July 3, 2022

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लॉकडाउन के 252 दिनः कोरोना का कहर जारी, साइड इफेक्ट बना जांच का विषय, उत्तराखंड व हिमाचल में चिंताजनक मौत का आंकड़ा

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लॉकडाउन जब शुरू हुआ था, तब से अब तक 252 दिन हो गए हैं। नवंबर माह के आखिरी दिन कोरोना की लहर पूरे देश में 94 लाख 37 हजार को अपना शिकार बना चुकी है और मौत का आंकड़ा भयावह एक लाख सैतीस हजार पार कर चुका है। सक्रिय मामलों की संख्या 4 लाख 55 हजार से ज्यादा है और ठीक होने वालों का आंकड़ा 88 लाख से ज्यादा शुकून देता है।
साइड इफेक्ट बना जांच का विषय
अभी यह और जांच का विषय है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में साइड इफेक्ट क्या हो रहे हैं। उड़ीसा के एक युवा वैज्ञानिक कोरोना से पीड़ित होने के बाद अब पूरी जिंदगी सांस के रोग से पीड़ित बने रहेंगे। कोरोना ने उनके फेफड़ों पर प्रतिकूल असर डाला है।
जिस माडल को पहले सराहा गया, वहीं स्थिति चिंताजनक
केरल में कोरोना ने सबसे पहले पैर पसारे और अब यहां कोरोना मरीजों की संख्या 5 लाख 99 हजार से ज्यादा हो चुकी है। केरल की जनसंख्या 3 करोड़ 33 लाख से ज्यादा है और केरल के कोरोना माडल को काफी सराहा जाता है। केरल में मौत का आंकड़ा 2223 पार कर गया है और सक्रिय मरीजों की संख्या 29530 बनी हुई है। इन आंकड़ों से एक बात समझ आ रही है कि देश में मौत का आंकड़ा एक प्रतिशत से ज्यादा और केरल में 0.37 प्रतिशत है। केरल में कोरोना लोकल, चीन और खाड़ी के देशों से लौटने वाले प्रवासियों के साथ भी आया है।
हिमालयी राज्यों में भी कोरोना ने बनाई पकड़
हिमालयी राज्यों की बात करें तो जम्मू कश्मीर से अरूणाचल प्रदेश तक कोरोना अपनी पहुंच बना चुका है। इन राज्यों की जनसंख्या 4 करोड़ 39 लाख से ज्यादा है ओर यहां 5 लाख 51 हजार संक्रमित और 5645 मरीजों की मौत हो चुकी है जो कि एक प्रतिशत से ज्यादा है।
मौत के आंकड़े भी चिताजनक
राज्यवार कोरोना का प्रकोप देखें तो असम में 2 लाख 12 हजार, जम्मू कश्मीर में 1 लाख 10 हजार, उत्तराखंड 74 हजार से ज्यादा और हिमाचल प्रदेश में 40 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। कोरोना मौत के मामलों में जम्मू कश्माीर में सबसे ज्यादा 1694, उत्तराखंड 1231, असम 981 और हिमाचल 635 मौत के साथ चौथे स्थान पर आ गया है।
दर्शाता है खस्ताहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को
कोरोना में मौत के आंकड़े यह साबित करते हैं कि हमारे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की कितनी खस्ता हालात हैं। इन चार हिमालयी राज्यों में मौत का आंकड़ा प्रतिशत में उत्तराखंड 1.64 प्रतिशत, हिमाचल 1.58 प्रतिशत, जम्मू कश्मीर 1.53 प्रतिशत और असम 0.46 प्रतिशत हेल्थ सेवाओं का हाल बयान करते हैं।
त्रिपुरा 32674, मणिपुर 24910, अरूणाचल 16269 , मेघालय 11581, और नागालैंड 11186 में कोरोना मामले दस हजार से पार कर गए है और मौत के मामले त्रिपुरा 370, मणिपुर 273 और मेघालय 111 सैकड़ा पार हैं और अरूणाचल में मौत 54 हुई हैं।
सिक्किम की स्थिति बनी हुई है दारूण
यहां 4985 मरीजों में 108 मौत हुई हैं। उल्लेखनीय है कि पिछली जनगणना में सिक्किम की जनसंख्या करीब 6 लाख 7 हजार दर्ज हुई है। मिजोरम में 3825 मामले और 5 मौत दर्ज हुई हैं जबकि लद्दाख में 8328 मामले और 116 मौत हो चुकी हैं।
उत्तराखंड में देहरादून की स्थिति खतरनाक
उत्तराखंड का जनपदवार ब्योरा देखें तो अस्थायी राजधानी देहरादून की हालत सबसे पतली है। प्रदेश 74795 मामले दर्ज हुए हैं और देहरादून में 21373 यानि 28 प्रतिशत से अधिक मरीज मिले हैं। पूरे प्रदेश में 1231 मौत हुई हैं और इन में 683 यानि 55 प्रतिशत से अधिक मौत देहरादून जनपद में हुई हैं। मौत का यह प्रतिशत 3.19 बैठता है जो कि राष्ट्रीय एक प्रतिशत से बहुत ज्यादा है।
नैनीताल जनपद में 8539 मामले और 169 मौत यानि 1.98 प्रतिशत, हरिद्वार में 12087 मामले और 135 मौत यानि 1.11 प्रतिशत और उधम सिंह नगर में 10302 मामले और 103 मौत यानि 0.99 प्रतिशत मामले दर्ज हो चुके हैं। पौड़ी जनपद में 4230 माामले और 44 मौत यानि 1.04 प्रतिशत का आंकड़ा दर्ज हुआ है।
अगर उत्तराखंड के चार बड़े जनपद देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल के कोरोना मामलों को एकत्रित करें , जहां सबसे बेहतर हैल्थ सुविधायें हैं तो इन चार जनपदों में ही प्रदेश के 70 प्रतिशत मामले और 88 प्रतिशत मौत हुई हैं।
कुमाऊं से ज्यादा गढ़वाल की स्थिति खराब
मंडलवार अध्ययन करने पर गढ़वाल मंडल की हालत अभी पतली बनी हुई हैं। मंडल के सात जनपदों में कुल माामले 48811, सक्रिय मामले 3377 और मौत 907 हुई हैं। 467 कोरोना मरीज गढ़वाल मंडल से बाहर जा चुके हैं। यानि प्रदेश में गढ़वाल मंडल में कोरोना का योगदान 65 प्रतिशत और दुःखद मौत का 74 प्रतिशत हुई हैं।
कुमायूं मंडल में सजग प्रशासनिक मशीनरी के चलते प्रदेश के आंकड़ों में कोरोना योगदान 35 प्रतिशत और मौत में शेष 26 प्रतिशत बैठता है। कुमायूं मंडल में अब तक कुल मामले 25984 , सक्रिय 1682 और 382 मौत दर्ज हुई हैं।

लेखक का परिचय

भूपत सिंह बिष्ट
स्वतंत्र पत्रकार, उत्तराखंड।

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