July 3, 2022

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल का निधन, कोरोना से भी थे संक्रमित

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद अहमद पटेल का आज सुबह साढ़े तीन बजे निधन हो गया। वह गुड़गांव के मेदांता अस्पताल की आइसीयू में भर्ती थे। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे फैसल पटेल ने दी। अहमद पटेल कुछ हफ्ते पहले कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। 71 वर्षीय अहमद पटेल ने एक अक्टूबर को ट्वीट किया था कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। फैसल पटेल ने ट्वीट करके जानकारी दी कि-बहुत दुख के साथ यह सूचना दी जा रही है कि आखिरकार मेरे पिता अहमद पटेल का 25 नवंबर को रात 3:30 बजे देहावसान हो गया। करीब एक माह पहले उनके कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से उनकी तबीयत बहुत खराब थी। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। अल्लाह उन्हें जन्नत में जगह दे।
पीएम मोदी ने ट्विट कर जताया दुख
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि-अहमद पटेल जी का निधन दुखद है। उन्होंने कई साल सार्वजनिक जीवन में बिताए और समाज की सेवा की। उनके तेज दिमाग और कांग्रेस को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सदा याद किया जाएगा। उनके बेटे फैसल से बात की और संवेदना व्यक्त की। अहमद भाई की आत्मा को शांति मिले।
सोनिया गांधी ने कहा कि एक सहयोगी और दोस्त खो दिया
सोनिया गांधी ने अहमद पटेल के निधन को निजी क्षति करार दिया है। उन्होंने कहा-मैंने एक अपरिवर्तनीय कॉमरेड, एक वफादार सहयोगी और एक दोस्त खो दिया है। बता दें कि सोनिया गांधी तबीयत खराब होने की वजह से इन दिनों दिल्ली से बाहर हैं और गोवा में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। ऐसी चर्चा है कि तबीयत ठीक नहीं होने के कारण सोनिया गांधी अहमद पटेल की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो पाएंगी। सोनिया गांधी ने ट्विटर पर अहमद पटेल के लिए एक लंबा नोट लिखा है। उन्होंने लिखा-अहमद पटेल के रूप में मैंने एक सहयोगी को खो दिया है, जिसका पूरा जीवन कांग्रेस पार्टी को समर्पित था। उनकी ईमानदारी और समर्पण, अपने कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, वह हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते थे। उनकी उदारता दुर्लभ गुण थे, जो उन्हें दूसरों से अलग करते थे।
प्रियंका ने जताया दुख
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अहमद पटेल के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया कि-अहमद जी न केवल एक ऐसे बुद्धिमान और अनुभवी सहकर्मी थे, जिनसे मैं लगातार सलाह और परामर्श लेती थी, वे एक दोस्त भी थे। वे हम सभी के साथ खड़े रहे, दृढ़, निष्ठावान और अंत तक भरोसेमंद रहे। उनका निधन से एक विशाल शून्य आ गया है। उनकी आत्मा को शांति मिले।
सत्ता और प्रचार से खुद को रखते थे दूर
अहमद पटेल के दोस्त, विरोधी और सहकर्मी उन्हें अहमद भाई कह कर पुकारते रहे, लेकिन वे हमेशा सत्ता और प्रचार से खुद को दूर रखना ही पसंद करते थे। सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और संभवतः प्रणब मुखर्जी के बाद यूपीए के 2004 से 2014 के शासनकाल में अहमद पटेल सबसे ताकतवर नेता थे।
इसके बावजूद वे उस दौर में केंद्र सरकार में मंत्री के तौर पर शामिल नहीं हुए। 2014 के बाद से, जब कांग्रेस ताश के महल की तरह दिखने लगी तब भी अहमद पटेल मज़बूती से खड़े रहे और महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी के निर्माण में अहम भूमिका निभाई और धुर विरोधी शिवसेना को भी साथ लाने में कामयाब रहे। इसके बाद जब सचिन पायलट ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत की तब भी अहमद सक्रिय हुए।
सारे राजनीतिक विश्लेषक ये कह रहे थे कि पायलट ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह बीजेपी में चले जाएंगे तब अहमद पटेल पर्दे के पीछे काम कर रहे थे। उन्होंने मध्यस्थों के जरिए यह सुनिश्चित किया कि सचिन पायलट पार्टी में बने रहे।

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