July 3, 2022

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दान के अनेक रूप, कविता से जानिए क्या है वैज्ञानिक दान

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वैज्ञानिक दान

ब्रह्मा बोले मनुज से दान तुम्हारा धर्म
कर्मयोनि तुमको मिली समझो इसका मर्म

स्मृतियों ने अबतक कहे अनेकविध हैं दान
भूमिदान धनदान या अन्नदान गोदान

दान सदा सत्पात्र को दें तो कुछ है अर्थ
अपात्र को जो कुछ दिया होता वह सब व्यर्थ

जो कुछ अपने पास है उसमें से यदि जाय
निज मन में संतोष हो तृप्ति दूसरा पाय

आज हमें विज्ञान ने अवसर दिये अनेक
अधिक श्रेष्ठ कुछ दान के अधिक बनें हम नेक

रक्त नेत्र या शुक्र के दान शक्य हैं आज
दान अंग या देह का आदर करे समाज

रक्तदान से मृत्युमुख पड़ा व्यक्ति बच जाय
अपनी हानि जरा नहीं प्राण दूसरा पाय

नेत्रदान जैसा भला होगा सुख क्या अन्य
मरकर भी जिवित रहें पुरुषोत्तम वे धन्य

घर में जले चिराग यदि पा कर के सन्तान
ऐसे सुख के हेतु है उत्तम शुक्र प्रदान

कोखदान भी पुण्य है देता है आल्हाद
कोई पा संतान सुख देता आशीर्वाद

दो गुर्दे हमको मिले हानि नहीं दे एक
जीवन सुमन पुनः खिले यही प्रबुद्ध विवेक

दी तो थीं निज अस्थियाँ ऋषि दधीचि ने तब
अंगदान से फिर भला कतराना क्यों अब

मरने पर हो राख या मिट्टी ही यह देह
शिक्षार्थी पर पा बनें ज्ञानी निःसंदेह

तन की ममता व्यर्थ है प्राण गये तन शून्य
किसी काम यदि आ सके अन्य नहीं कुछ पुण्य

जीवित या मृत देह के ये सच्चे सम्मान
सबको करने चाहिये ये वैज्ञानिक दान

लेखक का परिचय

नाम: मुकुन्द नीलकण्ठ जोशी

जन्म: 13 जुलाई, 1948 ( वास्तविक ), 1947 ( प्रमाणपत्रीय ), वाराणसी

शिक्षा: एम.एससी., भूविज्ञान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), पीएचडी. (हे.न.ब.गढ़वाल विश्वविद्यालय)

व्यावसायिक कार्य: डी.बी.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देहरादून में भूविज्ञान अध्यापन

रुचि:

  1. विज्ञान शोध एवं लेखन
    25 शोध पत्र प्रकाशित
    एक पुस्तक “मैग्नेसाइट: एक भूवैज्ञानिक अध्ययन” प्रकाशित
  2. लोकप्रिय विज्ञान लेखन
    एक पुस्तक “समय की शिला पर” (भूविज्ञान आधारित ललित निबन्ध संग्रह) तथा एक विज्ञान कविता संग्रह “विज्ञान रस सीकर” प्रकाशित
    अनेक लोकप्रिय विज्ञान लेख प्रकाशित, सम्पादक “विज्ञान परिचर्चा” ( उत्तराखण्ड से प्रकाशित लोकप्रिय विज्ञान पत्रिका )
  3. हिन्दी साहित्य
    प्रकाशित पुस्तकें
  4. युगमानव (श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित खण्डकाव्य)
  5. गीत शिवाजी (छत्रपति शिवाजी के जीवन पर गीत संग्रह)
  6. साहित्य रथी ( भारतीय साहित्यकार परिचय लेख संग्रह )
  7. हिन्दी नीतिशतक (भर्तृहरिकृत “नीतिशतकम्” का हिन्दी समवृत्त भावानुवाद)
    विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएँ प्रकाशित
    संपर्कः
    मेल— mukund13joshi@rediffmail.com
    व्हॉट्सएप नंबर— 8859996565

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