April 14, 2021

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ग्राफिक एरा में आठ महिलाएं सम्मानित, धाद ने शायर साहिर लुधियानवी को किया याद

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महिला दिवस पर ग्राफिक एरा ने समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने पर आठ मातृशक्ति को सम्मानित किया। वहीं, धाद संस्था ने महिला दिवस मनाने के साथ ही शायर साहिर लुधियानवी को याद किया।


महिला दिवस पर ग्राफिक एरा ने समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने पर आठ मातृशक्ति को सम्मानित किया। वहीं, धाद संस्था ने महिला दिवस मनाने के साथ ही शायर साहिर लुधियानवी को याद किया।
ग्राफिक एरा में आइएएस नितिका खंडेलवाल समेत प्रिंसीपल कन्ट्रोलर डिफेन्स एकाउन्टस (इण्डियन एयरफोर्स) अलका शर्मा, पूर्व एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिशनर सुनिता सिंह, प्रिंसीपल सेंट जूड्स वायोलेट गार्डनर, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश की साध्वी भगवती सरस्वती, शहर की जानी मानी ग्यानोकोलोजिस्ट डा. अर्चना लूथरा, आरजे देवांगना और समाज सेविका माधुरी सहस्त्रबुद्धा को विभिन्न क्षेत्रों में महत्पूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
देहरादून में ग्राफिक एरा डीम्ड युनिवर्सिटी और ग्राफिक एरा हिल युनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस समारोह में सम्मानित आइएएस एवं कार्यकारी जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने कहा कि महिलाओं को अपनी सफलता के लिए रास्ता खुद चुनना चाहिये। अब सोच बदलने का वक्त आ गया है। यह सोच बदलनी होगी की बाहर के काम करा ही पुरूष की जिम्मेदारी है।
घर के काम करने का भी वही सम्मान है जितना बाहर की महिलाओं के लिए कोई भी मंजिल पाना असंभव नहीं है और उन्हें अपनी मंजिल खुद चुननी और पूरी क्षमता से उसे पाने के लिए प्रयास करना चाहिए। कोविड काल में देहरादून को बचाने और किसी को भूखा न रहने देने के अभियान में अनुपम योगदान के लिए नितिका खंडेलवाल को सम्मानित किया गया।
नारी सशक्तीकरण और बाल शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य के लिए परमार्थ निकेकतन ऋषिकेश की साध्वी भागवती सरस्वती जी को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि धरती पर ब्रह्मा के सृजन का काम एक महिला जननी के रूप में करती है। हर नारी के अन्दर शक्ति है उसे सशक्तीकरण की नहीं सिर्फ बराबरी की जरूरत है।
पूर्व एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिशनर सुनिता सिंह ने कहा कि ज्ञान में ही शक्ति है इसलिए जरूरत है कि हर महिला को शिक्षित किया जाये। संविधान ने महिलाओं के पुरूषों के बराबर अधिकर दिए हैं। समाज को इसे स्वीकार करने की जरूरत है। महिला सशक्तीकरण के लिए सबसे पहले आर्थिक रूप से सक्षम बनने की जरूरत है।
इस मौके पर ग्राफिक एरा डीम्ड युनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रो. (डा.) आरसी जोशी, प्रो वाईस चांसलर डा एचएन नागाराजा, ग्राफिक एरा हिल युनिवर्सिटी के कुलपति डा. संजय जसोला, दोनो विश्वविद्यालयों के शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। र्काक्रम का संचालन डायरेक्टर डिसटेंस लर्निंग प्रो. (डा.) राज के धर ने किया।
साहिर के बहाने महिलाओं की स्थिति पर मंथन
धाद साहित्य एकांश की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हरदिल अजीज शायर साहिर लुधियानवी के बहाने महिलाओं की स्थिति पर मंथन किया गया। कहा गया कि महिलाओं की स्थिति सुधर रही है, लेकिन फिर भी उन्हें उनका हक दिलाने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है।


सोमवार को तिलक रोड स्थित प्ले पैन स्कूल में दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम में पहले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर व्याख्यान दिए गए और उसके बाद शायर साहिर लुधियानवी के जन्म शताब्दी समारोह के बहाने महिलाओं की ब्यथा को उजागर करती उनकी ग़ज़लों और नज्मों पर चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता बसंती मठपाल ने कहा कि महिलाएं आज समाज में अपना विशिष्ट दर्जा रखती हैं। किसी भी क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से कम नहीं है। विशिष्ट अतिथि डौली डबराल ने कहा कि महिलाओं की स्थिति निरंतर सुधर रही है, लेकिन अभी भी सुरक्षा की दृष्टि से बहुत कुछ किया जाना बाकी है। मुख्य अतिथि डा. सविता मोहन ने कहा कि आज महिलाएं सिस्टम को आइना दिखा रही हैं।
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता प्रख्यात शायर अंबर खरबंदा ने साहिर लुधियानवी की गजलों और नज्मों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य अतिथि अनिल अग्रवाल ने साहिर लुधियानवी की ग़ज़लों को साझा किया। इस मौके पर कविता बिष्ट और निकी पुष्कर ने साहिर के गीत और नज्में सुनाई। डा. इंदू अग्रवाल, प्रो. उषा झा, निशा गुप्ता और राजेश्वरी सेमवाल ने कविता पाठ किया।
संस्था की संयोजक डा. विद्या सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि प्रभारी कल्पना बहुगुणा और संगीता बहुगुणा ने आभार व्यक्त किया। संचालन मंजू काला और सचिव दर्द गढ़वाली ने किया। इस मौके पर हास्य कवि राकेश जैन, शादाब अली, लोकगायिका पूनम नैथानी, सुमति बडोनी, नीलमप्रभा वर्मा आदि मौजूद थे।

गोष्ठी में की गई घरेलू हिंसा की निंदा
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर “वर्तमान परिवेश मे समाज मे टूटते वैवाहिक सम्बंधो के कारण और इनके निदान” विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी मे अनेक सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधियो ने भाग लेकर अपने विचार व्यक्त किए। वकताओ ने घरेलू हिंसा, पारस्परिकअविश्वास, व्यक्तिगत अपेक्षाऐ, दहेज की मांग, शराब का प्रचलन आदि पर चिंता व्यक्त की। साथ ही इसके लिए पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित फिल्मे, टीवी सीरियल, फेसबुक चैटिंग, मोबाइल फोन पर उपलब्ध अश्लील वीडियो आदि को जिम्मेदार बताया गया। साथ ही कहा कि हमें मिलजुलकर इसे रोकना होगा।
इस अवसर समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रो मे प्रतिष्ठा अर्जित करने वाली महिलाओं को शाल ओढ़ाकर कर सम्मानित किया गया। इनमे वरिष्ठ आन्दोलनकारी महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा सुशीला बलूनी, अपनी पाठशाला की संस्थापक कविता खान, समाजसेवी बीना शर्मा, सर्वधर्म समाज सद्भावना समिति की संस्थापक अध्यक्ष गुलिस्तां खानम, समरीन, मनीषा, नाजिया, गजल खान आदि शामिल थीं।
इस दौरान राष्ट्रीय अखिल भारतीय उपभोक्ता समिति के ब्रिगेडियर केजी बहल, राष्ट्रीय अभिभावक संगठन के अध्यक्ष आरिफ खान, संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव डाक्टर मुकुल शर्मा, पूर्व सैनिक संगठन के कर्नल ऐके मन्हास, सिख वैलफेयर सोसायटी के संस्थापक जीएस जस्सल, उत्तराखंड आन्दोलनकारी मंच के महासचिव प्रदीप कुकरेती, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सुशील त्यागी आदि सहभागी उपस्थित रहे।

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