June 29, 2022

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राजधानी में पैसा हुआ पानी, विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम में तीन दिन से पेयजल आपूर्ति ठप, बोतलबंद और गंगाजी का सहारा

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विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री में पिछले तीन दिन से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को जल संस्थान ठीक नहीं कर पाया है। इससे गंगोत्री पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं, गंगाजी के पानी लाकर लोग अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। गंगोत्री धाम में पानी की व्यवस्था न होने से स्थानीय व्यापारियों और तीर्थ पुरोहितों में सरकार के प्रति रोष है। उनका कहना है कि चारधाम यात्रा के बेहतर बनाने की दिखा में दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट है। वहीं, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पानी के नाम पर पैसा पानी पानी हो रहा है।
बगैर फिल्ट्रेशन का सप्लाई हो रहा है पेयजल
गंगोत्री धाम में मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर देवऋषि नाला स्रोत से पेयजल की आपूर्ति की जाता है। इससे लिए कोई फिलट्रेशन प्लांट तक नहीं है। स्रोत से सीधे पानी पाइप लाइनों में जोड़ दिया गया है। ऐसे में कभी लोगों को रेतीला पानी मिलता है, तो कभी पानी में मिट्टी और कीड़े आने की शिकायत भी रहती है।
यहां बहा रहे पानी की तरह पैसा, धार्मिक स्थलों की उपेक्षा
ये स्थिति तब है जबकि राजधानी देहरादून में सिर्फ अपर जोन में ही हर माह पानी में क्लोरीनीकरण के लिए जल संस्थान पानी की तरह पैसा बहा रहा है। अपर जोन के लिए पुरकुल में ट्रीटमेंट प्लांट बनाया हुआ है। यहां हर माह पानी की सफाई के लिए ठेकेदार को साढ़े आठ लाख का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद लोगों की शिकायत रहती है कि उनके घरों में मिट्टी मिला पानी आ रहा है। आखिर ये पैसा कहां जा रहा है और इसका क्या हो रहा है, ये भी जांच का विषय है।
गंगोत्री में इस कारण नहीं आ रहा पानी
बताया जा रहा है कि गंगोत्री में स्रोत के निकट की पेयजल लाइन टूटी पड़ी है। इसके अलावा लाइन अन्य स्थानों पर भी टूटी है। पानी के रिसाव के चलते सड़क भी ध्वस्त हो चुकी है। कई बार जल संस्थान टूटी पाइप लाइन की मरम्मत के बजाय उस पर रबर की ट्यूब बांधकर जुगाड़ संस्कृति से काम चलाता है। फिलहाल पिछले तीन दिन से गंगोत्री में पेयजल आपूर्ति ठप है।
इस कारण आता है गंदा पानी
गंगोत्री के व्यापारियों का कहना है कि पेयजल के नाम पर व्यापारियों को लॉकडाउन की अवधि के भी बिल थमा दिए गए, जबकि यात्रा नहीं थी। अब यात्रा शुरू हुई तो पानी की व्यवस्था ठप पड़ी है। उनका कहना है कि पानी को टैंक में न देकर सीधे नलों तक पहुंचाने से भी गंदे पानी की समस्या हमेशा बनी रहती है। पानी के साथ रेत, कंकण, पौधों के छिलके, घास सीधे नलों से घरों तक पहुंचते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं। वहीं घरों में लगी नलों की टोली बार-बार खराब होती रहती है।
व्यवस्थाएं न होने से रात नहीं रुकते पर्यटक
गंगोत्री के तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक, धाम में बिजली पानी की समुचित आपूर्ति न होने से रात को यहां पर्यटक रुकना पसंद नहीं करता है। समस्या के स्थाई समाचार के लिए पेयजल महकमें ने अभी तक कोई ठोस योजना तक नहीं बनाई है।

गंगोत्री धाम से सत्येंद्र सेमवाल की रिपोर्ट

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