July 1, 2022

Lok Saakshya

Jan Jan Ki Awaj

भाई दूजः भाई की लंबी उम्र की कामना को लेकर बहनों ने किया तिलक, बुजुर्गों से लिया आशीर्वाद

1 min read

भाई दूज पर्व समूचे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाई को तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना की। घरों में देवताओं की पूजा की गई। बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया गया। वहीं, भाई ने भी बहन की रक्षा का संकल्प लिया और संकट की हर घड़ी में साथ देने का वचन निभाया।
भाई दूज का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हर वर्ष मनाया जाता है। भाईदूज का पर्व रक्षाबंधन की तरह ही मनाया जाता है। इसमें बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी सुख और समृद्धि का कामना करती है। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। भैया दूज का त्योहार दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है।
भाई दूज शुभ मुहूर्त 2020
भाई दूज तिथि- सोमवार, 16 नवंबर 2020
भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 1 बजकर 11 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक


ये है पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया की दो संताने थी। यमराज और यमुना। भाई और बहन दोनों में बड़ा ही स्नेह था। बहन यमुना हमेशा चाहती थी भाई यमराज उनके घर आकर भोजन ग्रहण किया करें। लेकिन हमेशा काम में व्यस्त रहने वाले यमराज बहन की विनती को टाल देते थे।


एक बार बहन यमुना ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि पर अपने घर के दरवाजे पर भाई यमराज को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुई। बहन यमुना ने बहुत ही प्रसन्न मन से भाई यमराज को भोजन करवाया। बहन के स्नेह और प्यार को देखकर भाई यमदेव ने वर मांगने को कहा।


तब बहन ने वरदान के रूप में यमराज से यह वचन मांगते हुए कहा कि आप हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भोजन करने आएं। साथ ही इस तिथि पर जो बहने अपने भाई को टीका लगाकर उन्हें भोजन खिलाएं उनमें आपका भय न हो।


तब यमदेव ने बहन यमुना को यह वरदान देते हुआ कहा कि आगे से ऐसा ही होगा। तब से यही परंपरा चली आ रही है कि हर वर्ष जो बहने अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर भोजन कराएंगी उसे और उसके भाई को कभी भी यमदेव का भय नहीं सताएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page