहते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत कोरोना से जंग लड़ने के साथ ही कामकाज के प्रति भी सजग नजर आ रहे हैं। वह बीजापुर सेफ हाउस से लगातार वर्चुअली शासकीय कामकाज कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि उनके संक्रमित होने का विकास कार्यों की प्रगति पर कोई प्रभाव न पड़े। कोरोना से जंग लड़ने के दौरान कामकाज करने की इस परंपरा की नींव कोरोनाकाल की शुरूआत से ही पड़ गई थी। मीडिया से जुड़े पत्रकार जब संक्रमित हुए तो कई पत्रकार अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी खबरें तैयार कर मोबाइल के जरिये अपने संस्थानों को लगातार भेजते रहे।
मंगलवार को मुख्यमंत्री ने विश्व मौसम विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आयोजित बैठक में वर्चुअली प्रतिभाग किया। इसमें उन्होंने भारत सरकार की मौसम की पूर्वचेतावनी सम्बन्धित परियोजनाओं को यथाशीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। ताकि इस परियोजनाओं का लाभ जनता को मिल सके। एक अन्य वर्चुअल बैठक में वन भूमि हस्तांतरण के लम्बित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने मामलों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
बीते सोमवार को कोविड-19 की जांच में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। तब से चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने खुद को बीजापुर सेफ हाउस में आइसोलेट किया है। आइसोलेट रहते हुए बीती शाम को उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की बैठक ली और जरूरी निर्देश दिए। आज मंगलवार को भी उन्होंने वर्चुअली अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। उनका मानना है कि संक्रमण की स्थितियों में एहतियात बरतना जरूरी है। यदि संभव है तो आइसोलेशन में रहते हुए भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाना चाहिए।
मंगलवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विश्व मौसम विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित बैठक में कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए उत्तराखंड में पूर्व चेतावनी प्रणाली सयंत्र स्थापित किए जाने चाहिए। इस सम्बंध में चल रही केन्द्र की परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए।
आपदा प्रबंधन मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि हमारा राज्य समय रहते हुए जन समुदाय को चेतावनी प्रदान करने पर शीघ्रता से काम कर रहा है। इसी क्रम में मुक्तेश्वर में डॉप्लर राडार संचालित हो चुका है तथा सुरकंडा मसूरी व लैंसडौन पौड़ी में शीघ्र ही डॉप्लर का कार्य शुरू किया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन विभाग एस ऐ मुरुगेसन ने बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन एवं मौसम विभाग उत्तराखंड के सौजन्य से राज्य के संवेदनशील इलाकों में 176 अर्ली वार्निंग वेदर स्टेशन लगाए गए हैं। जिनमें 107 ऑटोमैटिक वैदर स्टेशन, 25 सफेश फील्ड ऑब्जर्वेटरी, 28 रेन गेज, 16 स्नो गेज शामिल हैं। इनके माध्यम से रियल टाइम डाटा द्वारा मौसम पूर्व सूचनाओं के माध्यम से आपदा की स्थिती में त्वरित राहत कार्यों को सफलतापूर्वक  सम्पादित किये जाने में सहायता मिलेगी।
उधर वन भूमि हस्तांतरण के लम्बित प्रकरणों की समीक्षा बैठक करते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि वन भूमि हस्तांतरण के प्रकरणों के निस्तारण में अनावश्यक विलम्ब नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को लैंड बैंक शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद स्तर के वन भूमि हस्तांतरण के लंबित मामलों के निस्तारण हेतु सभी जिला अधिकारी नियमित बैठक आयोजित करें। उन्होंने प्रमुख सचिव वन को भी लंबित मामलों के निस्तारण हेतु अपने स्तर पर बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संबंधित विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए मामलों के निस्तारण को तेजी लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सड़कों निर्माण में तेजी लाने हेतु वन भूमि हस्तांतरण के मामलों को तेजी से निस्तारित किया जाए।

टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने पर दिया जोर
विश्व क्षय रोग दिवस के दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी ने इस बीमारी के संबंध में जनता को जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि टीबी रोग के प्रति लोगों में जानकारी का अभाव है और यह दिन टीबी से स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक टीबी महामारी को समाप्त करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि देश में टीबी फैलने का मुख्य कारण इस बीमारी के लिए लोगों का सचेत न होना और इसे शुरूआती दौर में गंभीरता से न लेना है। उन्होंने कहा कि टीबी किसी को भी हो सकता है, लेकिन नियमित दवा के सेवन से यह ठीक भी हो जाता है। उन्होंने कहा कि समाज को क्षय रोग से मुक्त करने में हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और निजी सेवा प्रदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए वे साधुवाद के पात्र हैं। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से अनुरोध किया कि अन्य लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने का संकल्प लें ताकि इसे जड़ से खत्म किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार 2025 तक टीबी को खत्म करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।


स्वास्थ्य विभाग में बदले दो पदनाम
उधर, शासन ने स्वास्थ्य विभाग में दो पदनामों को बदल दिया। इसमें उपचारिका /उपचारक का पदनाम बदलकर नर्सिंग अधिकारी, सिस्टर / वार्ड मास्टर का पदनाम बदलकर वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी कर दिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनुभाग के डा. पंकज पांडेय प्रभारी (सचिव) ने आदेश जारी किए। इसमें स्पष्ट किया गया कि पदनाम बदलने से वेतन भत्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

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