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April 17, 2021

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उत्तराखंड क्रिकेटः जिसने लगाए घोटाले के आरोप, उसी को हटा दिया पद से, तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, सरकार की जांच हवाई

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क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) में चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। सीएयू की पहली वार्षिक आमसभा में कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी को ही पद से हटा दिया गया। नेगी सीएयू में करोड़ों के घोटालों का आरोप लगाते आ रहे हैं।


क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) में चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। सीएयू की पहली वार्षिक आमसभा में कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी को ही पद से हटा दिया गया। नेगी सीएयू में करोड़ों के घोटालों का आरोप लगाते आ रहे हैं। वहीं, आमसभा में इसके ठीक उलट नेगी पर ही आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया। हालांकि नेगी सहित तीन सीएयू सदस्य पहले ही आमसभा को नियमों के विपरीत बताते हुए इसके बहिष्कार की घोषणा कर चुके थे और वे आमसभा में नहीं पहुंचे। वहीं, सीएयू की जांच के संदर्भ में खेल मंत्री का ऐलान भी हवाई साबित हो रहा है। अभी तक ये तय नहीं है कि जांच कौन करेगा।

मेहरा बनाए गए कोषाध्यक्ष
आमसभा में कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी पर ही आरोप लगाए गए और आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। साथ ही जांच पूरी होने तक नेगी को पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर सीएयू के काउंसलर दीपक मेहरा को कार्यकारी कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
सुभाष रोड स्थित एक होटल में सीएयू की प्रथम वार्षिक आम सभा (एजीएम) आयोजित की गई। एजीएम विगत वर्ष होनी थी, लेकिन कोरोना के चलते नहीं हो पाई थी। एजीएम में 54 सदस्यों में से 45 मौजूद रहे। सीएयू के कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी पर सदस्यों ने कई आरोप लगाए। आरोप है कि कोषाध्यक्ष ने लोकपाल की नियुक्ति को चैलेंज करते हुए बीसीसीआइ से शिकायत की थी। इसे बीसीसीआइ ने खारिज कर दिया था। इसके अलावा उन्हें अध्यक्ष ने कार्यालय में बैठकर कामकाज करने के आदेश दिए थे। इसकी उन्होंने अनदेखी की। साथ ही ऑनलाइन बैंकिंग की प्रक्रिया एसोसिएशन में लागू नहीं की गई। इसकी वजह से बिल पास होने में दिक्कतें पेश आईं।
इन सभी आरोपों के चलते सभी सदस्यों ने एकमत होकर कोषाध्यक्ष को हटाने की मांग की। साथ ही वीरेंद्र सिंह दीवान की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है। इसमें राजीव दत्ता व नीनू सहगल को बतौर सदस्य शामिल किया गया। सीएयू के कानूनी सलाहकार वीवीएस नेगी कमेटी को सहयोग करेंगे। डेढ़ माह के भीतर कमेटी जांच में सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके अलावा एजीएम में 12 मुद्दों पर चर्चा हुई। एजीएम में उत्तराखंड में होने वाले गोल्ड कप के लिए 20 लाख रुपये की राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई। एजीएम में अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला, सचिव महिम वर्मा, काउंसलर दीपक मेहरा, सदस्य धीरज खरे, रोहित चौहान आदि मौजूद रहे।
लोकपाल की शिकायत करना पड़ा भारी
सीएयू के कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी को सीएयू के लोकपाल की नियुक्ति को लेकर बीसीसीआइ से शिकायत करना भारी पड़ गया। बीसीसीआइ ने उनकी शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके अलावा सदस्यों ने लोकपाल को पेमेंट न देने की शिकायत की थी। इस पर लोकपाल ने अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष को सात दिन के भीतर पेमेंट करने के निर्देश दिए, लेकिन कोषाध्यक्ष का सहयोग नहीं मिलने से ऐसा नहीं हो सका।
तीन पदाधिकारियों ने किया आमसभा का बहिष्कार
क्रिकेट एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के उपाध्यक्ष संजय सिंह रावत, कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी, सहसचिव अवनीश वर्मा ने सीएयू की आमसभा के बहिष्कार की घोषणा दो दिन पहले ही कर दी थी। इस संबंध में उन्होंने अध्यक्ष को हस्ताक्षरयुक्त पत्र देकर सूचित किया थी। बताया कि हमने फरवरी में पत्राचार से अवगत कराया था कि एपेक्स काउंसलिंग की बैठक करानी आवश्यक है। इसके बावजूद बैठक नहीं कराई गई और आमसभा आयोजित की जा रही है। तीन पदाधिकारियों के अनुमोदन पर बैठक न कराना संविधान का उल्लंघन है। संस्था में वित्तीय संबंधी अनियमितताएं हैं। इसे एपेक्स काउंसलिंग के समक्ष रखा जाना जरूरी था। इसके बाद आमसभा कराई जाती। इस परिस्थितियों में वार्षिक आमसभा न्यायोचित नहीं है। ऐसे में वे आम सभा का बहिष्कार कर रहे हैं।
हटाए जाने पर बोले पूर्व कोषाध्यक्ष
पद से हटाए गए सीएयू के पूर्व कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी ने बताया कि उन पर बीसीसीआइ से सीएयू की शिकायत के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मैने बीसीसीआइ को शिकायत नहीं की। 15 जुलाई 2020 को सीएयू अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला को वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में पत्र लिखा था। इसकी प्रतिलिपि बीसीसीआइ को भेजी गई थी। पत्र में उन्होंने अध्यक्ष से नियमों के अनुरूप कार्य कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि 4.5 करोड़ के जो भुगतान किए गए हैं, उमें कोषाध्यक्ष के नाते उनके हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए। वहीं, इनमें बीसीसीआइ के बेंडर नाममात्र के हैं, अधिकांश देहरादून के ठेकेदार हैं। उन्होंने एपेक्स काउंसिल की बैठक कराने का अनुरोध किया था। साथ ही ये अधिकार कोषाध्यक्ष का है कि वह बैंकिंग की कौन की सुविधा को अपनाना चाहता है।
काफी समय से चल रहा है सीएयू में घमासान
उत्तराखंड में क्रिकेट को विवाद काफी समय से चल रहा है। पहले मुख्य कोच वासिम जाफर का इस्तीफा, फिर कई संगठनों की ओर से धांधली की शिकायतों के बीच खेल मंत्री का घोटालों की सचिव स्तर के अधिकारी से जांच का ऐलान किया गया था। क्रिकेट एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के कुछ पदाधिकारी ही अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ बगावत पर उतरे हुए हैं। आरोप है कि अध्यक्ष और सचिव ने कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर के बगैर ही 4.50 करोड़ का भुगतान कर दिया। वहीं, मुख्य कोच वासीम जाफर ने भी सचिव पर खिलाड़ी चयन में मनमानी सहित कई आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
ये लगे हैं ताजा आरोप
ताजा आरोप एसोसिएशन की आम सभा से 2 दिन पहले लगा। सीएयू के ही तीन सदस्यों ओपी सूदी, रोहित चौहान और तेजेन्द्र सिंह रावत ने रजिस्ट्रार (चिट एंड फर्म सोसायटीज) को पत्र सौंप कर सारे गंभीर आरोपों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की।
करोड़ों के घोटाले का आरोप
पत्र में साफ लिखा है अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और सचिव महिम वर्मा शुरू से ही अनियमितताएँ कर रहे हैं। महिम 23-10-19 से 7-3-20 तक माहिम BCCI में उपाध्यक्ष की कुर्सी पर थे। तब सचिव के सारे अधिकार गुनसोला ने खुद ही ले लिए। इस अवधि में अध्यक्ष ने 4.50 करोड़ रुपए के भुगतान खुद ही कर दिए। इसके लिए न कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी के दस्तखत पत्रवालियों में कराने की जरूरत महसूस की, न ही प्रबंध कार्यकारिणी की ही मंजूरी ली।
नियुक्ति पर भी लगाए आरोप
संस्था के नियमावली के मुताबिक बिना कोषाध्यक्ष के दस्तखत के कोई भी वित्तीय लेन-देन नहीं किया जा सकता है। अध्यक्ष-सचिव इसका घोर उल्लंघन कर रहे हैं। संस्था में किसी भी नियुक्ति का अधिकार एपेक्स काउंसिल के पास है। महिम ने CEO-कोच-मैनेजर-फिजियो और नए पदों पर नियुक्तियाँ खुद ही कर दी।
इसके लिए किसी भी किस्म की मंजूरी कहीं से नहीं ली गई। माहिम ने कई नियुक्तियाँ तब भी की, जब वह सचिव भी नहीं थे। सह सचिव थे। उनको नियुक्ति करने का अधिकार कहीं से नहीं मिला था। महिम पर निजी जानकारियाँ रजिस्ट्रार को देते वक्त भी जालसाजी का आरोप रजिस्ट्रार को दिए पत्र में लगाया गया है।
सचिव पर लगाए ये आरोप
पत्र में कहा गया कि सचिव महिम उपनल के ठेका कर्मी थे। उन्होंने रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा दस्तावेज में खुद को राजपत्रित अधिकारी दर्शाया है। ये बात अलग है कि BCCI-CAU में कोई भी सरकारी कर्मचारी सदस्य तक नहीं हो सकता। महिम सदस्य भी नहीं बन सकते हैं। गुनसोला-महिम पर मिलीभगत कर मनमाने फैसले करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायती पत्र में कहा गया है कि संस्था में हर फैसले मौखिक रूप से किए जा रहे हैं। कोई भी कार्यवाही पुस्तक-रजिस्टर में दर्ज नहीं की जा रही। आय-व्यय का हिसाब तक Deputy Registrar कार्यालय में जमा नहीं कराए गए हैं। 3 साल हो गए, आम सभा नहीं बुलाई गई।
उत्तराखंड सरकार कर चुकी है जांच का ऐलान
विवाद के चलते उत्तराखंड क्रिकेट के मुख्य कोच एवं भारत के पूर्व क्रिकेटर वासीम जाफर ने पद से इस्तीफा दे दिया था। तब सीएयू सचिव महिम वर्मा ने मुख्य कोच वासीम जाफर को क्रिकेट मैदान में नमाज पढ़ने के आरोप लगा दिया था। इस पर बवाल हुआ तो सचिव अपने बयान का खंडन करना पड़ा था। त्रिवेन्द्र सरकार के दौरान गैरसैण में काँग्रेस विधायक करण माहरा के सवाल उठाए जाने पर खुद खेल मंत्री ने CaU के खिलाफ सरकारी जांच का ऐलान किया था।
सरकार पर भी लग रहे हैं आरोप
अभी तक सचिव स्तर के IAS जांच अधिकारी तक सरकार तय नहीं कर पाई है। सरकार पर ये आरोप लग रहे हैं कि क्या वह केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डर से CaU के खिलाफ जांच को ठंडे बस्ती में डाल सकती है। अमित शाह के पुत्र जय शाह बीसीसीआइ में सचिव हैं। हालांकि बीजेपी के ही कई दिग्गज नेताओं ने जय शाह के कारण जांच न होने की संभावना को खारिज कर दिया। उनके मुताबिक जय इस तरह के घोटालों-धांधलियों के आरोपों में शरीक लोगों को बचा के अपने से अधिक पिता और बीजेपी का नाम कभी खराब नहीं होने देंगे।
दूसरे राज्यों में खेलने जाएंगे उत्तराखंड के खिलाड़ी
अब बीसीसीआइ के घरेलू सत्र के अलावा भी प्रदेश के खिलाड़ी अन्य राज्यों में मैच खेलने जाएंगे। सचिव महिम वर्मा ने एजीएम में यह प्रस्ताव रखा। पत्रकारों से बातचीत में सीएयू के सचिव महिम वर्मा ने कहा कि इस सत्र से हम प्रदेश की टीमों को दूसरे राज्यों में भी खेलने भेजेंगे। इसके लिए इंटर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट टूर्नामेंट से 50 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। जिनमें से टी-20, वनडे और टेस्ट की टीमें बनाई जाएंगे। जिन्हें केरल, गुजरात, चंडीगढ़ व अन्य राज्यों के टूर्नामेंट में प्रतिभाग करने के लिए भेजा जाएगा। इससे खिलाड़ी बीसीसीआइ के घरेलू सत्र के लिए तैयार होंगे।
जिला संघों को किया जाएगा मजबूत
सीएयू अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला ने कहा कि सीएयू से संबद्ध सभी जिला संघों को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी तीन से चार वर्ष तक कार्य करेगी। कमेटी का कार्य जिला संघों की जरूरत के अनुसार उनके लिए ग्रांट तैयार करना होगा। जिला संघों के टूर्नामेंट में सीएयू गेंद निश्शुल्क उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा कुमाऊं में सीएयू का ऑफिस खोलने को लेकर भी चर्चा की गई।
खिलाड़ियों का हित प्राथमिकता: दीपक मेहरा
सीएयू के कार्यकारी कोषाध्यक्ष बने दीपक मेहरा ने कहा कि बतौर कोषाध्यक्ष खिलाड़ियों का हित सर्वोपरि रहेगा। प्रदेश में क्रिकेट को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किए जाएंगे। पेमेंट में देरी से सीएयू की छवि पर असर पड़ा है। उसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा।

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