June 30, 2022

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महिलाओं में सर्विक्स कैंसर की जागरूकता को लेकर वेबिनार 17 को, जानिए महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर के लक्षण

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश महिलाओं में होने वाले सर्विक्स कैंसर के मामलों को लेकर चिंतित है। इसके मद्देनजर संस्थान की ओर से कोविडकाल में वेबिनार के माध्यम से महिला जनजागरुकता अभियान शुरू किया जा रहा है। 17 नवंबर को अपराह्न 2 से 3 बजे पहला वेबिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें डब्ल्यूएचओ एक्सपर्ट डॉ. आर. शंकरनारायणन समेत देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, चिकित्सा विशेषज्ञ,एनएचएम के वरिष्ठ प्रतिनिधि व मेडिकल हेल्थ एंड फेमिली वैलफेयर उत्तराखंड के सदस्य शिरकत कर सामूहिक चर्चा करेंगे।
इस चर्चा से जुड़ने के लिए एम्स की ओर से https://zoom.us/meeting/register/tjlqdumtpzkuHNyme7dm30-or4vvK8kwGiul ऑनलाइन लिंक भी जारी किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि भारत में सर्विक्स कैंसर (बच्चेदानी के मुहं का कैंसर ) के मामले काफी अधिक हैं। चिकित्सक इसकी वजह महिलाओं में अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता की कमी को मानते हैं।
रोकथाम को वेक्सीन जरूरी

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर (सर्विक्स कैंसर) पर शत प्रतिशत नियंत्रण संभव है। बशर्ते बालिकाओं को 9 से 14 वर्ष की उम्र के बीच इस कैंसर की रोकथाम के लिए वेक्सीन अनिवार्यरूप से लगाई जाए।

फोटोः प्रोफेसर रवि कांत

उन्होंने बताया कि महिलाओं में पाया जाने वाला सर्विक्स कैंसर ही एक ऐसा कैंसर है जिसका पूर्ण उपचार संभव है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि बालिकाओं व महिलाओं को अधिकतम 26 वर्ष की उम्र तक बच्चेदानी के कैंसर की रोकथाम के लिए वेक्सीन लगाई जा सकती है। मगर 14 वर्ष से अधिक उम्र में वेक्सिनेशन अपेक्षाकृत कम असरकारक होता है। उन्होंने बताया कि यह कैंसर महिलाओं में कब होने लगता है, इसका उन्हें पता भी नहीं चल पाता है।

उन्होंने बताया कि बच्चेदानी के मुहं से इस कैंसर की जांच की जाती है। वर्ष 2030 तक समाप्त करने का लक्ष्य एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर को समाप्त करने के लिए 90 प्रतिशत तक बालिकाओं में अनिवार्य वेक्सिनेशन और 70 प्रतिशत महिलाओं में इस कैंसर से बचाव के लिए जीवन में 35 से 45 वर्ष की उम्र के बीच कम से कम दो बार सर्विक्स कैंसर की विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका कहना है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए 9 से 14 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं में वेक्सीन की एक डोज ही पर्याप्त होती है।

भारत में डिलीवरी के समय मृत्युदर में आई कमी

एम्स के महिला रोग विभाग की कैंसर विशेषज्ञ डा. शालिनी राजाराम ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष सर्विक्स कैंसर के करीब एक लाख मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 10 वर्ष पूर्व देश में सर्वाधिक मामले महिलाओं की डिलीवरी के समय मृत्युदर के आते थे, जिसमें प्रतिवर्ष करीब 72 हजार का आंकड़ा था, मगर सरकार की ओर से इसे रोकने के लिए वि​भिन्न स्तर पर जनजागरुकता मुहिम चलाई गई, जिससे इस तरह की मृत्युदर में काफी कमी आई है। उनका मानना है कि इसी तरह का जनजागरुकता अभियान महिलाओं में पाए जाने वाले सर्विक्स कैंसर को लेकर भी चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश की ओर से 17 नवंबर को इस विषय पर वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। जिसमें डब्ल्यूएचओ के एक्सपर्ट डॉ. आर. शंकरनारायणन के अलावा देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सक इस बीमारी की रोकथाम को लेकर सामूहिक चर्चा करेंगे। जिसमें विशेषज्ञ वेक्सिनेशन व स्क्रीनिंग के विभिन्न तरीकों पर चर्चा करेंगे।

बताया गया कि डा. आर. शंकरनारायणन कैंसर कंट्रोल विश्व स्वास्थ्य संगठन इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च इन कैंसर (आईएआरसी) के विशेष सलाहकार हैं। कार्यक्रम में इसके अलावा एनएचएम, उत्तराखंड की निदेशक डा. अंजलि नौटियाल व नेशनल प्रोग्राम मेडिकल हेल्थ एंड फेमिली वैलफेयर, उत्तराखंड की निदेशक डा. सरोज नैथानी भी प्रतिभाग करेंगी।

होगी क्विज व निबंध प्रतियोगिता

संगोष्ठी में इस विषय पर क्विज व निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पैनल डिस्कशन में अन्य लोग खासकर महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। इसके लिए एम्स की ओर से ऑनलाइन लिंक जारी किया गया है व ऑनलाइन परिचर्चा में शिरकत करने के लिए स्थानीय विद्यालयों में शिक्षकों व विद्यार्थियों से भी अपील की गई है। जिससे अधिकाधिक लोग इस जनजागरुकता मुहिम से जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि एम्स की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान उत्तराखंड राज्य में सर्वाइकल कैंसर की संपूर्ण रोकथाम के लिए नीति तैयार करेगा। संगोष्ठी में निदेशक एवं सीईओ प्रो.रवि कांत, डीन एकेडमिक प्रो.मनोज गुप्ता, गाइनी विभागाध्यक्ष डा.जया चतुर्वेदी, गाइनी कैंसर विशेषज्ञ डा.शालिनी राजाराम प्रतिभाग करेंगे।

यह हैं महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर के लक्षण

महिलाओं की बच्चेदानी से रक्तस्राव। महिलाओं में संभोग के बाद बच्चेदानी से खून आना। बच्चेदानी से बदबूदार पानी का निकलना आदि। ऐसे लक्षण पाए जाने पर महिलाओं को तत्काल अस्पताल में इसकी जांच करानी चाहिए व विशेषज्ञ चिकित्स का परामर्श लेना चाहिए। साथ ही सर्विक्स कैंसर की रोकथाम के लिए वेक्सीन अनिवार्य रूप से लगानी चाहिए।

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