July 4, 2022

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मानव और प्रकृति के मध्य प्राकृतिक सेतु का आभास देता है राजाजी राष्ट्रीय पार्क, जानिए इतिहास और खासियत

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वैज्ञानिक प्रगति और तमाम उपभोग के साधनों को जुटाने की लालसा और एक सीमा तक शायद लिप्सा में, प्रकृति के दोहन में जुटा मानव घूम-फिर कर फिर प्रकृति की ओर लौट राहत चाहता है। मनोवृति और वन्य जीव जन्तुओं को भी प्रकृति के अनुकूल जीवन जीने देने का परिणाम है वन्य जीव अभ्यारण्य और राष्ट्रीय पार्क।
पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र
देहरादून जिले को अनूठा गौरव प्रदान है राजाजी राष्ट्रीय पार्क के गठित होने का। राजाजी राष्ट्रीय पार्क, देश के प्रमुख राष्ट्रीय वन्य जीवन अभ्यारण्यों में से एक है। यह 830 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। देश विदेश के पर्यटकों के आकर्षण के एक मुख्य केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध होते इस पार्क के लगभग 17 किलोमीटर लम्बे भू-भाग से सटकर गंगा नदी बहती है, जो
इसकी मनोरमता को बढ़ाती है।


1983 में घोषित हुआ सुरक्षित वन क्षेत्र
हरिद्वार-ऋषिकेश के पास बसी बस्तियां तथा सुसवा नदी के समीप का ग्रामीण क्षेत्र जो राष्ट्रीय पार्क की सीमा से सटा है। मानव और प्रकृति के मध्य प्राकृतिक सेतु का सा आभास देता है।
वन्य जीव जन्तुओं को जीवन जीने देने योग्य वातावरण तथा पर्यावरण सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने 12 अगस्त 1983 को, राजाजी राष्ट्रीय पार्क को सुरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने का निर्णय लिया। इस प्रकार इसे प्रदेश का पांचवां व सबसे बड़ा राष्ट्रीय पार्क होने का गौरव प्राप्त हुआ।
ये हैं वन्य जीव
तीन विभिन्न जिलों में विस्तार लिये राजाजी राष्ट्रीय पार्क का 326 वर्ग किलोमीटर भाग देहरादून जिले में है। पार्क की समुद्र तल से ऊंचाई 302 मीटर से एक हजार मीटर तक है। इस राष्ट्रीय पार्क में मुख्यतः चीतल, सांभर, घुरड़, नील गाय, जंगली सुअर, हाथी, लंगूर, टाइगर और बंदर पाये जाते हैं। विभिन्न प्रजातियों के पक्षी तथा विभिन्न प्रकार के सांप और अजगर भी हैं।


देहरादून से 23 किमी की दूरी पर स्थित
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड के देहरादून से 23 किमी की दूरी पर स्थित है। यह देहरादून (उत्तराखंड) के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है। 1983 से पहले इस क्षेत्र में फैले जंगलों में तीन अभयारण्य थे- राजाजी, मोतीचूर और चिला। 1983 में इन तीनों को मिला दिया गया।
इनके नाम से पड़ा राजाजी नाम
महान स्वतंत्रता सेनानी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर इसका नाम राजाजी राष्ट्रीय उद्यान रखा गया। 830 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला राजाजी राष्ट्रीय उद्यान अपने यहाँ पाए जाने वाले हाथियों की संख्या के लिए जाना जाता है। इसके अलावा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में हिरन, चीते, सांभर और मोर भी पाए जाते हैं। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की 315 प्रजातियां पाई जाती हैं। यहाँ पर एक पेड़ ऐसा भी पाया गया जो अपने साथ 20 पेड़ जोड़ चुका है। एक के बाद एक पेड़ ऊपर से नीचे की और जमीन पे खड़े हो गये है। यहां एक ही पेड़ का 21 पेड़ हो चुके है।

लेखक का परिचय
लेखक देवकी नंदन पांडे जाने माने इतिहासकार हैं। वह देहरादून में टैगोर कालोनी में रहते हैं। उनकी इतिहास से संबंधित जानकारी की करीब 17 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। मूल रूप से कुमाऊं के निवासी पांडे लंबे समय से देहरादून में रह रहे हैं।

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